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    मौसम बदलते ही क्यों बढ़ने लगते हैं रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन के मामले? डॉक्टर ने बताए कारण और बचाव के तरीके

    Updated: Tue, 17 Feb 2026 09:30 AM (IST)

    जैसे ही सर्दी कम होने लगती है और मौसम में उतार-चढ़ाव शुरू होता है, खांसी-जुकाम और सांस से जुड़े इन्फेक्शन (Respiratory Infections) के मामले अचानक बढ़ जात ...और पढ़ें

    क्यों 'विदाई' लेती सर्दी आपके फेफड़ों पर पड़ती है भारी? (Image Source: Freepik)

    क्यों 'विदाई' लेती सर्दी आपके फेफड़ों पर पड़ती है भारी? (Image Source: Freepik) 

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपने कभी गौर किया है कि जैसे ही कड़ाके की सर्दी कम होने लगती है और मौसम करवट लेता है, अचानक खांसी-जुकाम और सांस की बीमारियों की बाढ़ सी आ जाती है? असल में, यह कोई इत्तेफाक नहीं है। जब तापमान में उतार-चढ़ाव होता है, तो अक्सर हमारी इम्युनिटी कमजोर पड़ जाती है और हम आसानी से बीमार पड़ने लगते हैं, लेकिन इसका असली कारण सिर्फ ठंड नहीं, बल्कि हवा का सूखापन और हमारे फेफड़ों की नमी का कम होना है।

    आइए, डॉ. आदित्य नाग (असिस्टेंट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ रेस्पिरेटरी मेडिसिन, NIIMS मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा) से जानते हैं कि मौसम का यह बदलाव हमारी सेहत पर कैसे असर डालता है।

    How to prevent respiratory illness

    (Image Source: AI-Generated) 

    मौसम बदलने पर क्यों बढ़ता है संक्रमण का खतरा?

    सर्दियों के दौरान हमारी इम्युनिटी अक्सर कम हो जाती है। ठंडी हवा और सूखापन हमारी सांस की नली की नमी को छीन लेते हैं। आमतौर पर, हमारे वायुमार्ग में एक सुरक्षात्मक तरल होता है जो वायरस और बैक्टीरिया को फंसाकर बाहर निकालने में मदद करता है, लेकिन सर्दियों में, विशेष रूप से हीटर और ब्लोअर के इस्तेमाल से, यह प्रोटैक्टिव बैरियर ड्राई हो जाता है।

    नतीजतन, वायरस और बैक्टीरिया आसानी से साफ नहीं हो पाते और सांस की नली में लंबे समय तक टिके रहते हैं, जिससे इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, कई रेस्पिरेटरी वायरस ठंड में ज्यादा समय तक जीवित रहते हैं और आसानी से फैलते हैं। ठंड के कारण लोग बंद कमरों में एक-साथ ज्यादा समय बिताते हैं, जिससे भी संक्रमण एक-दूसरे में तेजी से फैलता है।

    Respiratory virus

    (Image Source: Freepik) 

    किन लोगों को रहना चाहिए सबसे ज्यादा सावधान?

    मौसम के इस बदलाव का असर हर किसी पर एक जैसा नहीं होता। डॉक्टर बताते हैं कि इस दौरान कुछ खास लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत पड़ती है:

    • 10 साल से कम उम्र के बच्चे: क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ होता है।
    • 65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग: बढ़ती उम्र के साथ उनकी इम्युनिटी कम हो जाती है और डायबिटीज या दिल की बीमारी जैसी अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं।
    • सांस के मरीज: जिन्हें पहले से अस्थमा, COPD या फेफड़ों की कोई पुरानी बीमारी है, उनके लिए मामूली संक्रमण भी गंभीर रूप ले सकता है।

    शुरुआती संकेत, जिन्हें न करें अनदेखा

    मौसम बदलते समय शरीर कुछ संकेत देता है जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। अगर आपको लगातार खांसी आ रही हो, बहुत ज्यादा बलगम बन रहा हो, लगातार छींकें आ रही हों, सांस लेने में तकलीफ हो, सीने में जकड़न महसूस हो या असामान्य थकान लगे, तो सतर्क हो जाएं। अगर खांसी-जुकाम के लक्षण उम्मीद से ज्यादा समय तक रहें या ठीक होने के बजाय बिगड़ने लगें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

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    Seasonal weather transitions

    (Image Source: Freepik) 

    बचाव के लिए अपनाएं ये आसान उपाय

    थोड़ी-सी सावधानी से आप अपने फेफड़ों को सुरक्षित रख सकते हैं:

    • हाइड्रेशन: शरीर में पानी की कमी न होने दें। इससे सांस की नली में नमी बनी रहती है।
    • नमी बनाए रखें: अगर आप हीटर का इस्तेमाल करते हैं, तो कमरे में हवा को बहुत ज्यादा खुश्क होने से बचाने के लिए ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल करें।
    • सही कपड़े: ठंड हवा में बाहर निकलते समय नाक और मुंह को ढककर रखें और सही कपड़े पहनें।
    • टीकाकरण: बुजुर्गों और पुरानी बीमारियों वाले लोगों को इन्फ्लूएंजा और अन्य जरूरी टीके लगवाने चाहिए।
    • लाइफस्टाइल: बैलेंस डाइट, अच्छी नींद और साफ-सफाई से आपकी इम्युनिटी मजबूत होती है।

    मौसम का बदलना तो हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन जागरूकता और सही देखभाल से हम खुद को और अपने परिवार को इन संक्रमणों से जरूर बचा सकते हैं।

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