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    बारी बरसी खटन गया सी... क्या है इस मशहूर पंजाबी गीत की कहानी? मस्तीभरे बोलों में छिपी है गहरी बात

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 10:58 AM (IST)

    "बारी बरसी खटन गया सी..." - पंजाबी टप्पे की बस यह एक लाइन और शादी के पंडाल से लेकर नाइट क्लब के डांस फ्लोर तक का माहौल पूरी तरह बदल जाता है। ...और पढ़ें

    डीजे की जान 'बारी बरसी खटन गया सी' का आखिर मतलब क्या है? (Image Source: AI-Generated)

    डीजे की जान 'बारी बरसी खटन गया सी' का आखिर मतलब क्या है? (Image Source: AI-Generated)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। शादी का जश्न हो, डीजे बज रहा हो और 'बारी बरसी खटन गया सी...' ना बजे, ऐसा तो हो ही नहीं सकता। इस गाने में एक ऐसा जादू है जो शांत बैठे इंसान को भी डांस फ्लोर पर खींच लाता है।

    चाहे दोस्तों के साथ बारात में नाचना हो या दुल्हन की विदाई का वो मिला-जुला भावुक पल, यह गाना हर प्ले-लिस्ट की जान है, लेकिन, डीजे की बीट्स पर इस गाने पर झूमते हुए क्या आपने कभी सोचा है कि इन शब्दों का असल मायना क्या है?

    क्या आप जानते हैं कि इस गाने की बुनियाद में 12 साल की कड़ी मेहनत, अपनों से दूर रहने का दर्द और एक बेहद प्यारी-सी कहानी बुनी हुई है? आइए, आज पंजाब के 'पिंड' की कच्ची पगडंडियों से निकलकर क्लबों की शान बनने वाले इस शानदार लोकगीत के पीछे का राज जानते हैं।

    Bari Barsi song origin

    (Image Source: Pexels)

    'बारी बरसी खटन गया सी' का असल मतलब

    यह गाना पंजाब की 'बोली' और 'टप्पा' शैली में रचा गया एक बेहद पुराना और पारंपरिक लोकगीत है। पुराने समय में जब रोजगार के साधन कम थे, तब पंजाब के कई पुरुष पैसे कमाने के लिए सालों-साल अपने घर और गांव से दूर रहा करते थे।

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    इस गाने में 'बारी बरसी' का मतलब होता है '12 साल', और 'खटन गया सी' का अर्थ है 'कमाने के लिए गया था'। कुल मिलाकर यह लाइन उस शख्स के बारे में है, जो पूरे 12 साल तक अपने परिवार से दूर रहकर पैसे कमाता है और फिर लौटते हुए अपनों के लिए प्यार से कोई तोहफा लेकर आता है।

    सीधे-सादे बोलों में छिपी हैं गहरी भावनाएं

    इस लोकगीत के बोल भले ही बहुत आसान लगते हों, लेकिन इनके पीछे छुपे जज्बात बहुत मजबूत हैं। इस गाने की एक सबसे मशहूर पंक्ति है:

    "बारी बरसी खटन गया सी, खट के लियांदी लोई... सारी दुनिया देख लई मां, तेरे जेहा न कोई।"

    इन लाइनों का मतलब है, "मैं बारह साल बाहर कमाने गया था और वहां से लौटते वक्त एक 'लोई' यानी शॉल कमा कर लाया हूं। मां, मैंने सारी दुनिया घूम ली, लेकिन तुम्हारे जैसा मुझे कोई नहीं मिला।" यहां जो शॉल है, वह सिर्फ एक तोहफा नहीं है, बल्कि उस शख्स की सालों की मेहनत और परिवार के प्रति उसके समर्पण का प्रतीक है।

    खुशियों और जश्नों का अहम हिस्सा

    इस गाने की धुन इतनी साधारण और शब्द इतने आसान हैं कि यह तुरंत जुबान पर चढ़ जाता है। इसी खासियत ने इसे पंजाब के खेतों और चौपालों से निकालकर बड़े-बड़े उत्सवों और शादियों तक पहुंचा दिया।

    जब भी भांगड़ा या गिद्दा होता है, तो यह गाना उसमें एक अलग ही जान फूंक देता है। यह गीत सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं गाया जाता, बल्कि यह लोगों को एक साथ लाने और मिलकर खुशियां बांटने का भी एक जरिया बन चुका है।

    Punjabi folk song Bari Barsi

    (Image Source: Pexels)

    गांवों से लेकर बड़े शहरों के पब तक का सफर

    एक वक्त था जब यह गीत सिर्फ पंजाब के गांवों तक ही सीमित था, लेकिन आज के दौर में यह बड़े शहरों के महंगे पब और डांस फ्लोर पर भी जमकर बजता है।

    इसे नई पीढ़ी के बीच लोकप्रिय बनाने में बॉलीवुड का बड़ा हाथ रहा है। 2010 में आई फिल्म 'बैंड बाजा बारात' में संगीतकार सलीम-सुलेमान ने इस गाने को एक ऐसा मॉडर्न और बेहतरीन टच दिया कि यह हर तरफ छा गया। इस फिल्म के बाद से ही यह गाना युवाओं की पार्टियों और क्लबों की शान बन गया, और आज भी लोगों को उसी उत्साह के साथ नचाता है।

    Punjabi Boli Bari Barsi history

    (Image Source: Pexels)

    एक ऐसी धुन जो कभी पुरानी नहीं हुई

    आज भले ही दुनिया बहुत मॉडर्न हो गई है और तौर-तरीके बदल गए हैं, लेकिन 'बारी बरसी खटन गया सी' जैसी लोक धुनें हमें हमेशा अपनी जड़ों से जोड़कर रखती हैं। यह गीत हमें बताता है कि अपनों के लिए की गई मेहनत और उनके प्यार की अहमियत कभी कम नहीं होती। चाहे किसी गांव का आंगन हो या शहर का हाई-प्रोफाइल क्लब, यह धुन हमेशा ऐसे ही लोगों को थिरकाती रहेगी।

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