यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 12, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
6 घंटे से कम नींद न कर दे वैक्सीन के असर को कम! स्टडी में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
नींद का हमारी सेहत पर सीधा असर पड़ता है। इससे न सिर्फ हमारी सेहत सुधर सकती या बिगड़ सकती है बल्कि इसका वजह वैक्सीनेशन के असर पर भी पड़ता है। स्टडी में ...और पढ़ें

HighLights
- नींद का हमारी सेहत पर गहरा असर पड़ता है।
- कम नींद की वजह से हमारी सेहत बिगड़ सकती है।
- साथ ही इसकी वजह से वैक्सीन का असर भी कम होता है।
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। नींद की कमी आपकी सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है, लेकिन क्या आपको पता है छह घंटे से कम की नींद वैक्सीन के प्रभाव को भी कम कर सकती है? इससे जुड़ी सात ऐसी स्टडीज हैं, जो बताती हैं कि इन्फ्लूएंजा और हेपेटाइटिस जैसी वायरल बीमारियों से लड़ने के लिए दी जाने वाली वैक्सीन लगवाने के दौरान कम नींद लेना एंटीबॉडी की प्रतिक्रिया को कम कर देती है।
इससे वैक्सीन का प्रभाव बेहतर होता है
करंट बायोलॉजी में प्रकाशित शिकागो यूनिवर्सिटी और फ्रेंच नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मेडिकल रिसर्च की रिपोर्ट में पाया गया कि जो लोग वैक्सीन लगवाने वाले दिनों में छह घंटे से कम नींद लेते हैं, उनमें एंटीबॉडी की प्रतिक्रिया घट जाती है। इससे यह पता चलता है कि इम्युनाइजेशन के दौरान वैक्सीन के प्रभाव को बढ़ाने के लिए अच्छी नींद लेना कितना जरूरी है।
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जिनका वर्क शेड्यूल तय नहीं रहता
नींद और वैक्सीन का प्रभाव उन लोगों में ज्यादा चिंता का कारण है, जिनके काम का शेड्यूल तय नहीं है। खासकर शिफ्ट में काम करने वाले लोगों में नींद के घंटे कम होते हैं। ऐसे लोगों को वैक्सीन लगाने के एक हफ्ते पहले और उसके बाद पर्याप्त नींद जरूर लेने के बारे में पहले से योजना बना लेनी चाहिए।
ये कारण भी हैं
वैसे उम्र, जेंडर और सामान्य सेहत जैसे कारण भी वैक्सीन के असर को कम कर सकते हैं।
इसलिए वैक्सीनेशन के बाद बेबी को चाहिए पूरा आराम…
आपने देखा होगा कि वैक्सीन लगने के बाद छोटे बच्चे ज्यादा घंटों के लिए सोते हैं। अगर आपका बच्चा भी सामान्य से ज्यादा सो रहा है, तो इसका मतलब है कि उसकी बॉडी वायरस से अच्छी तरह लड़ रही है।
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इसलिए उसके ज्यादा सोने पर परेशान होने की जरूरत नहीं। वहीं दूसरी ओर कई बच्चे इंजेक्शन के दर्द, सूजन की वजह से ज्यादा देर-देर तक जागने लगते हैं। इस दौरान उनके स्लीप शेड्यूल की चिंता ना करें, बस उन्हें ज्यादा से ज्यादा आराम पहुंचाने की कोशिश करें।