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    आप भी बार-बार डाइट शुरू करके छोड़ देते हैं? जानिए क्यों यह आदत आपके मेटाबॉलिज्म को कर रही है बर्बाद

    Updated: Tue, 23 Jun 2026 07:00 PM (GMT+05:30)

    क्या आपके साथ भी ऐसा हुआ है कि डाइटिंग शुरू करते ही वजन तेजी से घटा, लेकिन कुछ समय बाद अचानक रुक गया और फिर वापस से बढ़ने लगा? ...और पढ़ें

    लाख कोशिशों के बाद भी कम नहीं हो रहा वजन? (Image Source: AI-Generated)

    लाख कोशिशों के बाद भी कम नहीं हो रहा वजन? (Image Source: AI-Generated) 

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर हम पूरे जोश और कड़े अनुशासन के साथ वजन कम करने का सफर शुरू करते हैं। हम खाना कम कर देते हैं, फिजिकल एक्टिविटी बढ़ा देते हैं और शुरुआत में तेजी से वजन कम भी होता है।

    हालांकि, कुछ समय बाद यह प्रक्रिया अचानक धीमी पड़ जाती है और तमाम कोशिशों के बावजूद कई लोगों का वजन फिर से बढ़ने लगता है। क्लिनिकल प्रैक्टिस में डॉक्टर्स को यह पैटर्न बहुत आम तौर पर देखने को मिलता है।

    भारत में मोटापा एक तेजी से बढ़ती हुई समस्या है। NFHS-5 (2019–21) के आंकड़ों के अनुसार, लगभग हर 4 में से 1 वयस्क मोटापे का शिकार है। वहीं, 'आईसीएमआर' और 'द लैंसेट' की रिपोर्ट बताती है कि 3 में से 1 वयस्क को एब्डॉमिनल ओबेसिटी है और 4 में से 1 को सामान्य मोटापा है। यही वजह है कि बार-बार डाइट शुरू करने और छोड़ने का चलन बढ़ रहा है।

    आइए, डॉ. आशीष गौतम (प्रिंसिपल डायरेक्टर, रोबोटिक एवं लेप्रोस्कोपिक सर्जरी, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज, नई दिल्ली) से समझते हैं कि डाइटिंग बीच में ही दम क्यों तोड़ देती है और हमारा शरीर इसे लेकर कैसे रिएक्ट करता है। 

    Dark Side of Inconsistent Dieting

    (Image Source: AI-Generated) 

    शुरुआत में तेजी से क्यों घटता है वजन?

    डाइटिंग के शुरुआती दिनों में वजन कम होने का मुख्य कारण कैलोरी में कमी और शरीर में जमा 'ग्लाइकोजन' का इस्तेमाल होना है। ग्लाइकोजन अपने साथ पानी को भी होल्ड करके रखता है, इसलिए शुरुआत में तराजू पर जो वजन कम दिखता है, उसमें फैट के साथ-साथ शरीर के तरल पदार्थ की कमी भी शामिल होती है।

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    हालांकि, जैसे-जैसे आप कम कैलोरी लेते हैं, आपका शरीर इस नए बदलाव के अनुकूल होने लगता है। शरीर अपनी एनर्जी बचाने के लिए 'बेसल मेटाबॉलिक रेट' और एनर्जी की खपत को धीमा कर देता है। शरीर के इस प्राकृतिक बचाव के कारण, डाइटिंग जारी रखने पर भी वजन कम होने की रफ्तार धीमी हो जाती है।

    हार्मोन्स और मेटाबॉलिज्म का खेल

    लंबे समय तक डाइटिंग करने से शरीर में भूख को कंट्रोल करने का सिस्टम ही बदल जाता है। जो सिग्नल्स भूख बढ़ाते हैं, वे ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं, और जो सिग्नल्स पेट भरा होने का अहसास कराते हैं, वे सुस्त पड़ जाते हैं। इससे समय के साथ अपनी भूख को कंट्रोल करना बहुत मुश्किल हो जाता है। ऐसे में हाई-कैलोरी और तुरंत एनर्जी देने वाले खानपान की क्रेविंग्स बहुत तेज हो जाती है।

    अगर आपकी डाइट में पर्याप्त प्रोटीन नहीं है और आप कोई 'रेजिस्टेंस एक्सरसाइज' नहीं कर रहे हैं, तो शरीर ऊर्जा के लिए अपनी ही मांसपेशियों को तोड़ने लगता है। लंबे समय में, मांसपेशियों के कम होने से मेटाबॉलिज्म और धीमा हो जाता है, जिससे कम हुए वजन को बनाए रखना और भी मुश्किल हो जाता है।

