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    पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को क्यों होता है अल्जाइमर का ज्यादा खतरा? डॉक्टर ने दी जानकारी

    Updated: Sun, 21 Sep 2025 09:28 AM (IST)

    अल्जाइमर एक ऐसी बीमारी है जो धीरे-धीरे दिमाग को कमजोर करती है जिससे व्यक्ति की याददाश्त और सोचने-समझने की शक्ति कम हो जाती है। यह बीमारी पुरुषों और मह ...और पढ़ें

    महिलाओं में क्यों रहता है अल्जाइमर का ज्यादा खतरा? जानें वजह और बचाव के उपाय (Image Source: Freepik)
    महिलाओं में क्यों रहता है अल्जाइमर का ज्यादा खतरा? जानें वजह और बचाव के उपाय (Image Source: Freepik)

    HighLights

    1. महिलाओं में अल्जाइमर का खतरा ज्यादा पाया जाता है।
    2. एस्ट्रोजन हॉर्मोन का स्तर तेजी से गिरना एक बड़ा कारण माना जाता है।
    3. लाइफस्टाइल में बदलाव करके इस खतरे को कम किया जा सकता है।

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज यानी 21 सितंबर को World Alzheimer's Day मनाया जा रहा है। बता दें, अल्जाइमर डिजीज दिमाग से जुड़ी एक गंभीर समस्या है, जो धीरे-धीरे याददाश्त, सोचने की क्षमता और रोजमर्रा के काम करने की ताकत को प्रभावित करती है। यह बीमारी महिलाओं और पुरुषों दोनों में हो सकती है, लेकिन शोध बताते हैं कि महिलाओं में इसका खतरा कहीं अधिक होता है।

    आंकड़ों के अनुसार, अल्जाइमर से पीड़ित कुल मरीजों में लगभग दो-तिहाई महिलाएं होती हैं। आइए, डॉ. कुणाल बहरानी (क्लिनिकल डायरेक्टर- न्यूरोलॉजी, मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स फरीदाबाद) से जानते हैं इससे जुड़ी कुछ खास बातें।

    उम्र ही नहीं, और भी हैं वजहें

    अल्जाइमर का सबसे बड़ा कारण उम्र बढ़ना माना जाता है। महिलाएं आमतौर पर पुरुषों से अधिक समय तक जीवित रहती हैं, और लंबी उम्र के साथ इस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन यह अकेली वजह नहीं है।

    शोध से पता चला है कि महिलाओं में हार्मोनल बदलाव भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर अचानक कम हो जाता है। एस्ट्रोजन दिमाग की सेहत पर सकारात्मक असर डालता है, और जब यह कम हो जाता है तो दिमाग की कोशिकाएं याददाश्त को लेकर ज्यादा संवेदनशील और कमजोर हो सकती हैं।

    मेंटल हेल्थ और लाइफस्टाइल का असर

    महिलाओं में डिप्रेशन और एंग्जायटी की समस्या पुरुषों की तुलना में ज्यादा पाई जाती है। ये दोनों ही स्थितियां दिमाग पर नकारात्मक असर डालती हैं और समय के साथ कॉग्निटिव क्षमता को घटा सकती हैं।

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    इसके अलावा, सामाजिक और सांस्कृतिक कारण भी अहम हैं। पहले के समय में कई महिलाओं को उच्च शिक्षा या मानसिक रूप से उत्तेजक नौकरियां करने का मौका कम मिला। ऐसे में उनके दिमाग की "कॉग्निटिव रिजर्व" यानी दिमाग की खुद को सुधारने और नई चीजें सीखने की क्षमता कमजोर रही, जिससे अल्ज़ाइमर का खतरा और बढ़ सकता है।

    शोध यह भी बताता है कि APOE ε4 नामक जीन का असर महिलाओं में पुरुषों की तुलना में ज्यादा मजबूत हो सकता है, जिससे उन्हें यह बीमारी होने की संभावना और बढ़ जाती है।

    इलाज और नई उम्मीदें

    अल्ज़ाइमर का अभी तक कोई स्थायी इलाज मौजूद नहीं है, लेकिन दवाओं और थैरेपी से इसके लक्षणों को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। कई दवाएं याददाश्त और सोचने की क्षमता को संभालने में मदद करती हैं, साथ ही व्यवहार और मनोवैज्ञानिक लक्षणों को भी कम कर सकती हैं।

    हाल ही में नई तरह की थैरेपी (डिजीज मॉडिफाइंग थैरेपी) पर शोध चल रहा है। इनमें मोनोक्लोनल एंटीबॉडी जैसी दवाएं शामिल हैं, जो दिमाग में असामान्य प्रोटीन को बनने से रोक सकती हैं। शुरुआती स्तर पर इनसे बीमारी की प्रगति को धीमा करने की उम्मीद जग रही है।

    बचाव के लिए जरूरी कदम

    अल्जाइमर का खतरा पूरी तरह टाला नहीं जा सकता, लेकिन जागरूकता और जीवनशैली में बदलाव से जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    • महिलाओं को मेनोपॉज के दौरान हार्मोनल बदलाव और दिमाग की सेहत पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
    • नियमित व्यायाम, पौष्टिक आहार और पर्याप्त नींद दिमाग को मजबूत रखते हैं।
    • नई चीजें सीखना, पढ़ना और मानसिक रूप से सक्रिय रहना 'कॉग्निटिव रिजर्व' को बढ़ाता है।
    • तनाव और अवसाद से बचना भी उतना ही जरूरी है।

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