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    जब देखूं मैं तेरी लाल-पीली अंखियां...शाहिद कपूर का यह हिट सॉन्ग असल में है राजस्थानी लोकगीत, सदियों पुराना है इतिहास

    Updated: Fri, 03 Jul 2026 12:21 PM (IST)

    बॉलीवुड में कई ऐसे गाने हैं, जो असल में क्षेत्रीय लोकगीत हैं और फिल्मों में आने के बाद लोकप्रिय हुए हैं। शाहिद कपूर और कृति सेनन की फिल्म का गाना 'जब ...और पढ़ें

    शाहिद और कृति का सुपरहिट गाना एक पुराना राजस्थानी लोकगीत है (Picture Credit- AI Generated)

    शाहिद और कृति का सुपरहिट गाना एक पुराना राजस्थानी लोकगीत है (Picture Credit- AI Generated)

    HighLights

    1. शाहिद-कृति का गाना 'लाल पीला अंखियां' राजस्थानी लोकगीत है

    2. यह गीत सदियों से राजस्थानी शादियों में गाया जाता रहा है

    3. मंगणियार समुदाय ने इस पारंपरिक गीत को जीवित रखा है

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। राजस्थान की कला और संस्कृति हमेशा से ही लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करती आई है। यही वजह है कि सदियों से बड़े पर्दे पर इसकी झलक भी देखने को मिलती रही है। राजस्थान की कहानियों के साथ-साथ यहां के गाने भी कई फिल्मों में इस्तेमाल हुए हैं। 

    यहां के कुछ लोकगीत ऐसे भी हैं, जो बड़े पर्दे का हिस्सा बने और फिर देखते ही देखते पूरे देश में मशहूर हो गए। ऐसा ही एक गाना शाहिद कपूर और कृति सेनन की फिल्म का है, जो बड़े पर्दे पर आते ही देशभर में मशहूर हो गया है। आइए जानते हैं इस गाने के बारे में विस्तार से- 

    राजस्थान की जमीन से जुड़ा गीत

    आप सभी ने शाहिद और कृति सेनन की फिल्म का मशहूर डांसिंग सॉन्ग “जब देखूं मैं तेरी लाल पीला अंखियां” खूब सुना होगा। फिल्म के इस गाने को सुनकर सबने इसकी खूब तारीफ भी की होगी, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह गाना असल में राजस्थान की जमीन से जुड़ा हुआ है। जी हां, यह गाना असल में एक पुराना राजस्थानी लोकगीत है, जो यहां सदियों से गाया जा रहा है।

    क्या है इस गीत का इतिहास?

    बड़े पर्दे या इंस्टाग्राम रील्स पर आने से बहुत पहले, "लाल पीली अखियां" राजस्थान का एक बहुत पसंद किया जाने वाला पारंपरिक लोकगीत था। यह गीत मुख्य रूप से राजस्थानी और राजपूत लोक-संस्कृति में, शादियों के दौरान "बन्ना-बन्नी" के रूप में गाया जाता है। फिल्म के गाने के विपरीत इस गाने के ओरिजिनल बोल कुछ इस तरह हैं- "जब देखूं बन्ना री लाल पीली अखियां, मैं कोनी चालू-सा भले ही काढ़ो अखियां"। 

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    क्या है बोल का मतलब?

    असली लोकगीत के बोल काफी मजाकिया और छेड़छाड़ भरे हैं। गीत में इस्तेमाल हुए बोल का मतलब है- "जब भी मैं अपने दूल्हे को देखती हूं, तो वह मुझे लाल-पीली आंखें (गुस्सा, एटीट्यूड या 'टशन' दिखाने का एक तरीका) दिखाता है, लेकिन मैं उसके साथ नहीं चलूंगी, चाहे वह कितना भी एटीट्यूड दिखाए!"

    सदियों से गाया जा रहा यह गीत

    यह गीत कई पीढ़ियों से रेगिस्तान के पारंपरिक लोक संगीत का हिस्सा बना हुआ है। इस गीत को यहां के लोक कलाकार समुदाय मंगणियार ने आज तक जिंदा रखा हुआ है। यह मारवाड़ी शादियों का एक अहम हिस्सा रहा है, जिसे मामे खान, जलाल खान और अनगिनत स्थानीय गायकों ने अपनी आवाज दी है। 

    फिल्मी पर्दे ने दिया नया रूप

    इस पारंपरिक गीत की लय ढोलक, खड़ताल और हारमोनियम जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों से बनती है, लेकिन बदलते समय के साथ इस गाने को लोगों के सामने नए तरीके से पेश किया। साल 2024 में शाहिद कूपर और कृति सेनन की फिल्म तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया में इस गाने को नए लिरिक्स के साथ एक जबरदस्त, हाई-टेक नया रूप दिया गया।