बिना दवा-सर्जरी के ताउम्र मजबूत रहेंगे हड्डियां और जोड़, ऑर्थोपेडिक एक्सपर्ट ने बताया सीक्रेट फॉर्मूला
बढ़ती उम्र में कमजोर होती हड्डियां हमें अपना खानपान और रहन-सहन बदलने के लिए मजबूर कर रही है, आइय जानें कैसे इन्हें मजबूत रखा जा सकता है। ...और पढ़ें

मजबूत हड्डियों के लिए डाइट और एक्सरसाइज रामबाण है (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हमारा शरीर रोजाना चलने, दौड़ने, सीढ़ियां चढ़ने या रोजमर्रा के बहुत से कामों से जुड़ी गतिविधियां करता है, पर ये सभी काम कितनी कुशलता से हो रहे हैं, यह पूरी तरह से हड्डियों और जोड़ों की हेल्थ पर निर्भर करता है।
अफसोस ज्यादातर लोग तब तक हड्डियों और जोड़ों के हेल्थ को नजरअंदाज करते रहते हैं, जब तक दर्द या कोई सीरियस परेशानी न बन जाए। ऐसे में हमें यह समझना जरूरी है कि बोन और ज्वाइंट्स की सही समय पर की गई देखभाल भविष्य में होने वाली कई समस्याओं से बचा सकती है।
मजबूत हड्डियों के लिए डाइट और एक्सरसाइज
हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए हमें खानपान का खास ख्याल रखने की जरूरत है। इसके लिए डाइट बैलेंस होनी चाहिए, जिसमें पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम, विटामिन-डी और प्रोटीन जैसे पोषक तत्व शामिल हो। इनमें दूध और दूध से बने प्रॉडक्ट्स, हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, मेवे और धूप से मिलने वाला विटामिन-डी हड्डियों को मजबूत रखने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। वहीं, बच्चों की डाइट का छोटी उम्र से ही खास ध्यान रखें और उन्हें ज्यादा से ज्यादा पौष्टिक खाना ही दें।
डाइट के अलावा, शारीरिक गतिविधि भी बहुत मायने रखती है। हर रोज तेज चाल से चलना, सीढ़ियां चढ़ना, योग और हल्के वजन के साथ एक्सरसाइज करने जैसी आदतें भी हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करती हैं। चिंता की बात यह है कि आजकल के बच्चे मोबाइल और स्क्रीन के सामने ज्यादा समय बिताते हैं। इससे बचने के लिए उन्हें बचपन से ही पर्याप्त धूप लेने और बाहर खेलने की आदत डालें।
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जोड़ों को हेल्दी रखने के लिए क्या करें?
हड्डियों के साथ ही जोड़ों हेल्दी रखने के लिए रेगुलर एक्सरसाइज अनिवार्य शर्त है। इस बात का ध्यान रखें कि लंबे समय तक एक जगह बैठे नहीं रहना है, यह आदत ज्वाइंट्स के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हो सकती है। साथ ही, शरीर का वजन कंट्रोल में रखें क्योंकि अगर वजन ज्यादा होगा तो इससे घुटनों, कूल्हों और रीढ़ की हड्डी पर ज्यादा प्रेशर पड़ता है जो गठिया और जोड़ों के घिसाव के जोखिम को बढ़ाता है।
जोड़ों से जुड़ी परेशानी अनदेखा न करें
कई बार लोग जोड़ों में दर्द या सूजन को सामान्य समझकर अनदेखा कर देते हैं, जबकि यह परेशानी आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती है। ऐसे में अगर आप जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन, सुबह उठने पर जकड़न, चलने-फिरने में दिक्कत का सामना कर रहे हैं या आपको ऐसा लग रहा है कि जोड़ की गति कम हो रही हो, तो अब समय है कि डॉक्टर से सलाह ली जाए।
कई बार इन स्थितियों में इलाज बिना किसी सर्जरी के भी किया जा सकता है। मेरी सलाह है कि महिलाओं में रजोनिवृत्ति यानी मेनोपॉज के बाद और 50 साल से ज्यादा उम्र पुरुषों और महिलाओं को ऑस्टियोपोरोसिस की जांच जरूर करानी चाहिए।
हड्डी टूटने का खतरा कम करने के लिए ध्यान रखें ये बातें
ज्यादातर बुजुर्गों में गिरकर हड्डी टूटने का खतरा रहता है। इस खतरे को कुछ बातों का ध्यान रख टाला जा सकता है:
घर में पर्याप्त रोशनी रखें
फिसलन से बचें
बाथरूम में सहारा देने वाली ग्रैब बार लगाएं
आरामदायक और अच्छी पकड़ के जूते पहनें
नियमित व्यायाम से शरीर का बैलेंस संतुलन बनाए रखें
हड्डियों के बेहतर इलाज की तकनीक
आज मॉडर्न ऑर्थोपेडिक ट्रीटमेंट्स में फिजियोथेरेपी, आर्थ्रोस्कोपी, फ्रैक्चर की एडवांस सर्जरी और ज्वाइंट रिप्लेसमेंट जैसी तकनीक इस्तेमाल की जाने लगी है। इसकी मदद से लाखों लोगों को फिर से दर्द से फ्री एक एक्टिव लाइफ जीने का मौका दिया है, पर यह समझ लें कि रोकथाम ही सबसे बेहतर इलाज है। यही आत्मनिर्भर और खुशहाल जीवन की नींव भी है।
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(डॉ. अभिनव मिश्रा भगवान महावीर मणिपाल अस्पताल, रांची में सल्टेंट ऑर्थोपेडिक सर्जन हैं)