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    स्मार्टफोन छोड़ किताबों से दोस्ती करेंगे बच्चे, पेरेंट्स बस अपना लें ये 7 आसान टिप्स

    Updated: Mon, 13 Apr 2026 10:38 AM (IST)

    बच्चों में किताब पढ़ने की आदत डालना काफी जरूरी है, ताकि उनकी क्रिएटिविटी और फोकस बेहतर हो। ...और पढ़ें

    बच्चों में कैसे डालें किताब पढ़ने की आदत? (AI Generated Image)

    बच्चों में कैसे डालें किताब पढ़ने की आदत? (AI Generated Image)

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के समय में बच्चों का ज्यातादर समय स्मार्टफोन या कम्प्यूटर के सामने बीत रहा है। इससे उनकी सेहत पर तो असर पड़ ही रहा है, साथ ही उनकी फोकस करने की क्षमता भी घट रही है। ऐसे में बच्चों को किताबों से जोड़ना उनके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। 

    हालांकि, स्मार्टफोन के युग में बच्चों में किताब पढ़ने की आदत डालना काफी मुश्किल हो सकता है। लेकिन कुछ आसान टिप्स की मदद से पेरेंट्स बच्चों में इस आदत को विकसित कर सकते हैं। आइए जानें इस बारे में।

    खुद रोल मॉडल बनें

    बच्चे वह नहीं करते जो आप उन्हें करने के लिए कहते हैं, बल्कि वे वह करते हैं जो वे आपको करते हुए देखते हैं। अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा पढ़े, तो आपको भी अपने हाथ में फोन छोड़कर किताब पकड़नी होगी। जब बच्चा आपको नियमित रूप से पढ़ते हुए देखेगा, तो उसमें भी किताब पढ़ने की जिज्ञासा पैदा होगी।

    सही उम्र में शुरुआत करें

    पढ़ने की आदत डालने के लिए बच्चा बहुत छोटा नहीं होता। जब बच्चा केवल कुछ महीनों का हो, तभी से उसे रंगीन चित्रों वाली पिक्चर बुक्स दिखाना शुरू करें। उन्हें कहानियां सुनाएं। इससे उनके दिमाग में यह बात बैठ जाती है कि किताबें मनोरंजन का एक बेहतरीन साधन हैं।

    Kid reading books (1)

    (AI Generated Image)

    रीडिंग कॉर्नर बनाएं

    घर के किसी शांत कोने को रीडिंग कॉर्नर का रूप दें। वहां कुछ आरामदायक कुशन, अच्छी रोशनी और बच्चे की पसंद की किताबों का कलेक्शन रखें। जब बच्चे के पास अपनी छोटी-सी लाइब्रेरी होगी, तो वह वहां समय बिताना पसंद करेगा।

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    उनकी पसंद को प्राथमिकता दें

    अक्सर माता-पिता बच्चों को क्लासिक या एजुकेशनल किताबें पढ़ाने की कोशिश करते हैं। शुरुआत में ऐसा न करें। अगर आपके बच्चे को डायनासोर, कॉमिक्स या परियों की कहानियां पसंद हैं, तो उसे वही पढ़ने दें। सबसे जरूरी है बच्चों में पढ़ने में रुचि पैदा करना, बाद में खुद ही अलग-अलग तरह की किताबें पढ़ना शुरू कर देंगे।

    साथ मिलकर पढ़ें 

    रात को सोते समय कहानी पढ़ना एक बेहतरीन परंपरा हो सकती है। कहानी पढ़ते समय आवाज बदलें, हाव-भाव दिखाएं और बीच-बीच में सवाल पूछें कि क्या लगता है अब आगे क्या होगा? यह इंटरैक्शन बच्चे की कल्पना शक्ति को बढ़ाता है

    स्क्रीन टाइम और बुक टाइम में बैलेंस

    किताबों को सजा के तौर पर पेश न करें। इससे बच्चे के मन में पढ़ाई के लिए नेगेटिव भावना पैदा होती है। इसके बजाय, पढ़ने को एक रिवॉर्ड या मजेदार एक्टिविटी की तरह पेश करें।

    लाइब्रेरी और बुकस्टोर की सैर

    महीने में कम से कम एक बार बच्चे को लाइब्रेरी या बुकस्टोर लेकर जाएं। उन्हें खुद अपनी पसंद की किताब चुनने की आजादी दें। नई किताबों की खुशबू और वहां का माहौल बच्चे को पढ़ने के लिए प्रेरित करता है।