अचानक कोई बेहोश हो जाए या आए हार्ट अटैक तो क्या करें? हर इंसान को आनी चाहिए जान बचाने वाली ये 'मेडिकल स्किल्स'
स्वास्थ्य परेशानी या मेडिकल इमरजेंसी होने पर कई बार अस्पताल तक पहुंचना आसान नहीं होता, ऐसे में कुछ बेसिक मेडिकल ...और पढ़ें

सभी को पता होनी चाहिए जरूरी फर्स्ट एड टिप्स (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। स्वास्थ्य संकट की स्थिति दो तरह की होती है, एक सामान्य, दूसरी इमरजेंसी वाली स्थिति। अगर किसी को सीने में दर्द हो रहा है या हार्ट अटैक जैसे लक्षण दिख रहे हैं तो जितना जल्दी हो सके मरीज को अस्पताल पहुंचाना चाहिए। ईसीजी आदि के जरिये समस्या का जल्द पता लगाकर इससे समुचित उपचार की व्यवस्था हो जाती है।
डोर-टू-बैलून टाइम का मतलब यही है कि हार्ट अटैक की स्थिति में आप जितना जल्दी अस्पताल जाएंगे, एंजियोग्राफी कर ब्लड वेसल को खोल दिया जाएगा। इससे हार्ट की मांसपेशियों के नुकसान को कम किया जा सकता है। हार्टअटैक नहीं भी है, तो दर्द होने के पीछे के वास्तविक कारणों का पता लगाना इससे आसान हो जाता है और इमरजेंसी वाली स्थिति को टाला जा सकता है।
हर कोई सीख है कुछ मेडिकल स्किल
डॉ. मोनिका महाजन (प्रिंसिपल डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन, मैक्स अस्पताल, नई दिल्ली) बताती हैं कि अगर कोई व्यक्ति घर से बाहर है और अचानक मूर्छित या बेहोश हो जाता है तो हमें एक बीएलएफ (बेसिक लाइफ सपोर्ट) स्तर की जानकारी होनी चाहिए, ताकि उसे तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके। चेस्ट प्रेश करने के तरीके या इमरजेंसी की स्थिति संभालने के लिए कुछ बेसिक ट्रेनिंग अस्पतालों में दी जाती है।
कोई व्यक्ति स्थिर नहीं हो पा रहा है तो जरूरत होने पर चेस्ट कंप्रेशन और माउथ-टू-माउथ ब्रीदिंग जैसे उपाय करने चाहिए। मरीज को हास्पिटल पहुंचाना, चोट लगने से बचाना और सड़क किनारे गिरे किसी व्यक्ति को स्थिर करना, ताकि गर्दन में चोट लगी हो तो दिक्कत न बढ़े, यह हर किसी सीखना चाहिए।
एंबुलेंस आने और हास्पिटल तक पहुंचाने के लिए क्या-क्या उपाय जरूरी है, इसका बेसिक प्रशिक्षण लिया जा सकता है। इंटरनेट मीडिया पर स्वास्थ्य पेशेवर इसके बारे में लोगों को जागरूक और प्रशिक्षित करते हैं, वहां से भी कुछ बेसिक बातें सीख सकते हैं। कुछ स्कूलों में भी बच्चों को फर्स्ट एड का प्रशिक्षण दिया जाता है।
इमरजेंसी में कुछ बातों पर गौर करें
अगर किसी व्यक्ति की आवाज में बदलाव, हाथ-पैरो में दिक्कत या देखने में परेशानी या स्ट्रोक जैसे लक्षण हो रहे हैं, तो ऐसी दशा में शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने तक फर्स्ट एड देना आवश्यक है। इसी तरह मिर्गी का दौरा पड़ने पर चोट न लगे या परेशानी ज्यादा न बढ़े, इसके लिए मरीज को सुरक्षित स्थान पर लिटाने और चोट से बचाने जैसे उपाय करने चाहिए। अगर उल्टी आ रही है, तो ध्यान रखें वह फेफड़ों में न चली जाए, इसके लिए सावधानी बरतें।
हर स्थिति के लिए खुद को करें तैयार
जलने, चोटिल होने, करेंट लगने, हीट स्ट्रोक या होटल में खाते समय चोक हो जाने जैसी समस्याओं में कुछ बेसिक बातों का ध्यान रखकर आप खुद भी निपट सकते हैं। अगर आप घर से बाहर हैं या कहीं दूरदराज इलाके में हैं तो ये तरीके अधिक उपयोगी हो जाते हैं। प्राकृतिक आपदा जैसे भूकंप या बाढ़ में वहां फर्स्ट एड कैसे करेंगे, इसके बारे में भी जानना जरूरी है। अगर कोई डूब रहा है या अचेत हो रहा है या फूड एलर्जी या किसी को सांस की तकलीफ हो रही है, तो ऐसी दशा में एक छोटी सी मदद जीवनरक्षक हो सकती है।
ऐसे बनाएं फर्स्ट एड किट
घर में बच्चों या परिवार के लिए फर्स्ट एड किट बना सकते हैं। चोट लगने, छिलने, कटने, जलने की स्थिति में बचाव के लिए यह उपयोगी हो सकता है। इसमें एंटीसेप्टिक लोशन, एंटीबायोटिक क्रीम, बैंडेज, पैरासिटामोल जैसी दवाइयां, एंटी एलर्जिक दवाएं रख सकते हैं। अगर घर में कोई कार्डियक मरीज है तो एस्पिरिन या सार्बिट्रेट की गोली रख सकते हैं। फर्स्ट एड किट इस बात पर निर्भर करता है कि आपके परिवार में किस आयु वर्ग के लोग हैं।
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