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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 01, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    क्यों हर साल मनाते हैं World Autism Awareness Day? पढ़ें इसका इतिहास, महत्व और 2025 की थीम

    Updated: Tue, 01 Apr 2025 08:27 PM (IST)

    हर साल 2 अप्रैल का दिन विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस (World Autism Awareness Day) के तौर पर मनाया जाता है। इसका मकसद ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) से ...और पढ़ें

    विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस 2025: इतिहास, महत्व और इस साल की थीम (Image Source: Freepik)
    विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस 2025: इतिहास, महत्व और इस साल की थीम (Image Source: Freepik)

    HighLights

    1. हर साल 2 अप्रैल को वर्ल्ड ऑटिज्म अवेयरनेस डे मनाया जाता है।
    2. ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर के लक्षण बचपन में ही दिखने लगते हैं।
    3. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने World Autism Awareness Day मनाने का संकल्प पास किया था।

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हर साल 2 अप्रैल को पूरी दुनिया में वर्ल्ड ऑटिज्म अवेयरनेस डे (World Autism Awareness Day) मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (Autism Spectrum Disorder - ASD) के प्रति जागरूकता फैलाना और ऑटिज्म से प्रभावित लोगों के अधिकारों को बढ़ावा देना है।

    ऑटिज्म से जूझ रहे लोग अक्सर समाज से कटा हुआ महसूस कर सकते हैं, क्योंकि उनकी सोचने, समझने और बातचीत करने का तरीका दूसरों से अलग होता है। यह दिन हमें उनकी जरूरतों को समझने और उनके लिए एक समावेशी वातावरण बनाने की प्रेरणा देता है। आइए विस्तार से जानते हैं इस दिन का इतिहास, महत्व और साल 2025 की थीम।

    क्या है ऑटिज्म? (What is Autism)

    ऑटिज्म एक न्यूरोडेवलपमेंटल (Neurodevelopmental) डिसऑर्डर है, जो मस्तिष्क के विकास को प्रभावित करता है। यह आमतौर पर बचपन में ही नजर आने लगता है और व्यक्ति के सामाजिक व्यवहार, कम्युनिकेशन स्किल्स और सीखने की क्षमता पर प्रभाव डालता है।

    यह एक स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (Spectrum Disorder) है, जिसका मतलब है कि इसके लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं। हर ऑटिस्टिक व्यक्ति अलग होता है- कुछ को हल्की कठिनाइयां हो सकती हैं, जबकि कुछ को ज्यादा मदद की जरूरत पड़ती है।

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    क्यों मनाते हैं विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस?

    ऑटिज्म एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जो व्यक्ति के सामाजिक कौशल, संवाद और व्यवहार को प्रभावित करता है। इस स्थिति से पीड़ित व्यक्ति को समाज में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

    • ऑटिज्म के प्रति जागरूकता फैलाना ताकि लोग इसे बेहतर समझ सकें।
    • समाज को ज्यादा समावेशी बनाना और ऑटिज्म से प्रभावित व्यक्तियों को समान अवसर देना।
    • सपोर्ट और इलाज की जरूरत को उजागर करना ताकि सही समय पर निदान और मदद मिल सके।
    • ऑटिज्म से जुड़े मिथकों को दूर करना और इसे एक मानसिक बीमारी की बजाय एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति के रूप में पहचानना।

    भारत में ऑटिज्म की स्थिति

    भारत में ऑटिज्म से जुड़े मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। Indian Journal of Pediatrics में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में हर 68 में से एक बच्चा ऑटिज्म से प्रभावित होता है। इनमें लड़कों की संख्या लड़कियों की तुलना में तीन गुना अधिक होती है। हालांकि, सही समय पर निदान और आवश्यक सहायता से ऑटिज्म से प्रभावित व्यक्तियों के जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है।

    विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस 2025 की थीम

    हर साल विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस की एक नई थीम होती है, जो ऑटिज्म से जुड़े किसी जरूरी विषय पर ध्यान केंद्रित करती है। 2025 की थीम है "न्यूरोडायवर्सिटी को आगे बढ़ाना और संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के साथ समन्वय"। इस थीम का उद्देश्य न्यूरोडायवर्सिटी की स्वीकृति और समर्थन को बढ़ावा देना है, साथ ही इसे संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के साथ जोड़कर समावेशी समाज के निर्माण में योगदान देना है।

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