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    'क्लॉक इट', 'सस' और 'रिज'... आप भी नहीं समझ पाते Gen-Z की ये सीक्रेट भाषा? यहां दूर करें अपना कन्फ्यूजन

    Updated: Sun, 12 Jul 2026 10:04 AM (IST)

    आज डिजिटल युग में इंटरनेट मीडिया पर खूब प्रचलित हैं जेन-जी के अपने वाक्य, शब्दावली। नई पीढ़ी तो इन्हें खूब समझती है मगर उनके माता-पिता को इसकी जानकारी ...और पढ़ें

    बच्चे ने कहा 'क्लॉक इट' और आप रह गए हैरान? (AI Generated Image)

    बच्चे ने कहा 'क्लॉक इट' और आप रह गए हैरान? (AI Generated Image)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। प्राइवेट फर्म में काम कर रही सुनैना आफिस से घर लौटकर आईं और आते ही बेटी को कुछ जरूरी बातें बताने लगीं। थोड़ी देर सुनने के बाद बेटी ने बात पर सहमति जताने का भाव चेहरे पर लाकर अंगूठे और पहली अंगुली की मुद्रा बनाई और तीन-चार बार आपस में टकराकर कहा- 'क्लॉक इट मम्मा!' सुनैना को यह तो समझ आया कि बिटिया ने बात सुनकर सहमति जताई है, मगर हाथों की मुद्रा और 'क्लॉक इट' से थोड़ी हक्की-बक्की रह गई। 

    बेटी से पूछा तो वो बस मुस्कुराई और उठकर बाहर चली गई। फोन की मदद से पता चला कि असल में बेटी को सुनैना की बात से सहमति ही है, बस आजकल प्रचलित तरीके से उसने यह सहमति दिखाई। 

    आज के डिजिटल युग में जेन-जी ने इंटरनेट और इंटरनेट मीडिया संस्कृति से पैदा हुई अपनी एक अलग शब्दावली और वाक्यांश तैयार कर लिए हैं। क्लॉक इट, सस से लेकर औरा फार्मिंग जैसे शब्दों के साथ यह पीढ़ी ऐसी भाषा बोलती है जिसके मायने बिल्कुल नए हैं। नए फ्रेज, शार्टकट और इमोजी की भाषा समझने वाली इस पीढ़ी के साथ माता-पिता कैसे बनाएं सामंजस्य और दूर करें उनके बीच आया कम्युनिकेशन गैप, बता रही हैं पैरेंटिंग कोच पल्लवी राव चतुर्वेदी।

    जहां एक तरफ किशोर इस स्लैंग और शब्दावली का सहजता से इस्तेमाल करते हैं, वहीं अधिकांश माता-पिता इससे पूरी तरह अनजान हैं। कई पैरेंट्स व्हाट्सएप जैसे प्लेटफार्म पर अपने बच्चों से दिल खोलकर बात करना चाहते हैं, लेकिन ये अनजाने शब्द एक अनजानी दीवार खड़ी कर देते हैं, जिससे बातचीत में दूरी आ जाती है।

    हर पीढ़ी की अपनी भाषा

    अक्सर माता-पिता बच्चों की इस नई भाषा को देखकर असहज या परेशान हो जाते हैं, लेकिन असल में जनरेशनल स्लैंग या फ्रेजेज का होना कोई नई बात नहीं है। हर पीढ़ी का अपना एक खास स्लैंग रहा है, जो उस समय के ट्रेंड्स और पापुलर कल्चर को दर्शाता है। इसलिए, जेन-जी ऐसी अनोखी भाषा का इस्तेमाल करने वाली पहली पीढ़ी नहीं है। 

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    पैरेंट्स को इसे सामान्य बदलाव के रूप में देखना चाहिए। बच्चों की इस नई शब्दावली से माता-पिता को खुद को उपेक्षित या अलग-थलग महसूस करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। पैरेंट्स को यहां थोड़ी मैच्योरिटी दिखानी होगी। 

