बच्चा बात नहीं मानता? अपनाएं ये 6 तरीके, बिना डांटे-फटकारे सीख जाएंगे अनुशासन का पाठ
माता-पिता होना दुनिया का सबसे खूबसूरत एहसास है, लेकिन बच्चों को अनुशासन सिखाना उतना ही मुश्किल काम भी है। ...और पढ़ें

बिना सजा दिए बच्चों को कैसे रखें कंट्रोल में? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। कई बार ऐसा होता है कि बच्चा हमारी बात बिल्कुल नहीं सुनता और हम खीझ कर उसे डांटने या झिड़कने लगते हैं, लेकिन क्या डांटने से बात बनती है? सच तो यह है कि इससे बच्चे और भी ज्यादा जिद्दी हो जाते हैं या आपसे डरने लगते हैं। अगर आप चाहते हैं कि बच्चा आपकी बात भी माने और आपका रिश्ता भी प्यारा बना रहे, तो आज ही इन 6 तरीकों को अपनाकर देखें।

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ऑर्डर देने के बजाय ऑप्शन दें
अक्सर हम बच्चों को सीधा ऑर्डर देते हैं, जैसे- "चुपचाप दूध पियो!" इसकी जगह उन्हें ऑप्शन दें। आप मुस्कुराकर पूछ सकते हैं, "बेटा, क्या तुम दूध लाल कप में पियोगे या नीले कप में?" इससे बच्चे को लगता है कि उसकी पसंद मायने रखती है और वह खुशी-खुशी आपकी बात मान जाता है।
दूर से चिल्लाने के बजाय पास जाकर करें बात
जब बच्चा टीवी देख रहा हो या खेल में मगन हो, तो दूसरे कमरे से आवाज लगाने का कोई फायदा नहीं होता। उसके पास जाएं, उसकी आंखों में देखें और बहुत ही शांत आवाज में अपनी बात कहें। आपकी शांत आवाज और आंखों का संपर्क, आपकी डांट से कहीं ज्यादा गहरा असर डालता है।
नियमों को बहुत स्पष्ट रखें
बच्चों को यह साफ-साफ पता होना चाहिए कि आप उनसे क्या उम्मीद कर रहे हैं। "बदमाशी मत करो" या "अच्छे बच्चे बनो" जैसी बातें बच्चों को समझ नहीं आतीं। इसकी जगह साफ तौर पर बताएं, जैसे- "बेटा, खिलौनों से खेलने के बाद उन्हें वापस बॉक्स में रखना है।" नियम जितने सीधे होंगे, बच्चा उतनी आसानी से उन्हें मानेगा।
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उनके अच्छे व्यवहार की दिल खोलकर तारीफ करें
हम अक्सर बच्चों की गलतियों पर तो तुरंत टोक देते हैं, लेकिन उनके अच्छे कामों को नजरअंदाज कर देते हैं। जब बच्चा बिना कहे अपनी प्लेट किचन में रखे या किसी की मदद करे, तो उसकी खूब तारीफ करें। उसे बताएं कि आपको उस पर गर्व है। इससे उसे समझ आएगा कि अच्छे काम करने से सबका प्यार मिलता है।
हर बात पर 'नहीं' कहने की आदत बदलें
अगर आप दिन भर बच्चे को हर बात के लिए 'ये मत करो', 'वो मत छुओ' कहेंगे, तो वह आपकी बातों को अनसुना करना सीख जाएगा। 'नहीं' शब्द का इस्तेमाल सिर्फ तभी करें जब कोई असली खतरा हो। बाकी समय सकारात्मक शब्दों का इस्तेमाल करें। जैसे "गंदे जूतों के साथ सोफे पर मत चढ़ो" की जगह कहें "बेटा, सोफे पर बैठने से पहले अपने जूते उतार लो।"
आप खुद उनके लिए एक अच्छा उदाहरण बनें
बच्चे आपके भाषण सुनकर नहीं, बल्कि आपको देखकर सीखते हैं। अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा फोन कम देखे, जोर से चिल्लाकर बात न करे या अपना सामान सही जगह पर रखे, तो आपको भी अपनी ये आदतें सुधारनी होंगी। जैसा व्यवहार आप खुद करेंगे, आपका बच्चा बिल्कुल वैसी ही नकल करेगा।
बच्चों को सही रास्ता दिखाना एक दिन का काम नहीं है, इसमें बहुत सारा प्यार और धैर्य लगता है। डांट-डपट छोड़कर इन तरीकों को अपनाएं, आप खुद देखेंगे कि आपका बच्चा कितनी जल्दी समझदार हो रहा है।
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