क्या है ईयरफोन इस्तेमाल करने का '60-60 रूल'? ENT एक्सपर्ट ने बताया बहरेपन से बचने का सही तरीका
ईयरफोन्स का ज्यादा इस्तेमाल कानों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए इसके इस्तेमाल के साथ सावधानी जरूरी है। ...और पढ़ें

क्या आप भी दिनभर करते हैं ईयरफोन्स का इस्तेमाल? (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के डिजिटल दौर में ईयरफोन्स और हेडफोन्स हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। चाहे ऑफिस की मीटिंग्स हों, ऑनलाइन गेमिंग हो या फिर पसंदीदा ओटीटी सीरीज, हम घंटों इनका इस्तेमाल करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह शौक आपकी सुनने की क्षमता को कम कर सकता है?
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज के ईएनटी विभाग के सीनियर डायरेक्टर, डॉ. अनुराग जैन के अनुसार, युवाओं में नॉइज-इंड्यूस्ड हियरिंग लॉस यानी शोर के कारण होने वाला बहरापन तेजी से बढ़ रहा है। आइए जानें ऐसा क्यों हो रहा है और बचाव के लिए क्या कर सकते हैं।
अब केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रहा बहरापन
पहले माना जाता था कि सुनने की समस्या केवल उम्रदराज लोगों या फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों को होती है, लेकिन अब यह समस्या 20 और 30 साल के युवाओं, यहां तक कि टीनएजर्स में भी देखी जा रही है। स्मार्टफोन और गेमिंग के बढ़ते चलन ने कम उम्र में ही कानों की नसों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है।
कैसे पहुंचता है कानों को नुकसान?
हमारे कान एक निश्चित सीमा तक ही शोर बर्दाश्त कर सकते हैं। जब हम 85 डेसिबल से ज्यादा तेज आवाज लंबे समय तक सुनते हैं, तो हमारे कान के अंदरूनी हिस्से की बेहद नाजुक हेयर सेल्स डैमेज होने लगती हैं। हैरानी की बात यह है कि बातचीत के दौरान इस्तेमाल होने वाली कम फ्रीक्वेंसी वाली आवाजें जल्दी प्रभावित नहीं होतीं, लेकिन हाई फ्रीक्वेंसी सीधे सुनने वाली नस पर बुरा असर डालती है। सबसे डरावनी बात यह है कि एक बार अगर यह नुकसान हो गया, तो इसे ठीक नहीं किया जा सकता।
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इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
शुरुआत में कान खराब होने के संकेत बहुत मामूली होते हैं, जिन्हें अक्सर हम अनदेखा कर देते हैं, जैसे-
- कानों में लगातार घंटी बजना (टिनिटस)
- भीड़-भाड़ वाली जगह पर लोगों की बात समझने में मुश्किल होना
- अक्सर वॉल्यूम बढ़ाने की जरूरत महसूस होना
- कानों में भारीपन या आवाज ठीक से सुनाई न देना
बचाव के लिए क्या करें?
- 60-60 का नियम अपनाएं- कभी भी अपनी डिवाइस की कुल आवाज के 60% से ज्यादा वॉल्यूम पर न सुनें और लगातार 60 मिनट से ज्यादा ईयरफोन्स का इस्तेमाल न करें।
- शोर कम करने वाले हेडफोन्स- बाहर के शोर को दबाने के लिए वॉल्यूम बढ़ाने के बजाय नॉइज-कैंसलिंग हेडफोन्स का इस्तेमाल बेहतर है।
- ब्रेक लें और सोएं नहीं- ईयरफोन्स लगाकर कभी न सोएं और बीच-बीच में कानों को आराम दें।
- गेमिंग और म्यूजिक से दूरी- गेमिंग या म्यूजिक के दौरान सीधे हेडफोन्स का इस्तेमाल कम से कम करें।