    यह समझने की जरूरत है कि पूरी की पूरी भाषा नहीं बदल रही है, बल्कि सिर्फ कुछ 'कैच फ्रेजेस' बदले हैं। भाषा हमेशा विकसित होती रहती है। यहां तक कि आक्सफोर्ड डिक्शनरी में भी हर साल नए शब्द सिर्फ इसलिए जोड़े जाते हैं क्योंकि वे समाज का हिस्सा बन जाते हैं।

    जबरन इस्तेमाल से बचें

    बच्चों के करीब आने के लिए क्या पैरेंट्स को भी इन स्लैंग्स का इस्तेमाल शुरू कर देना चाहिए? जवाब है- बिल्कुल नहीं। अगर पैरेंट्स बातचीत में जबरन इन शब्दों को शामिल करेंगे, तो बच्चों की नजर में वे सिर्फ 'क्रिंज' यानी अजीब लगेंगे। पैरेंट्स के लिए जरूरी यह है कि वे इन शब्दों के पीछे की भावना और इमोशन को समझें, न कि खुद भी वही भाषा बोलने लगें। 

    हां, अगर आपको उनकी शब्दावली समझनी है तो जरूरी नहीं कि आप हर बार बच्चों से ही जाकर पूछें। इंटरनेट पर ऐसे तमाम रिसोर्सेज उपलब्ध हैं जहां आप इन शब्दों के मायने सीख सकते हैं। इसके अलावा, जब बच्चे अच्छे मूड में हों, तो आप सीधे उनसे भी पूछ सकते हैं कि किसी खास शब्द का क्या मतलब है। इस तरह आप बच्चों से एक कदम आगे रहेंगे। 

    चाहे तकनीक हो या भाषा, पैरेंट्स के लिए समय के साथ अपडेट रहना बेहद जरूरी है। इसका मतलब है कि आपको थोड़ा जागरूक होना पड़ेगा, पैरेंटिंग कोचेस के विचार पढ़ने होंगे और मौजूदा ट्रेंड्स पर नजर रखनी होगी। जब आप पहले से इन चीजों के प्रति जागरूक रहते हैं, तो बच्चों के सामने असहज होने की नौबत नहीं आती और आपको उनके जीवन में क्या चल रहा है, इसका बेहतर अंदाजा रहता है।

    बना रहे भाषा का संतुलन

    कई बार पैरेंट्स को लगता है कि उन्हें भी बच्चों को अपने जमाने की भाषा, कहावतें या सांस्कृतिक शब्द सिखाने चाहिए ताकि संतुलन बना रहे, लेकिन असल में इसकी कोई खास जरूरत नहीं है। जो शब्द समय के साथ टिके रहे और आज के समय में स्वीकार कर लिए गए हैं, उन्हें बच्चे अपने आप ही सीख और अपना लेते हैं। 

    हमारा काम उन्हें बीते दौर की शब्दावली के लिए मजबूर करना नहीं, बल्कि उनके आज के दौर को बिना किसी पूर्वाग्रह के समझना है। आप अपनी भाषा को मजबूत रखेंगे तो बच्चे भी इन्हें अपना ही लेंगे।

    ये हैं जेन-जी के कुछ शब्द व इमोजी और उनके मतलब

    • नो कैप- मैं सच बोल रहा/रही हूं।
    • रिज- आकर्षित करने की क्षमता
    • स्कल इमोजी- मैं हंसते-हंसते मर गया
    • क्लाउन इमोजी- मूर्खतापूर्ण या किसी के पीछे पागल होना
    • सस- किसी व्यक्ति का अजीब व्यवहार
    • टी- गॉसिप
    • एट- कमाल कर दिया
    • क्लॉक इट- किसी बात को तुरंत पकड़ लेना
    • च्यूगी- आउटडेटेड या कूल दिखने की जरूरत से ज्यादा कोशिश करने वाला
    • गो टच ग्रास- ऑफलाइन होकर वास्तविक दुनिया में कुछ कर दिखाने का ताना