यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 01, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
बेहद खौफनाक तरीके से अपनों का अंतिम संस्कार करती थी यह जनजाति, जानेंगे तो कांप उठेगी रूह
पापुआ न्यू गिनी के घने जंगलों में रहने वाली फोर जनजाति (Fore Tribe) अपने अजीबोगरीब रिवाज के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है। यहां के लोग मानते थे कि ...और पढ़ें

HighLights
- दुनिया में ऐसी कई जनजातियां हैं जिनके रीति-रिवाज हैरत में डाल देते हैं।
- मरे हुए रिश्तेदारों का दिमाग खाकर यह लोग पूर्वजों को सम्मान देते हैं।
- महिलाएं मृतक का दिमाग खा जाती थीं, तो पुरुष पित्ताशय छोड़कर बाकी शरीर।
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। पापुआ न्यू गिनी के पूर्वी इलाकों में रहने वाली फोर जनजाति (Fore Tribe), अपने अनोखे रीति-रिवाजों के लिए काफी प्रसिद्ध थी। यह जनजाति अकेले रहना पसंद करती थी और अपने अनोखे लाइफस्टाइल के लिए जानी जाती थी। हालांकि, फोर जनजाति के इतिहास में एक ऐसा अध्याय भी है जो बेहद भयानक और दिल दहलाने वाला है।
दरअसल, इस जनजाति में नरभक्षण की प्रथा प्रचलित थी। वे न केवल इंसानी मांस खाते थे बल्कि मरे हुए लोगों के दिमाग को भी भोजन मानते थे। इस अजीबोगरीब प्रथा (Human Brain Eating Tradition) के कारण इस जनजाति में कई तरह की बीमारियां फैल गईं।
आपने अक्सर फिल्मों में महामानवों के बारे में सुना होगा, जो अलौकिक शक्तियों से संपन्न होते हैं। हालांकि, फोर जनजाति के लोग महामानव इसलिए कहलाते थे क्योंकि उन्होंने इंसानी मांस खाने के बावजूद एक अद्भुत क्षमता विकसित कर ली थी। इस जनजाति के लोगों के शरीर में एक ऐसी इम्युनिटी विकसित हो गई थी जो उन्हें ब्रेन से जुड़ी गंभीर बीमारियों से बचाती थी। यह क्षमता इतनी खास थी कि वैज्ञानिकों के लिए यह आज भी एक रहस्य बना हुआ है।

फोर जनजाति की दिल दहलाने वाली परंपरा
साल 2015 में वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, फोर जनजाति में एक दिल दहलाने वाली परंपरा थी। जब कोई व्यक्ति मरता था, तो वे मृतक को श्रद्धांजलि देने के लिए उनका मांस खाते थे। इस प्रथा में, महिलाएं और बच्चे मृतक का दिमाग खाते थे, जबकि पुरुष बचे हुए शरीर का मांस खाते थे। बता दें, दिमाग में एक खतरनाक प्रकार का अणु होता है जो इस प्रथा के कारण महिलाओं के शरीर में प्रवेश कर जाता था। इस अणु ने 'कुरु' नामक एक भयानक बीमारी का कारण बना, जिसने शुरुआत में जनजाति के लगभग 2% लोगों की जान ले ली।
खबरें और भी
यह भी पढ़ें- दुनिया की सबसे खूंखार जनजाति, जहां जवान होते ही काट देते हैं महिलाओं के होंठ; वजह जानकर चौंक जाएंगे आप
ऐसे करते थे अंतिम संस्कार
फोर जनजाति के किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती थी, तो लोग एक खास तरह का जश्न मनाते थे। इस जश्न में, वे मृत व्यक्ति के मांस को खाते थे। महिलाएं मृत व्यक्ति का दिमाग खाती थीं। वे ऐसा अपने मृत रिश्तेदार का सम्मान करने के लिए करते थे।
यह जनजाति मानती थी कि अगर वे मृत व्यक्ति को जमीन में गाड़ देंगे या कहीं छोड़ देंगे, तो कीड़े उसका शरीर खा जाएंगे। उन्हें लगता था कि अगर उनके प्यारे लोग ही मृत व्यक्ति के शरीर को खा जाएंगे तो यह बेहतर होगा। वे मृत व्यक्ति का पित्ताशय छोड़ देते थे, लेकिन उसके शरीर के बाकी हिस्सों का मांस भूनकर खा जाते थे।
फैल गई थी घातक बीमारी
पापुआ न्यू गिनी में रहने वाले कुछ लोगों को एक बहुत ही खतरनाक बीमारी हो गई थी। ये बीमारी न्यू गिनी के डॉक्टरों ने पाई थी। इस बीमारी की वजह से लोग चल नहीं पाते थे, खाना नहीं खा पाते थे और धीरे-धीरे बहुत कमजोर हो जाते थे। आखिरकार, वे इस बीमारी से मर जाते थे। इस जनजाति ने इस बीमारी को 'कुरु' नाम दिया था, जिसका मतलब होता है 'डर से कांपना'। इस बीमारी की वजह से इस जनजाति के लगभग 2% लोग मर गए थे। बाद में वैज्ञानिकों ने पता लगाया कि कुरु बीमारी एक खास तरह के प्रोटीन की वजह से होती है, जिसे प्रियन (Prions) कहते हैं। ये प्रोटीन बहुत ही खास होते हैं, ये खुद को बढ़ा सकते हैं और दूसरे लोगों में भी फैल सकते हैं।