सिर्फ हॉर्मोन्स नहीं, दिमाग पर भी असर डालता है मेनोपॉज; रिसर्च में सामने आई चौंकाने वाली बात
क्या आप जानते हैं कि मेनोपॉज सिर्फ फिजिकल हेल्थ को ही नहीं, बल्कि आपके ब्रेन फंक्शन को भी प्रभावित कर ...और पढ़ें

मेनोपॉज से बदल सकती है आपके दिमाग की बनावट (Image Source: AI-Generated)
HighLights
कैम्ब्रिज स्टडी: मेनोपॉज से दिमाग के ग्रे मैटर में कमी
मानसिक स्वास्थ्य, नींद और याददाश्त प्रभावित होती है
अल्जाइमर रोग से जुड़ाव का संकेत, महिलाओं में खतरा
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर हम मानते हैं कि मेनोपॉज का मतलब सिर्फ पीरियड्स का रुकना होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह प्रक्रिया चुपचाप आपके दिमाग की बनावट को भी बदल रही है? कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की एक चौंकाने वाली स्टडी ने इस 'अनदेखे सच' से पर्दा उठाया है।
इस नई रिसर्च के मुताबिक, मेनोपॉज केवल एक शारीरिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह आपके दिमाग के 'ग्रे मैटर' को सिकोड़ सकता है। इसका सीधा असर आपकी याददाश्त, नींद और मानसिक शांति पर पड़ता है। अगर आप या आपके घर में कोई महिला 45 से 55 साल की उम्र के बीच है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है।

(Image Source: AI-Generated)
स्टडी में क्या पता चला?
'साइकोलॉजिकल मेडिसिन' में प्रकाशित इस स्टडी में शोधकर्ताओं ने यूके बायोबैंक के डेटा का उपयोग किया, जिसमें लगभग 1,25,000 महिलाएं शामिल थीं। इनमें वे महिलाएं शामिल थीं जिनका मेनोपॉज अभी नहीं हुआ था और वे भी जिनका मेनोपॉज हो चुका था।
स्टडी के मुख्य निष्कर्ष इस प्रकार हैं:
- दिमाग की संरचना में बदलाव: मेनोपॉज के बाद दिमाग के कई महत्वपूर्ण हिस्सों में 'ग्रे मैटर' की मात्रा कम पाई गई।
- मानसिक स्वास्थ्य: चिंता, डिप्रेशन और नींद की समस्याओं का स्तर काफी बढ़ा हुआ मिला।
मानसिक स्वास्थ्य और नींद पर गहरा असर
शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन महिलाओं का मेनोपॉज हो चुका था (पोस्ट-मेनोपॉजल), उनमें मेनोपॉज से पहले वाली महिलाओं की तुलना में मानसिक समस्याएं अधिक थीं:
- चिंता और डिप्रेशन: पोस्ट-मेनोपॉजल महिलाओं को घबराहट या डिप्रेशन के लिए डॉक्टर या मनोचिकित्सक के पास जाने की अधिक आवश्यकता पड़ी।
- नींद की कमी: मेनोपॉज के बाद अनिद्रा और कम नींद की शिकायतें आम हो गईं।
- थकान: पर्याप्त नींद लेने के बावजूद भी महिलाओं ने लगातार थकान महसूस करने की बात कही।
- HRT (हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी) की भूमिका: जो महिलाएं HRT ले रही थीं, उनमें चिंता और डिप्रेशन का स्तर अधिक देखा गया। हालांकि, गहराई से जांच करने पर पता चला कि ये समस्याएं उनमें मेनोपॉज शुरू होने से पहले ही मौजूद थीं।
दिमाग की सुस्ती और अल्जाइमर का खतरा
स्टडी में लगभग 11,000 महिलाओं का MRI स्कैन किया गया। इसमें पाया गया कि मेनोपॉज के बाद दिमाग के उन हिस्सों (जैसे हिप्पोकैम्पस) में ग्रे मैटर कम हो गया था, जो याददाश्त और सीखने के लिए जिम्मेदार होते हैं।
- प्रतिक्रिया में देरी: डॉ. कैथरीना जुहल्सडॉर्फ के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ हमारी प्रतिक्रिया देने की क्षमता कुदरती तौर पर धीमी होती है, लेकिन मेनोपॉज इस प्रक्रिया को और तेज़ कर देता है।
- अल्जाइमर से संबंध: स्टडी की वरिष्ठ लेखिका प्रोफेसर बारबरा सहकियन ने चेतावनी दी है कि प्रभावित होने वाले मस्तिष्क के क्षेत्र वही हैं जो अल्जाइमर रोग से जुड़े हैं। यह इस बात का संकेत हो सकता है कि महिलाओं में पुरुषों की तुलना में डिमेंशिया के मामले लगभग दोगुने क्यों होते हैं।
विशेषज्ञों की राय
डॉ. क्रिस्टेल लैंगली के अनुसार, मेनोपॉज एक जीवन बदलने वाली घटना है। उन्होंने इस दौर से गुजरने वाली महिलाओं के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:
- स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं: व्यायाम करें, सक्रिय रहें और संतुलित आहार लें। यह मेनोपॉज के प्रभावों को कम करने में मदद करता है।
- संकोच न करें: महिलाओं को अपनी मानसिक स्थिति के बारे में बात करने में शर्मिंदा नहीं होना चाहिए। अगर आप संघर्ष कर रही हैं, तो दूसरों को बताएं और मदद मांगें।
- HRT का प्रभाव: शोध में पाया गया कि हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी दिमाग के बदलावों को पूरी तरह रोक तो नहीं पाती, लेकिन यह गिरावट की गति को धीमा जरूर कर देती है- जैसे गाड़ी में ब्रेक लगाना।
यह स्टडी स्पष्ट करती है कि मेनोपॉज के दौरान महिलाओं को न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक सहयोग और संवेदनशीलता की भी सख्त जरूरत होती है।
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