रात के 2-3 बजे खुल जाती है नींद? सावधान! यह सिर्फ बेचैनी नहीं, मेंटेनेंस इन्सोम्निया की दस्तक है
नींद ना आने की परेशानी कभी ना कभी हर किसी के साथ होती है, लेकिन हर रोज नींद का टूटना या दोबारा नींद आना मेंटेनेंस इन्सोम्निया का संकेत हो सकता है। साल ...और पढ़ें

मेंटेनेंस इन्सोम्निया: कारण, लक्षण और प्रभावी उपचार (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। इन्सोम्निया को लोग सिर्फ नींद ना आने की समस्या मानते हैं, लेकिन इसके भी कई प्रकार हैं। कुछ लोगों को नींद आने में परेशानी आती है तो कुछ लोगों की नींद सुबह जल्दी खुल जाती है और कुछ लोगों की नींद आधी रात में खुल जाती है। नींद को मेंटेन न कर पाने की यह परेशानी मेंटेनेंस इन्सोम्निया कहलाती है। आइए जानते हैं यह क्या है और किन वजहों से ऐसा होता है।
स्ट्रेस और एंग्जायटी
मेंटेनेंस इन्सोम्निया का सबसे आम कारण है स्ट्रेस और एंजाइटी। आधी रात अचानक नींद खुलने पर मरीज को अपने रोजमर्रा के काम, ऑफिस का स्ट्रेस या फिर नींद ना आने का तनाव सताने लगाता है। रात में आने वाले डरावने सपने, पीटीएसडी या मानसिक समस्याएं भी नींद ना आने की वजह बन सकते हैं।
शरीर में दर्द होना
इन्सोम्निया का सीधा संबंध दर्द से है। इस वजह से रात की नींद डिस्टर्ब हो सकती है। क्रॉनिक परेशानियों के साथ-साथ पीठ दर्द जैसी अस्थायी समस्याएं भी नींद ना आने के लिए जिम्मेदार हो सकती हैं।

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उम्र और जेंडर
उम्र बढ़ने पर न्यूरोपैथी, यूरीनरी प्रॉब्लम्स और एसिड रिफ्लेक्स जैसी परेशानियां बढ़ती हैं और ये नींद ना आने का कारण बन सकती हैं। साल 2015 में यूएसए में हुई एक स्टडी में सामने आया कि मेनोपॉज की उम्र करीब आने पर महिलाओं में हॉर्मोनल बदलावों की वजह से मेंटनेंस इन्सोम्निया होने का खतरा ज्यादा होता है।
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सोने का सही माहौल न होना
कई बार आस-पास का वातावरण नींद में खलल डालते हैं, जैसे ज्यादा शोर, रोशनी, ठंड या गर्मी, बिस्तर का आरामदायक ना होना या पार्टनर का तेज खर्राटे लेना।
इलाज के ये हैं ऑप्शन
- कॉग्नेटिव बिहेवियरल थैरेपी फॉर इन्सोम्निया (CBT-I): इसमें सोचने के तरीकों, आदतों और व्यवहार का आकलन किया जाता है।आमतौर पर इसमें छह से आठ सेशन होते हैं।
- दवाइयां: डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार एक सीमित समय के लिए दवाइयां लेने का सुझाव दे सकते हैं।
- सोने का सही रूटीन: सोने से पहले की आपकी दिनचर्या सुकूनभरी होनी चाहिए। डिजिटल डिवाइसेस को 30-60 मिनट पहले ही बंद कर दें। डीप ब्रीदिंग, मसल्स को रिलेक्स करने की टेक्नीक भी आजमा सकते हैं।
ऐसा करने से बचें
- देर शाम कैफीन युक्त बेवरेजेस जैसे कॉफी या एनर्जी ड्रिंक पीने से इन्सोम्निया की परेशानी और बढ़ती है।
- दिन के समय सोने से बचें। इससे सोने-जगने का आपका साइकिल बिगड़ सकता है।