    हमारी शहरी जीवनशैली भी इस समस्या में आग में घी का काम करती है। WHO के अनुसार, लगभग 50 प्रतिशत भारतीय पर्याप्त शारीरिक मेहनत नहीं करते। जब आप सख्त डाइटिंग बंद करते हैं, तो दिनभर में कम ऊर्जा खर्च होने के कारण वजन दोबारा तेजी से बढ़ता है।

    diet

    (Image Source: Magnific) 

    डाइट की क्वालिटी और माहौल का असर

    आप लंबे समय में कितने सफल होंगे, यह आपकी डाइट की क्वालिटी पर निर्भर करता है। बहुत ज्यादा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, और अधिक फैट, नमक व चीनी वाले उत्पाद खाने से शरीर में फैट तेजी से जमा होता है और भूख भी बढ़ती है।

    आप अपना भोजन कैसे जुटाते हैं, यह भी बहुत मायने रखता है। 'द स्टेट ऑफ फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रिशन' की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की लगभग 55 प्रतिशत आबादी एक स्वस्थ डाइट का खर्च नहीं उठा सकती और लगभग 40 प्रतिशत लोगों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता। ऐसे में, लगातार एक अच्छी डाइट फॉलो करना बहुत मुश्किल हो जाता है।

    मनोवैज्ञानिक और व्यावहारिक चुनौतियां

    किसी डाइट पर टिके रहना दिमागी रूप से एक थका देने वाला काम है। जब आप बाहर जाते हैं, सफर करते हैं या अपने बिजी शेड्यूल के बीच होते हैं, तो तय डाइट प्लान का पालन करना कठिन हो जाता है। धीरे-धीरे मोटिवेशन कम होने लगता है और लोग फिर से पहले की तरह खाना शुरू कर देते हैं।

    इसके अलावा, बचपन की आदतें भी बड़ों के खानपान को गहराई से प्रभावित करती हैं। बचपन का असंतुलित खानपान और सुस्त जीवनशैली इसका बड़ा कारण है। आज भारत में 1.44 करोड़ से अधिक बच्चे मोटापे का शिकार हैं।

    वजन घटने का शरीर क्यों करता है विरोध?

    जब आप वजन कम करते हैं, तो शरीर अपनी सुरक्षा के लिए कुछ 'बायोलॉजिकल' प्रतिक्रियाएं शुरू करता है। शरीर फिर से आपके पुराने वजन तक पहुंचने के लिए ऊर्जा की खपत घटा देता है और भूख बढ़ा देता है। आप जितनी बार डाइटिंग शुरू करके छोड़ते हैं, शरीर की यह प्रतिक्रिया उतनी ही आक्रामक हो जाती है। वजन कम होने के बाद भी, मेटाबॉलिज्म रेट अक्सर पहले से नीचे ही रहता है। इस स्थिति में शरीर के लिए वजन घटाने की तुलना में उसे दोबारा बढ़ाना बहुत आसान हो जाता है।

    जब बार-बार कोशिशें नाकाम हों

    अगर बार-बार लाइफस्टाइल में बदलाव करने के बाद भी लंबे समय तक वजन कंट्रोल नहीं हो रहा है, तो मेडिकल जांच करवानी चाहिए।

    अगर आपका 'बॉडी मास इंडेक्स' 29 से ज्यादा है और साथ में टाइप 2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, स्लीप एप्निया, डिस्लिपिडेमिया या जोड़ों की बीमारी जैसी समस्याएं हैं, तो यह डॉक्टर से सलाह लेने का समय है। अगर BMI 35 से ज्यादा है, तो बिना किसी अन्य बीमारी के भी डॉक्टर पूरी क्लीनिकल रिस्क देखकर सर्जरी की सलाह दे सकते हैं। ये पैमाने सिर्फ वजन नहीं, बल्कि आपके शरीर पर पड़ने वाले मेटाबॉलिक बोझ को दर्शाते हैं।

    मेडिकल और सर्जिकल विकल्प

    कुछ खास मामलों में, पूरी जांच के बाद डॉक्टर 'बेरिएट्रिक सर्जरी' पर विचार कर सकते हैं। यह प्रक्रिया आंत के हार्मोन्स, भूख को कंट्रोल करने की क्षमता और ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म को बदल देती है। इससे न सिर्फ वजन कम होता है, बल्कि मेटाबॉलिक पैरामीटर्स में भी सुधार होता है।

    लंबे समय तक वजन कंट्रोल करने के लिए एक लगातार डाइट पैटर्न, पर्याप्त प्रोटीन, फिजिकल एक्टिविटी और लगातार डॉक्टर से फॉलो-अप लेना जरूरी है। चाहे आप वजन कम करने का कोई भी तरीका अपनाएं, उसके बरकरार रखने के लिए आपको अपनी आदतों में स्थिरता लानी ही पड़ेगी।

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