सदियों तक सिर्फ बेटों के लिए गाए जाते थे सोहर, फिर एक गायिका ने हमेशा के लिए बदल दी परंपरा; दिलचस्प है कहानी
काफी लंबे समय तक सोहर सिर्फ बेटों के जन्म के अवसर पर गाया जाता था। इस परंपरा को तोड़ते हुए मालिनी अवस्थी ने बेटियों के लिए सोहर लिखा।
-1785069239473_m.webp)
बेटियों के जन्म के लिए खास सोहर (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में जन्म से लेकर मृत्यु तक, हर मौके के लिए एक लोकगीत हैं। बिहार और उत्तर प्रदेश में बच्चे के जन्म के अवसर पर गाए जाने वाले लोकगीत को सोहर कहा जाता है। बच्चे के जन्म के अवसर पर महिलाएं “जुग-जुग जीय सु ललनवा…” जैसे कई सोहर गाती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सोहर सिर्फ बेटों के जन्म पर गाया जाता था?
जी हां, सोहर काफी समय तक सिर्फ बेटे के जन्म पर गाए जाते थे। इसलिए उनमें ललनवा और बबुआ जैसे शब्दों का इस्तेमाल होता था, जो बेटों को कहा जाता है। इसी तरह सोहर में श्री राम या भगवान कृष्ण के जन्म का जिक्र किया जाता था और मां को कौशल्या या यशोदा कहकर बधाई दी जाती थी। हालांकि, एक गायिका ऐसी हैं, जिन्होंने बेटी के जन्म पर सोहर लिखा और आज वह सोहर काफी मशहूर है। आइए जानें इस बारे में।
बेटी के लिए लिखा सोहर
मशहूर लोकगायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने एक ऐसा सोहर लिखा और उसे अपनी आवाज दी, जो आज बेटियों के जन्म पर खूब गाया जाता है। कहानी कुछ ऐसी है कि जब उनकी बेटी का जन्म हुआ, तो उन्होंने महसूस किया कि बेटियों के जन्म पर गाए जाने वाले सोहर न के बराबर हैं। इसलिए उन्होंने माता सीता के जन्म से जोड़कर एक सोहर लिखा।
सिया को जन्म भयो
इस सोहर के बोल हैं- "मिथिला मगन भई आज, सिया को जन्म भयो…"। इस सोहर में सीता जी के जन्म पर राजा जनक और देवी सुनैना की खुशी को बयां किया गया है। अपनी बेटी के जन्म से वे दोनों इतने खुश हैं कि राजा जनक मोहरे बांट रहे हैं और गायें दान कर रहे हैं और रानी सुनैना पलना झुलाकर अपनी बेटी को निहार रही हैं। इनकी खुशी को कोई ठिकाना नहीं है। पूरा जनकपुर सीता जी के जन्म से झूम उठा है और खुशियां मना रहा है। इस सोहर का एक-एक शब्द बेहद भावुक है। साथ ही, इसकी धुन भी इतनी प्यारी है कि लोगों ने इसे खूब पसंद किया।
क्यों इतने खास होते हैं सोहर?
सोहर भारतीय मंगल गीतों में काफी महत्व रखता है और माना जाता है कि श्री राम और भगवान कृष्ण के जन्म के समय गाए गए गीतों से सोहर की शुरुआत हुई थी। ढोलक की थाप पर महिलाएं एक साथ मिलकर सोहर गाती हैं और गीतों के जरिए नई मां को बधाई और नवजात को आशीर्वाद देती हैं।
सोहर में नवजात के लिए प्रेम, मां की पीड़ा और परिवार की खुशी का जिक्र भी मिलता है। साथ ही, इसमें सास-बहु, ननद-भैजाई और पति-पत्नी के बीच की मीठी नोंक-झोंक और नेग की मांग को भी बयां किया जाता है।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।