स्किन खराब हो जाएगी मम्मा…अगर आपके बच्चे भी होली खेलने से बचते हैं, तो उन्हें दें ये स्पेशल Gen-Z सरप्राइज
होली की असली खुशी ऑफलाइन अनुभवों, जैसे घर की गुजिया और पानी वाली होली से मिलती है और त्योहार के दौरान डिजिटल डिटॉक्स करना बेहद जरूरी है।

Gen-Z बच्चों के लिए होली: पारंपरिक मस्ती और डिजिटल डिटॉक्स का अनोखा संगम (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
आरती तिवारी, नई दिल्ली। घर में होली की तैयारी खूब जोर-शोर से हो रही है। मगर कानों में हेडफोन और आंखों में चमकती स्क्रीन के पीछे छिपी 17 साल की सान्वी को ये सब अब पसंद नहीं। जब भी मम्मी सोसाइटी की होली पार्टी के लिए कुछ सुझाव मांगती हैं, तो वो बस इतना कहती है, ‘ये सब आप लोगों की जेनरेशन करती थी।
अब होली में कौन अपनी स्किन खराब करने को लेकर इतना उत्सुक है!’ मगर मम्मी ने भी इस बार दावा किया है कि इस साल की होली पार्टी नई पीढ़ी के लिए ही रखी गई है। सान्वी एक हाथ से हेडफोन खिसकाकर इस बात से हैरान है कि हमेशा परंपरागत तरीके से होली मनाने को लेकर लेक्चर देने वाली मम्मी आखिर करने क्या वाली है!
एस्थेटिक से बढ़कर अनुभव
होली हमें सिखाती है कि चाहे हम कितने भी ‘स्मार्ट’ हो जाएं, कुछ खुशियां सिर्फ ‘ऑफलाइन’ ही महसूस की जा सकती हैं। जब आप बिना फिल्टर के असली रंगों में रंगे होंगे, तभी आप अपनी असली ‘वाइब’ ढूंढ पाएंगे। घर की बनी गुजिया का स्वाद किसी भी फूड-डिलीवरी एप पर नहीं मिलेगा और दोस्तों के साथ वो पानी वाली होली का रश किसी वीडियो गेम में नहीं आएगा।
सिर्फ चुटकी भर अबीर को बड़ी स्टाइल से गालों पर लगाकर, टीशर्ट पर कुछ छींटे रंग के डलवाकर आप एस्थेटिक फोटोग्राफ्स तो क्लिक कर सकते हैं, मगर जब आप वाकई में एक-दूसरे को रंग लगाएंगे, अबीर को अपने हाथों से उड़ाएंगे, तब जो अनुभव आएगा, वो किसी भी एस्थेटिक फोटोशूट से कहीं बढ़कर होगा। होली पार्टी में ढोल की थाप के साथ डीजे को थोड़ा सा लो-फाई या इंडी-पॉप गाने की प्लेलिस्ट चलाने के लिए कहें। जब पुरानी पीढ़ी और नई पीढ़ी एक ही बीट पर नाचेगी, तब बनेगा असली ‘सिंक’।
डिजिटल डिटाक्स के लिए परफेक्ट दिन
अब कहीं न कहीं आपके मन में यह तो रहता ही होगा कि किसी तरह से डिजिटल डिटाक्स करके जीवन को बेहतर बनाने के लिए एक कदम बढ़ाया जाए। मगर जब फोन के बिना कुछ काम करने को न हो, तो यह प्रण टूट ही जाता है। तो इसके लिए होली से बेहतर और कोई दिन हो ही नहीं सकता। होली का मतलब है रंग, भागदौड़ और ऐसे में अगर गीला क्या, सूखा रंग भी आपके ईयरबड्स या आइफोन के चार्जिंग प्वाइंट में चला गया तो फिर लंबा खर्चा पक्का।
ऐसे में इस बार, फोन को जिपलाक बैग में डालिए और उसे वहीं रहने दीजिए। अगर तस्वीरें खींचनी भी हैं, तो पहले उस अनुभव का हिस्सा बनिए। पुराने रिवाजों को अपनी नई विचारधारा के साथ मिलाइए। डिजिटल शुभकामनाएं भेजना आसान है, पर किसी के चेहरे पर गुलाल मलना एक ‘इमोशन’ है।
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