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    पहली स्क्रीनिंग में सब कुछ 'नॉर्मल', फिर दूसरी में कैंसर कैसे आ सकता है? डॉक्टर ने बताई वजह

    Updated: Wed, 17 Jun 2026 10:40 AM (IST)

    अक्सर पहली मेडिकल जांच में कैंसर न निकलने पर भी दूसरी में इसका पता चल सकता है, जिसे 'इंटरवल कैंसर' कहते हैं। ...और पढ़ें

    कैंसर स्क्रीनिंग रिपोर्ट 'नॉर्मल' आने के बाद भी क्यों जरूरी है दूसरी जांच? (Image Source: AI-Generated)

    कैंसर स्क्रीनिंग रिपोर्ट 'नॉर्मल' आने के बाद भी क्यों जरूरी है दूसरी जांच? (Image Source: AI-Generated)

    HighLights

    1. शुरुआती ट्यूमर छोटा होने से पहली जांच में छिप सकता है

    2. कोई भी स्क्रीनिंग टेस्ट 100% सटीक नहीं होता है

    3. नियमित जांच से कैंसर का शुरुआती पता लगाना संभव है

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि अगर किसी व्यक्ति की पहली मेडिकल जांच या स्क्रीनिंग में कैंसर नहीं निकला, तो फिर दूसरी जांच में वो कैसे सामने आ सकता है? यह बात थोड़ी हैरान करने वाली जरूर लगती है, लेकिन ऐसा होना पूरी तरह संभव है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि ऐसा क्यों होता है।

    Cancer screening

    (Image Source: AI-Generated)

    शुरुआत में छिप सकता है ट्यूमर

    कई बार कैंसर शुरुआती दौर में इतना छोटा होता है कि वह आसानी से दिखाई नहीं देता। ट्यूमर का आकार छोटा होने के कारण वह मैमोग्राफी, सीटी स्कैन, एक्स-रे या अन्य स्क्रीनिंग टेस्ट की पकड़ से बच निकलता है, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है और ये कैंसर कोशिकाएं बढ़ती हैं, तो अगली जांच में इनकी पहचान हो जाती है।

    इसे मेडिकल भाषा में "इंटरवल कैंसर" कहा जाता है। इसका सीधा मतलब है कि यह वह कैंसर है जो पहली 'नॉर्मल' रिपोर्ट के बाद विकसित हुआ है या फिर पहले से शरीर में मौजूद होने के बावजूद मशीनों की पकड़ में नहीं आ पाया था।

    शरीर की बनावट और मशीनों की सीमाएं

    यह समझना बेहद जरूरी है कि कोई भी स्क्रीनिंग टेस्ट 100% सटीक नहीं होता है, यानी हर जांच की अपनी एक सीमा होती है। इसके अलावा, शरीर के कुछ हिस्सों में इमेजिंग तकनीक उतनी संवेदनशील नहीं होती।

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    एक उदाहरण से समझें: जिन महिलाओं के ब्रेस्ट टिश्यू काफी घने होते हैं, उनमें शुरुआती ब्रेस्ट कैंसर मैमोग्राम जैसी जांच में छिप सकता है। ऐसे मामलों में यह बीमारी बाद की जांच में ही सामने आ पाती है।

    इसी तरह, बहुत धीमी गति से बढ़ने वाले कैंसर को भी पहली बार में पकड़ना काफी मुश्किल हो सकता है।

    क्यों जरूरी है दूसरी या रेगुलर स्क्रीनिंग?

    डॉक्टर हमेशा नियमित अंतराल पर जांच कराने की सलाह देते हैं, और इसके पीछे एक बहुत बड़ा कारण है। जब आप दूसरी बार या नियमित तौर पर स्क्रीनिंग कराते हैं, तो डॉक्टर आपकी पुरानी और नई रिपोर्ट की आपस में तुलना कर पाते हैं।

    अगर आपकी कोशिकाओं, टिश्यूज या शरीर की किसी गांठ में मामूली सा भी बदलाव दिखाई देता है, तो डॉक्टर सतर्क हो जाते हैं और तुरंत आगे की जांच की सलाह देते हैं, जैसे:

    डॉक्टर की सलाह

    पीएसआरआई अस्पताल, दिल्ली के कंसल्टेंट हेमेटोलॉजिस्ट और ऑन्कोलॉजिस्ट, डॉ. अमित उपाध्याय का कहना है कि पहली जांच की रिपोर्ट सामान्य आने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि भविष्य में कैंसर नहीं हो सकता।

    कैंसर को शुरुआती स्टेज में पकड़ने और इलाज के सफल होने की संभावना को बढ़ाने के लिए दो बातें सबसे ज्यादा जरूरी हैं:

    • नियमित समय पर अपनी स्क्रीनिंग कराते रहें।
    • शरीर में होने वाले या दिखने वाले किसी भी नए लक्षण को बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें।

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