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    क्या छूने या साथ खाना खाने से भी फैल सकता है टीबी? डॉक्टर से जानें इस बीमारी का सच

    Updated: Mon, 23 Mar 2026 05:18 PM (IST)

    टीबी से जुड़े मिथकों पर यकीन करना इलाज को मुश्किल बना सकता है और समाज में मरीज के लिए शर्मिंदगी का कारण बनता है। ...और पढ़ें

    क्या आप भी करते हैं टीबी से जुड़े मिथकों पर यकीन? (Picture Courtesy: Freepik)

    क्या आप भी करते हैं टीबी से जुड़े मिथकों पर यकीन? (Picture Courtesy: Freepik)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। टीबी एक ऐसी बीमारी है जिसके साथ हमारे समाज में इलाज से ज्यादा अंधविश्वास और डर जुड़ा रहा है। भारत जैसे देश में, जहां टीबी के मामले बड़ी संख्या में पाए जाते हैं, इसके फैलने के तरीकों को लेकर फैली गलतफहमियां न केवल मरीजों के लिए सामाजिक मुश्किलें खड़ी करती हैं, बल्कि उनके इलाज में भी देरी का कारण बनती हैं।

    टीबी से जुड़ी ऐसी ही एक धारणा लोगों में काफी प्रचलित है कि यह छूने से फैल सकता है। यह बात सच है या सिर्फ गलतफहमी इस बारे में जानने के लिए हमने डॉ. विजय कुमार अग्रवाल (डायरेक्टर- पल्मोनोलॉजी एंड क्रिटिकल केयर, यथार्थ सुपर स्पेशेलिटी हॉस्पिटल, फरीदाबाद) से बात की। आइए जानें डॉक्टर का क्या कहना है। 

    क्या छूने या साथ खाने से फैलता है टीबी?

    अक्सर परिवारों में जब किसी को टीबी होता है, तो सबसे पहले उसके बर्तन अलग कर दिए जाते हैं, उससे हाथ मिलाना बंद कर दिया जाता है और उसे एक अलग कमरे में कैद कर दिया जाता है। लोगों को लगता है कि साथ खाना खाने या बर्तन शेयर करने से टीबी फैल जाएगा या फिर मरीज के कपड़े या बिस्तर छूने से इन्फेक्शन हो सकता है। लेकिन डॉक्टर बताते हैं कि यह पूरी तरह से गलत है। टीबी इन तरीकों से बिल्कुल नहीं फैलता।

    TB Symptoms

    टीबी कैसे फैलता है?

    टीबी एक एयरबोर्न यानी हवा के जरिए फैलने वाली बीमारी है। यह केवल तभी फैलती है जब फेफड़ों की टीबी से पीड़ित व्यक्ति खांसता है, छींकता है, या बहुत करीब आकर बात करता है।

    दरअसल, इस दौरान टीबी के बैक्टीरिया मुंह और नाक से निकले ड्रॉपलेट्स के रूप में हवा में मिल जाते हैं। जब कोई स्वस्थ व्यक्ति उस दूषित हवा में सांस लेता है, तो ये बैक्टीरिया उसके फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं। इन्फेक्शन का खतरा उन लोगों को ज्यादा होता है जो लंबे समय तक मरीज के साथ बंद और कम हवादार कमरों में रहते हैं।

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    गलतफहमियों का मानसिक सेहत पर असर

    जब हम टीबी के मरीज को अछूत समझने लगते हैं, तो इसका उसकी मानसिक सेहत पर बहुत बुरा असर पड़ता है।

    • सामाजिक अलगाव- मरीज खुद को अपराधी समझने लगता है और अपनी बीमारी को छिपाने की कोशिश करता है।
    • इलाज में देरी- बदनामी के डर से लोग डॉक्टर के पास जाने से बचते हैं, जिससे बीमारी और गंभीर हो जाती है।
    • डिप्रेशन- परिवार का साथ न मिलने पर मरीज मानसिक रूप से टूट जाता है।

    बचाव के सही तरीके क्या हैं?

    • मरीज को खांसते या छींकते समय मुंह पर रुमाल रखने की सलाह दें।
    • घर की खिड़कियां खुली रखें ताकि ताजी हवा और धूप आती रहे।
    • लक्षणों को पहचानकर तुरंत इलाज शुरू करवाएं और दवा व सही पोषण पर ध्यान दें।