कहीं आप भी तो नहीं कर रहे Fatty Liver को इग्नोर? डॉक्टर ने बताया कब 'लाइलाज' बन जाती है बीमारी
भागदौड़ भरी जिंदगी में फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जिसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। ...और पढ़ें

कब फैटी लिवर बन जाता है 'नॉन-रिवर्सिबल' बीमारी? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में 'फैटी लिवर' की समस्या तेजी से बढ़ रही है, यही वजह है कि इसे हल्के में लेना एक बड़ी भूल साबित हो सकती है।
सबसे राहत की बात यह है कि अगर शुरुआत में ही इस पर ध्यान दिया जाए, तो यह बीमारी पूरी तरह से जड़ से खत्म हो सकती है, लेकिन अगर आप लंबे समय तक इसे नजरअंदाज करते हैं, तो यही फैटी लिवर एक ऐसी स्थिति में पहुंच सकता है जहां से इसे वापस ठीक करना नामुमकिन यानी 'नॉन-रिवर्सिबल' हो जाता है।
आइए, 19 अप्रैल को मनाए जाने वाले World Liver Day 2026 के मौके पर डॉक्टर से डिटेल में जानते हैं इस बारे में।

(Image Source: AI-Generated)
क्या है फैटी लिवर और कैसे बढ़ता है इसका खतरा?
जब लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट यानी चर्बी जमा होने लगती है, तो उस स्थिति को फैटी लिवर कहा जाता है। यह मुख्य रूप से खराब लाइफस्टाइल, मोटापे, डायबिटीज और बहुत ज्यादा शराब पीने की वजह से होता है।
शुरुआती दौर में इसे "सिंपल फैटी लिवर" कहते हैं। इस स्टेज में लिवर को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचता है और आप सही खानपान व कसरत से इसे बिल्कुल ठीक कर सकते हैं, लेकिन अगर समय रहते इसे नहीं सुधारा गया, तो यह स्थिति "नॉन-अल्कोहोलिक स्टीटोहेपेटाइटिस (NASH)" का रूप ले लेती है। NASH वह स्थिति है जब लिवर में सूजन आने लगती है और वह अंदर से डैमेज होना शुरू हो जाता है।
कब यह बीमारी बन जाती है 'नॉन-रिवर्सिबल'?
जब लिवर में लगातार सूजन बनी रहती है और उसे चोट पहुंचती है, तो वहां "फाइब्रोसिस" की समस्या पैदा हो जाती है। इसका मतलब है कि लिवर में स्कार टिशू बनने लगते हैं।
खबरें और भी
एशियन हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के डायरेक्टर और एचओडी डॉक्टर अमित मिगलानी के अनुसार, फैटी लिवर शुरुआती स्टेज में पूरी तरह से रिवर्सिबल होता है, लेकिन लगातार अनदेखी के कारण जब फाइब्रोसिस आगे चलकर "सिरोसिस" में बदल जाता है, तब स्थिति हाथ से निकल जाती है। सिरोसिस की स्टेज में लिवर की बनावट और उसके काम करने की क्षमता हमेशा के लिए खराब हो जाती है। इसी स्टेज को 'नॉन-रिवर्सिबल' माना जाता है, क्योंकि यहां से लिवर को उसकी पहले जैसी स्वस्थ स्थिति में वापस लाना संभव नहीं होता।
डॉक्टर मिगलानी यह भी बताते हैं कि आजकल युवाओं में खराब खानपान, मोटापे और शारीरिक मेहनत की कमी के कारण यह बीमारी तेजी से फैल रही है।

(Image Source: AI-Generated)
शरीर में दिखने वाले ये लक्षण हैं खतरे की घंटी
फैटी लिवर एक "साइलेंट बीमारी" है, क्योंकि शुरुआत में इसके कोई खास लक्षण नहीं दिखते, लेकिन जैसे-जैसे लिवर का डैमेज बढ़ता है, शरीर कुछ संकेत देने लगता है:
- लगातार बहुत ज्यादा थकान महसूस होना।
- पेट के दाहिने हिस्से में दर्द रहना या भारीपन लगना।
- अचानक से भूख कम हो जाना।
- शरीर के वजन में तेजी से बदलाव आना।
- बीमारी के गंभीर होने पर त्वचा और आंखों का रंग पीला पड़ जाना।
बचाव ही है सबसे बड़ा इलाज
डॉक्टरों की सलाह है कि फैटी लिवर को उस खतरनाक 'नॉन-रिवर्सिबल' स्टेज तक पहुंचने से रोकने के लिए समय रहते ये जरूरी कदम उठाने चाहिए:
- रेगुलर एक्सरसाइज करें: दिन भर में कम से कम 30 मिनट कसरत जरूर करें।
- सही खानपान अपनाएं: संतुलित और पौष्टिक आहार लें। जंक फूड और ज्यादा मीठी चीजों से बिल्कुल दूर रहें।
- वजन पर काबू रखें: अपने बढ़ते वजन को कंट्रोल करें।
- शराब से दूरी: शराब का सेवन या तो बिल्कुल सीमित कर दें या फिर पूरी तरह से बंद कर दें।
- जांच कराते रहें: समय-समय पर अपना 'लिवर फंक्शन टेस्ट' करवाते रहें ताकि लिवर की स्थिति का पता चलता रहे।
यह भी पढ़ें- साल 2050 तक 180 करोड़ लोग होंगे फैटी लिवर का शिकार, इन 5 वजहों से बढ़ रहा बीमारी का खतरा