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    सबके सामने बच्चों को डांटना क्यों होता है गलत? 3 पॉइंट्स में साइकोलॉजिस्ट ने गिनाए बड़े नुकसान

    Updated: Sat, 11 Apr 2026 01:01 PM (GMT+05:30)

    बच्चों को सही राह पर लाने के लिए अनुशासन बहुत जरूरी है, लेकिन उन्हें अनुशासित करने का तरीका उससे भी ज्यादा अहमियत रखता है। ...और पढ़ें

    पब्लिक में डांट से बच्चों के मन पर पड़ते हैं गहरे निशान, जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट (Image Source: AI-Generated)

    पब्लिक में डांट से बच्चों के मन पर पड़ते हैं गहरे निशान, जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट (Image Source: AI-Generated)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर कई माता-पिता या शिक्षक बच्चों की छोटी-बड़ी गलती पर उन्हें भीड़ में, रिश्तेदारों के सामने या स्कूल में सरेआम डांट देते हैं।

    दिल्ली के पीएसआरआई अस्पताल की कंसल्टेंट साइकोलॉजिस्ट, अर्पिता कोहली के अनुसार, इस तरह की सार्वजनिक डांट का असर सिर्फ उस पल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह बच्चे के कोमल मन पर जीवन भर के लिए गहरे भावनात्मक घाव छोड़ सकता है।

    आइए, इस आर्टिकल में जानते हैं कि क्यों बच्चों को सबके सामने डांटना उनके लिए नुकसानदायक हो सकता है।

    parenting tips

    (Image Source: AI-Generated)

    सेल्फ-रिस्पेक्ट को पहुंचती है गहरी चोट

    जब किसी बच्चे को दूसरों के सामने फटकारा जाता है, तो वह बहुत ही अपमानित और इनसिक्योर फील करता है। इससे उसकी सेल्फ-रिस्पेक्ट को सीधा नुकसान पहुंचता है। बार-बार ऐसा होने पर बच्चा खुद को दूसरों से कमतर आंकने लगता है। उसके अंदर शर्म और डर घर करने लगते हैं, जो आगे चलकर उसकी पर्सनैलिटी का हिस्सा बन जाते हैं और उसका कॉन्फिडेंस पूरी तरह टूट जाता है।

    सीखने के बजाय गलतियां छिपाने की आदत

    पब्लिक में डांट खाने का एक बहुत बड़ा नुकसान यह है कि बच्चा अपनी गलतियों से सबक लेना बंद कर देता है। भविष्य में अपमान से बचने के लिए वह अपनी गलतियां छिपाना सीख जाता है। उसे हमेशा यह डर रहता है कि कुछ कहने पर फिर से बेइज्जती होगी, इसलिए वह खुलकर अपनी बात रखने से कतराने लगता है। इस डर की वजह से माता-पिता और बच्चे के बीच का वह भरोसा भी कमजोर होने लगता है, जो बच्चे के स्वस्थ मानसिक विकास के लिए सबसे जरूरी है।

    Child Emotional Scars

    (Image Source: AI-Generated)

    स्वभाव में आने लगता है गुस्सा और डर

    जो बच्चे बार-बार सबके सामने डांट सुनते हैं, उनके स्वभाव में कई नकारात्मक बदलाव आते हैं। उनमें अक्सर चिंता, गुस्सा या सोशल फियर पैदा हो जाता है। इसका नतीजा यह होता है कि बच्चे या तो बहुत ज्यादा चुप और शर्मीले हो जाते हैं या फिर उनका बर्ताव काफी अग्रेसिव हो जाता है। ये दोनों ही स्थितियां बच्चे की सोशल और इमोशनल ग्रोथ के लिए बहुत खतरनाक हैं।

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    क्या है सुधारने का सही तरीका?

    बच्चों को सुधारने के लिए उन्हें अकेले में ले जाकर, बहुत ही शांति और समझदारी के साथ समझाना सबसे असरदार तरीका है। जब बच्चा खुद को सुरक्षित महसूस करता है, तो वह बिना किसी डर के अपनी गलती को जल्दी समझता है और उसे सुधारने के लिए तैयार भी होता है। माता-पिता का धैर्य और बच्चों के साथ सकारात्मक बातचीत ही उनके आत्मविश्वास और आपसी भरोसे की नींव को मजबूत बनाती है।

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