कोरोना से उबरने के बाद भी नहीं टला खतरा, दिमाग के इस खास हिस्से में आई सूजन बढ़ा रही अल्जाइमर का जोखिम
क्या आपको भी कोविड के बाद से लगातार थकान महसूस होती है? क्या आप चीजों को याद रखने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं या किसी काम पर ध्यान नहीं लगा पा रहे हैं ...और पढ़ें

थकान, ध्यान की कमी व याददाश्त से जुड़ी परेशानियों से अल्जाइमर का जोखिम (Image Source: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
प्रेट्र, नई दिल्ली। क्या आपने भी महसूस किया है कि आप कोरोना से रिकवर होने के बाद छोटी-छोटी बातें भूल रहे हैं या फिर हर वक्त ऐसी थकान महसूस होती है जो जाने का नाम नहीं ले रही? अगर आप इसे सिर्फ 'शारीरिक कमजोरी' समझकर नजरअंदाज कर रहे हैं, तो जरा ठहरिए। अमेरिका की 'न्यूयार्क विश्वविद्यालय' के शोधकर्ताओं ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है, जो आपकी चिंता बढ़ा सकता है।

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सिर्फ सामान्य कमजोरी नहीं है 'लॉन्ग कोविड'
अक्सर लोग कोरोना संक्रमण के बाद होने वाली थकान को सामान्य शारीरिक कमजोरी मान लेते हैं, लेकिन नए शोध के संकेत बताते हैं कि लॉन्ग कोविड का असर इससे कहीं ज्यादा गहरा हो सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह बीमारी हमारे दिमाग में कुछ ऐसे बदलाव ला सकती है, जो आमतौर पर अल्जाइमर जैसी गंभीर मानसिक बीमारियों से जुड़े होते हैं। आसान शब्दों में कहें तो थकान, एकाग्रता की कमी और याददाश्त की समस्याएं भविष्य में अल्जाइमर के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।
179 लोगों के दिमाग का किया गया स्कैन
इस निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए शोधकर्ताओं ने एक व्यापक अध्ययन किया। उन्होंने कुल 179 लोगों के दिमाग का एमआरआई (MRI) स्कैन किया। इस जांच में तीन तरह के लोग शामिल थे:
- वे लोग जो लॉन्ग कोविड से जूझ रहे थे।
- वे लोग जो कोविड से पूरी तरह ठीक हो चुके थे।
- वे लोग जिन्हें कभी कोरोना संक्रमण हुआ ही नहीं था।
दिमाग के इस खास हिस्से में आई सूजन
जांच के नतीजों ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया। उन्होंने पाया कि जो लोग लॉन्ग कोविड के शिकार थे, उनके दिमाग के 'कोरायड प्लेक्सस' नामक हिस्से में बदलाव आया था।
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इन मरीजों में यह हिस्सा औसतन 10 प्रतिशत बड़ा पाया गया और वहां रक्त का प्रवाह भी कम था। आपको बता दें कि कोरायड प्लेक्सस का काम दिमाग में सूजन को नियंत्रित करना और दिमाग से हानिकारक अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालना होता है। जब इस हिस्से में सूजन या बदलाव आता है, तो दिमाग की कार्यक्षमता बुरी तरह प्रभावित होती है।
याददाश्त और फोकस पर सीधा असर
अध्ययन में यह बात साफ तौर पर सामने आई कि दिमाग के अंदरूनी बदलावों का सीधा असर हमारी सोचने-समझने की शक्ति पर पड़ता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन प्रतिभागियों के दिमाग का कोरायड प्लेक्सस हिस्सा सामान्य से ज्यादा बड़ा था, उनका प्रदर्शन याददाश्त और ध्यान जांचने वाले मानक टेस्ट में काफी कमजोर रहा। उनका औसत स्कोर उन लोगों से कम था, जिनके दिमाग में यह बदलाव नहीं हुआ था।