यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 08, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
गर्मी में भी चाहिए ओढ़ने को कुछ! क्यों बिना ओढ़े नहीं आती कुछ लोगों को नींद, जानें इसकी साइकोलॉजी
दिनभर की थकान के बाद रात को सुकून से सोने के लिए लोग अलग-अलग तरीके अपनाते हैं। कुछ लोगों को गर्मी में भी बिना ओढ़े नींद नहीं आती क्योंकि यह आदत उनके ब ...और पढ़ें

HighLights
- चैन के सोने के लिए लोग कई तरीके अपनाते हैं।
- हालांकि, कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें हमेशा ओढ़कर भी नींद आती है।
- इसके पीछे कई सारी वजह हो सकती हैं, जिन्हें जानना जरूरी हैं।
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। दिनभर की भागदौड़ और थकान के बाद रात का समय सुकून और चैन की नींद का होता है। रात को सुकून से सोने के लिए लोग अलग-अलग चीजें करते हैं। किसी के लिए चैन से सोने के लिए आरामदायक गद्दा या तकिया जरूरी होता है, तो किसी को कम्फर्टेबल पोजीशन में ही अच्छी नींद आती है। हालांकि, कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिन्हें बिना ओढ़े नींद नहीं आती।
गर्मी हो या सर्दी, इन लोगों को मौसम से कोई फर्क नहीं पड़ता। फर्क पड़ता है, तो इस बात से कि सोते समय उन्होंने कुछ ओढ़ा है या नहीं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसी क्या वजह है, जो लोग भीषण गर्मी में भी बिना ओढ़े सो नहीं पाते हैं। अगर आप भी इन लोगों में से हैं और आपके मन में भी अक्सर यह सवाल उठता है, तो आज इस आर्टिकल में हम आपको इसी सवाल का जवाब देने वाले हैं। आइए जानते हैं विस्तार से।
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नहीं छूटती बचपन की आदत
सोते समय ओढ़कर सोने की यह आदत हमारे बचपन से जुड़ी होती है। दरअसल, खुद को कंबल या चादर से ढकना सर्कैडियन रिदम का एक अहम हिस्सा है। इससे हमें यह तय करने में मदद मिलती है कि हमारा शरीर कब सोने के लिए तैयार है और कब जागने के लिए। यह एत ऐसी आदत है, जो जन्म से ही विकसित हो जाती है और इसलिए बड़े होने पर भी यह वैसी ही रहती है।
सुरक्षा का अहसास कराता है कंबल
ओढकर सोने की इस आदत के पीछे साइकोसॉजिकल रिजन भी छिपा हुआ है। दरअसल, कंबल की गर्माहट और कम्फर्ट हमें रात के समय में सुरक्षित महसूस कराता है। सोते समय अंधेरे की वजह से डर महसूस करना आम है और इसलिए कुछ लोग इस डर से बचने के लिए कंबल का इस्तेमाल करते है। बड़े होने पर भी यह डर वैसा ही रहता है और हमारे दिमाग को कंबल के नीचे सुरक्षित महसूस होता है।
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ठंड से होता बचाव
जब हम सोते हैं, तो हमारे शरीर का तापमान गिरता है, जो रात भर गिरता रहता है। सुबह लगभग 4 बजे के आसपास यह अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच जाता है। यह प्रोसेस बिस्तर पर जाने से एक घंटा पहले शुरू होती है और जब हम रैपिड आई मूवमेंट (REM) स्लीप साइकिल में पहुंच जाते हैं, तो हमारा शरीर अपने तापमान को कंट्रोल करने की क्षमता खो देता है। ऐसे में कंबल या चादर हमें पूरी रात गर्म रखने में मदद करती है और हमें ठंड से बचाती है।
कंबल और अनिद्रा का भी है कनेक्शन
जर्नल ऑफ स्लीप मेडिसिन एंड डिसऑर्डर्स में 2015 में पब्लिश एक अध्ययन से पता चला है कि भारी कंबल के नीचे सोने से रात में अच्छी नींद आती है। अमेरिकन जर्नल ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी में साल 2020 में प्रकाशित एक और अध्ययन से पता चला है कि हैली कंबल एंग्जायटी और अनिद्रा से पीड़ित लोगों के लिए भी मददगार हो सकता है।