क्या सपने सिर्फ दिनभर की बातों का रीप्ले होते हैं? जानें हमारा ही दिमाग रात में क्यों खेलता है ये खेल
हमारे सपने हमारे व्यक्तिगत गुणों और बाहरी अनुभवों का मिला-जुला मिश्रण होते हैं। ...और पढ़ें

क्या असल जिंदगी को बदलकर दिखाते हैं हमारे सपने? (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
प्रेट्र, नई दिल्ली। हमारे सपने काफी हद तक हमारी असल जिंदगी, विचारों और चिंताओं से जुड़े होते हैं। जिन विषयों पर हम दिन में सोचते हैं, वे अक्सर रात में सपनों में सामने आते हैं।
एक नए अध्ययन के अनुसार, सपनों की सामग्री रैंडम या अव्यवस्थित नहीं होती बल्कि यह व्यक्तिगत गुणों, जैसे कि मन की भटकने की प्रवृत्ति, सपनों में रुचि और नींद की गुणवत्ता, और बाहरी घटनाओं, जैसे कि कोविड-19 महामारी जैसे बड़े पैमाने पर सामाजिक अनुभवों के बीच एक कॉम्प्लेक्स इंटरैक्शन को दिखा सकती है।
3700 सपनों पर हुई इटली की रिसर्च
इटली के आइएमटी स्कूल फार एडवांस्ड स्टडीज लुका के शोधकर्ताओं ने 287 प्रतिभागियों से एकत्रित 3,700 से अधिक सपनों और जागृत अनुभवों की रिपोर्ट का विश्लेषण किया, जिनकी आयु 18 से 70 वर्ष के बीच थी। दो सप्ताह के दौरान प्रतिभागियों ने दैनिक अनुभवों को दर्ज किया, जबकि शोधकर्ताओं ने नींद के पैटर्न, संज्ञानात्मक क्षमताओं, व्यक्तिगत गुणों और मनोवैज्ञानिक विशेषताओं के बारे में जानकारी एकत्र की। शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों द्वारा दैनिक जीवन और सपनों का वर्णन करने के लिए उपयोग किए गए शब्दों का विश्लेषण किया।
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(Picture Courtesy: Freepik)
वास्तविकता को आकार देते हैं सपने
उन्होंने कहा कि सपने केवल हमारे वेकिंग एक्सपीरिएंस को रिप्रोड्यूस नहीं करते, बल्कि उन्हें फिर से रिइंटरप्रेट भी करते हैं। दैनिक दिनचर्या के तत्व, जैसे काम का वातावरण, स्वास्थ्य देखभाल सेटिंग्स या शिक्षा, जैसे हैं, वैसे फिर से प्रकट नहीं होते बल्कि इन्हें जीवंत, समग्र परिदृश्यों में पुनर्गठित किया जाता है, जो अक्सर अलग-अलग संदर्भों को मिलाते हैं और अपरिचित परिदृश्यों में दृष्टिकोण को बदलते हैं। परिणाम बताते हैं कि सपने केवल वास्तविकता को नहीं दर्शाते, बल्कि इसे सक्रिय रूप से फिर से आकार देते हैं। यह अतीत के अनुभवों के टुकड़ों को कल्पित या प्रत्याशित अनुभवों के साथ एकीकृत करते हैं।
गतिशील प्रक्रिया हैं सपने
लेखकों ने लिखा कि जागृत रिपोर्टों की तुलना में सपने आत्म संदर्भित, विचार केंद्रित कथाओं से दृश्य स्थानिक विवरणों, कई पात्रों और अजीब घटनाओं से भरे संवेदनात्मक अनुभवों में बदल गए। उन्होंने कहा कि स्थिर गुण, जिसमें सपनों के प्रति दृष्टिकोण, मन की भटकने की प्रवृत्ति और व्यक्तिपरक नींद की गुणवत्ता शामिल हैं, ने सपनों की सामग्री को चयनात्मक रूप से प्रभावित किया।
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आइएमटी स्कूल फार एडवांस्ड स्टडीज लुका में शोधकर्ता और मुख्य लेखक वेलेंटिना एल्से ने कहा, हमारे निष्कर्ष दिखाते हैं कि सपने केवल अतीत के अनुभवों का प्रतिबिंब नहीं हैं, बल्कि यह एक गतिशील प्रक्रिया है जो इस पर निर्भर करती है कि हम कौन हैं और हम क्या जीते हैं।
कोविड लाकडाउन के दौरान अध्ययन
एल्से ने कहा, बड़े पैमाने पर डाटा को गणनात्मक विधियों के साथ मिलाकर हम सपनों की सामग्री में ऐसे पैटर्न खोजने में सक्षम हुए जो पहले पहचानना कठिन था। सपनों में परिवर्तन व्यक्तियों के बीच भी भिन्न पाए गए। उदाहरण के लिए, जो लोग मन की भटकने के प्रति अधिक प्रवृत्त होते हैं, वे अधिक खंडित और तेजी से बदलते सपनों की रिपोर्ट करते हैं।