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    बाजार में बिकते सस्ते सॉफ्ट ड्रिंक्स हैं सेहत का महंगा सौदा, मोटापा और डायबिटीज का बढ़ाते हैं खतरा

    Updated: Sat, 17 Jan 2026 06:03 PM (GMT+05:30)

    सॉफ्ट ड्रिंक्स का स्वाद आपको भी खूब पसंद आता होगा। ऊपर से इसकी सस्ती कीमत, इसे और भी ज्यादा आकर्षक बनाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं सस्ती दिखने वाली ...और पढ़ें

    क्या आप भी खूब शौक से पीते हैं सोडा और सॉफ्ट ड्रिंक्स? (Picture Courtesy: Freepik)

    क्या आप भी खूब शौक से पीते हैं सोडा और सॉफ्ट ड्रिंक्स? (Picture Courtesy: Freepik)

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    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के समय में बाजार में मिल रहे सस्ते और आकर्षक पैक वाले सॉफ्ट ड्रिंक्स हमारी डाइट का हिस्सा बन चुके हैं। बच्चों से लेकर बड़ों तक, हर किसी को इनका स्वाद पसंद आता है और इन्हें बड़े चाव से पिया जाता है। चिलचिलाती धूप हो या दोस्तों के साथ कोई पार्टी, सोडा और शुगरी ड्रिंक्स के बिना अधूरी लगती है।

    लेकिन क्या आप जानते हैं ये सस्ते सॉफ्ट ड्रिंक्स आपकी सेहत को कितने महंगे पड़ सकते हैं? इन ड्रिंक्स के कारण मोटापे और डायबिटीज महामारी की तरह देश में फैल रहे हैं। इसलिए यह समझना जरूरी है कि ये सॉफ्ट ड्रिंक्स आपकी सेहत को कैसे अंदर से खोखला बनाकर मोटापा और डायबिटीज का खतरा बढ़ाते हैं। 

    चीनी का भंडार और मोटापा

    एक सामान्य 300ml की सॉफ्ट ड्रिंक की बोतल में लगभग 35 से 40 ग्राम चीनी होती है, जो करीब 8-10 चम्मच के बराबर है। जब हम इतनी ज्यादा मात्रा में 'लिक्विड कैलोरी' लेते हैं, तो हमारा शरीर इसे एनर्जी बनाने के लिए इस्तेमाल नहीं कर पाता और यह फैट के रूप में जमा होने लगता है।

    सस्ते ड्रिंक्स में अक्सर हाई फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप का इस्तेमाल किया जाता है। यह सीधा हमारे लिवर पर असर करता है और पेट के आसपास की चर्बी को बढ़ाता है, जो मोटापे की पहली सीढ़ी है।

    Soft drinks

    (Picture Courtesy: Freepik)

    टाइप-2 डायबिटीज का बढ़ता जोखिम

    सॉफ्ट ड्रिंक पीते ही खून में शुगर का स्तर अचानक से बढ़ जाता है। इसे नियंत्रित करने के लिए शरीर को बड़ी मात्रा में इंसुलिन रिलजी करना पड़ता है। बार-बार ऐसा होने से शरीर की  सेल्स इंसुलिन सेंसिटिविटी खोने लगते हैं, जिसे 'इंसुलिन रेजिस्टेंस' कहा जाता है। यही स्थिति आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज का कारण बनती है। 

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    एम्प्टी कैलोरी से भरपूर

    इन ड्रिंक्स को 'एम्प्टी कैलोरी' कहा जाता है क्योंकि इनमें विटामिन, मिनरल या फाइबर बिल्कुल नहीं होता। इन्हें पीने के कुछ देर बाद ही फिर से भूख लगने लगती है, जिससे व्यक्ति ओवरईटिंग का शिकार हो जाता है। सस्ते होने के कारण बच्चे और युवा इन्हें खूब पीते हैं, जिससे कम उम्र में ही मेटाबॉलिज्म बिगड़ने लगता है।

    हड्डियों और दांतों को नुकसान

    इन ड्रिंक्स में फॉस्फोरिक एसिड होता है, जो शरीर से कैल्शियम को सोख लेता है। इससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। साथ ही, सोडा में मौजूद एसिड दांतों की बाहरी परत को सड़ा देता है।



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