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    पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के लिए ज्यादा खतरनाक है टीबी, डॉक्टर ने बताया छीन सकता है मां बनने का सुख

    Updated: Mon, 23 Mar 2026 02:48 PM (GMT+05:30)

    24 मार्च का दिन हर साल World TB Day के रूप में मनाया जाता है। ...और पढ़ें

    World TB Day 2026: पुरुषों से कितना अलग है महिलाओं में टीबी का असर? (Image Source: AI-Generated)

    World TB Day 2026: पुरुषों से कितना अलग है महिलाओं में टीबी का असर? (Image Source: AI-Generated)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर हम यही मानते हैं कि टीबी सिर्फ फेफड़ों से जुड़ी एक बीमारी है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह महिलाओं के रिप्रोडक्टिव सिस्टम को भी अपना शिकार बना सकती है?

    गुरुग्राम स्थित CIFAR की डायरेक्टर और रिप्रोडक्टिव हेल्थ एक्सपर्ट, डॉ. पुनीत राणा अरोड़ा के अनुसार, महिलाओं के लिए टीबी एक गंभीर खतरा बन सकती है, जिसे 'जननांग टीबी' (Genital TB) कहा जाता है। यह समस्या विशेष रूप से उन महिलाओं को अपना शिकार बनाती है जिनकी इम्युनिटी कमजोर होती है।

    Genital TB

    (Image Source: AI-Generated)

    महिलाओं के शरीर पर कैसे होता है असर?

    जब टीबी का संक्रमण महिलाओं के प्रजनन अंगों तक पहुंचता है, तो यह गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब और अंडाशय को भारी नुकसान पहुंचाता है। इसका सबसे खतरनाक नतीजा बांझपन के रूप में सामने आता है।

    दरअसल, टीबी के कारण फैलोपियन ट्यूब में सूजन या ब्लॉकेज आ जाती है। इस रुकावट के चलते महिला के अंडे और पुरुष के शुक्राणु आपस में मिल नहीं पाते हैं। इसके कारण कई और गंभीर परेशानियां जन्म लेती हैं, जैसे:

    • पीरियड्स का अनियमित होना या पूरी तरह से रुक जाना।
    • गर्भधारण करने में बहुत अधिक कठिनाई होना।
    • गर्भ ठहरने के बाद बार-बार गर्भपात हो जाना।

    पुरुषों और महिलाओं में टीबी के असर में क्या अंतर है?

    डॉ. अरोड़ा बताती हैं कि पुरुषों में टीबी का संक्रमण ज्यादातर फेफड़ों तक ही सीमित रहता है। हालांकि, कुछ मामलों में यह पुरुषों के प्रजनन अंगों- जैसे टेस्टिस और प्रोस्टेट को भी प्रभावित कर सकता है। इससे पुरुषों के स्पर्म काउंट और उनकी क्वालिटी में गिरावट आ सकती है, लेकिन एक बड़ी राहत की बात यह है कि महिलाओं की तुलना में पुरुषों में टीबी के कारण बांझपन का खतरा काफी कम होता है।

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    reproductive system TB

    (Image Source: AI-Generated)

    बीमारी को पहचानने में क्यों होती है देरी?

    महिलाओं में इस 'जेनिटल टीबी' की सबसे बड़ी चुनौती इसका छिपकर वार करना है। इसके लक्षण बहुत ही सामान्य और हल्के होते हैं, जैसे:

    अक्सर महिलाएं इन लक्षणों को आम बात समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, और यही कारण है कि इस गंभीर बीमारी का पता बहुत देर से चलता है।

    सही समय पर इलाज है बचाव

    टीबी से घबराने की नहीं, बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है। अगर सही समय पर इसकी जांच हो जाए और सही इलाज मिले, तो टीबी को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। महिलाओं को यह खास ध्यान रखना चाहिए कि यदि उन्हें लंबे समय तक गर्भधारण करने में परेशानी हो रही हो या उनके पीरियड्स में लगातार बदलाव दिख रहा हो, तो वे बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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