आज हर Gen-Z की जुबान पर हैं 'Slay' और 'Yass', लेकिन क्या आपको पता है कहां से आए ये अतरंगी शब्द?
Gen-Z के बीच लोकप्रिय 'Slay', 'Yass' जैसे शब्दों की जड़ें इंटरनेट में नहीं, बल्कि ड्रैग और बॉलरूम कल्चर के इतिहास में छिपी हैं।

Slay, Yass, Tea और Gagged… Gen-Z की जुबान में घुले ये शब्द आखिर आए कहां से? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के दौर में सोशल मीडिया पर Gen-Z के बीच 'स्ले' (Slay), 'यास' (Yass), 'टी' (Tea) और 'गैग्ड' (Gagged) जैसे शब्दों का खूब चलन है। अक्सर इन शब्दों को सुनकर लगता है कि ये बस इंटरनेट की देन हैं, लेकिन सच्चाई कुछ और ही है।
असल में, इन ट्रेंडी शब्दों की जड़ें 'ड्रैग कल्चर' और 'बॉलरूम कल्चर' के इतिहास से गहराई से जुड़ी हुई हैं, जहां से निकलकर ये आज हमारी आम बोलचाल का हिस्सा बन गए हैं।
क्या होता है ड्रैग कल्चर?
ड्रैग कल्चर खुद को व्यक्त करने का एक बेहद आकर्षक तरीका है। इसके तहत लोग स्टेज पर शानदार मेकअप, बेहतरीन कपड़ों और अलग हेयरस्टाइल के साथ परफॉर्मेंस देते हैं। बता दें, जब कोई पुरुष महिलाओं के रूप में सज-धजकर परफॉर्म करता है, तो उसे 'ड्रैग क्वीन' (Drag Queen) कहा जाता है। ठीक इसी तरह, जब कोई महिला पुरुषों के गेटअप में अपनी कला दिखाती है, तो वो 'ड्रैग किंग' (Drag King) कहलाती है। यह कला सिर्फ रूप बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी प्रतिभा को पूरी आजादी के साथ मंच पर उतारने का नाम है।

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थिएटर से हुई थी 'ड्रैग' की शुरुआत
इतिहास के पन्ने पलटें, तो 'ड्रैग' शब्द का जिक्र 1870 के दशक से मिलता है। उस समय थिएटर में काम करने वाले उन पुरुष अभिनेताओं के लिए इस शब्द का इस्तेमाल होता था, जो नाटकों में महिलाओं के किरदार निभाते थे और उनके कपड़े पहनते थे। उस जमाने में यह एक आम बात थी, जो समय के साथ एक पूरी तरह से नई और स्वतंत्र कला, यानी ड्रैग कल्चर में तब्दील हो गई।
'बॉलरूम' बना था सोशल सपोर्ट
इन शब्दों के जन्म में 1960 और 70 के दशक में न्यूयॉर्क में पनपे 'बॉलरूम कल्चर' की भी अहम भूमिका है। उस दौरान LGBTQ+ कम्युनिटी के अश्वेत और लातीनी लोगों ने अपनी कला को दुनिया के सामने रखने के लिए 'ड्रैग बॉल्स' की शुरुआत की।
यहां डांस, मेकअप और फैशन के जोरदार मुकाबले होते थे। खास बात यह थी कि इन बॉलरूम्स में हिस्सा लेने वाली टीमों को 'हाउस' कहा जाता था। ये हाउस सिर्फ एक टीम नहीं, बल्कि कलाकारों के लिए उनका अपना चुना हुआ परिवार होते थे, जहां उन्हें सामाजिक सहारा और एक-दूसरे का साथ मिलता था।
Gen Z के पसंदीदा शब्दों का असल मतलब
ड्रैग और बॉलरूम की दुनिया से निकले ये शब्द अब इंटरनेट की भाषा बन चुके हैं। आइए जानते हैं कि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले इन शब्दों के असल मायने क्या हैं:
- Slay: जब कोई किसी काम को बहुत ही परफेक्शन और शानदार तरीके से अंजाम देता है।
- Yass: अत्यधिक खुशी जताना या किसी की बहुत ही उत्साह के साथ तारीफ करना।
- Tea: 'टी' का मतलब चाय नहीं, बल्कि किसी की मसालेदार गॉसिप या अंदर की खबर से है।
- Shade: किसी को सीधे तौर पर कुछ न कहकर, इशारों-इशारों में ताना मारना।
- Gagged: किसी बात या चीज को देखकर पूरी तरह से दंग रह जाना।
- Face Card: किसी व्यक्ति के शानदार लुक्स और सुंदरता की दिल खोलकर तारीफ करना।
- No Notes: किसी काम या चीज का इतना बेहतरीन होना कि उसमें सुधार की कोई गुंजाइश ही न बचे।
इस तरह, आज इंटरनेट पर वायरल होने वाले ये शब्द सिर्फ आज के युवाओं की उपज नहीं हैं, बल्कि ये एक पूरे समुदाय के लंबे इतिहास, कला और उनकी पहचान की दास्तान सुनाते हैं।
