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    आपको भी पसंद आई विक्रांत मैसी की 'मुसाफिर कैफे', तो हिंदी साहित्य की ये 5 किताबें आपका दिल जीत लेंगी

    Updated: Tue, 28 Jul 2026 11:55 AM (IST)

    मुसाफिर कैफे सीरीज दिव्य प्रकाश दुबे के उपन्यास पर आधारित है। हिंदी साहित्य में इस कहानी जैसे और भी कई खूबसूरत उपन्यास हैं। ...और पढ़ें

    हिंदी साहित्य की ये किताबें जरूर पढ़ें (Picture Courtesy: Instagram)

    हिंदी साहित्य की ये किताबें जरूर पढ़ें (Picture Courtesy: Instagram)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हाल ही में रिलीज हुई वेब सीरीज मुसाफिर कैफे काफी चर्चा में बनी हुई है। विक्रांत मैसी, महिमा मकवाना और वेदिका पिंटो इसमें लीड रोल निभा रहे हैं। आपको बता दें कि ये सीरीज मशहूर लेखक दिव्य प्रकाश दुबे की किताब मुसाफिर कैफे पर आधारित है। 

    इस कहानी में चंदर, सुधा और प्रीति का लव ट्रायएंगल दिखाया गया है, जिसे दर्शक खूब पसंद कर रहे हैं और जो किताबें पढ़ते हैं और अगर उन्होंने मुसाफिर कैफे पढ़ी है, तो वे जानते हैं कि दिव्य प्रकाश दुबे ने कितनी खूबसूरती से इस कहानी को शब्दों में उतारा है। प्यार, करियर और रिश्तों के बीच की उलझनों से भरी इस कहानी से युवा काफी कनेक्ट करते हैं। अगर आपको मुसाफिर कैफे की कहानी पसंद आई है, तो हिंदी साहित्य की ये किताबें आपकी रीडिंग लिस्ट में जरूर होनी चाहिए।

    दीवार में एक खिड़की रहती थी- विनोद कुमार शुक्ल

    अगर आपको मुसाफिर कैफे का सादा मिजाज, संजीदा संवाद और किरदारों का ठहराव पसंद आया है, तो विनोद कुमार शुक्ल जी की दीवार में एक खिड़की रहती थी, जरूर पढ़नी चाहिए। इस किताब के लिए विनोद कुमार शुक्ल जी को साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया था। इस कहानी को बहुत ही सादगी के साथ लिखा गया है और रोजमर्री की जिंदगी में छुपे सुकून और भावनाओं को बहुत ही खूबसूरती से पेश किया गया है। इस कहानी में आप रघुवर प्रसाद और सोनसी के जीवन की बहुत खूबसूरत झलक का अनुभव कर सकते हैं। 

    Deewar me ek khidki rhti thi

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    अक्टूबर जंक्शन- दिव्य प्रकाश दुबे

    मुसाफिर कैफे के बाद आपको दिव्य प्रकाश दुबे जी की ही दूसरी किताब अक्टूबर जंक्शन भी पढ़नी चाहिए। कहानी और लेखन का अंदाज काफी दिलचस्प है, जो आपको किताब के अंत तक बांधकर रखती है। ये कहानी है चित्रा और सुदीप की, जो हर साल 10 अक्टूबर को एक तय शहर में मिलते हैं और अपने जीवन के बारे में बात करते हैं। इस कहानी में शहरी जीवन की तन्हाई, अधूरेपन और रिश्तों का कमाल का ताना-बाना बुना गया है। 

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    October Junction

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    गुनाहों का देवता- धर्मवीर भारती

    हिंदी साहित्य की सबसे कालजयी रचनाओं की बात करें, तो गुनाहों का देवता का नाम जरूर आता है। धर्मवीर भारती जी का लिखा ये उपन्यास सुधा, चंदर और बिंती की कहानी पर आधारित है। इस कहानी के मुख्य किरदारों के नाम पर ही मुसाफिर कैफे के भी मुख्य किरदारों के नाम रखे गए हैं। जहां मुसाफिर कैफे प्यार के मॉडर्न पहलू को उजागर करती है, वहीं गुनाहों का देवता पहले के समय के त्याग और समर्पण पर ज्यादा फोकस करती है। ये किताब अपने आप में एक मास्टरपीस है। 

    Gunahon ka devta

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    यार पापा- दिव्य प्रकाश दुबे

    दिव्य प्रकाश दुबे जी की एक और किताब आपको जरूर पढ़नी चाहिए और वो है यार पापा। ये कहानी कोई लव स्टोरी नहीं है, बल्कि एक पिता-बेटी के रिश्ते पर आधारित है। इसमें मनोज और शाशा, जो बाप-बेटी हैं, के रिश्ते की गलतफहमियां, उलझनें और एक दोस्त बनने के सफर को बहुत ही खूबसूरती से लिखा गया है।

    yaar Papa

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    इब्नेबतूती- दिव्य प्रकाश दुबे

    ये किताब भी दिव्य प्रकाश दुबे जी की है, जो दोस्ती, परिवार और जिंदगी की उलझनों के बारे में लिखी गई है। ये कहानी राघव अवस्थी और शालू अवस्थी की है। कहानी दिलचस्प मोड़ तब लेती है, जब राघव अपनी सिंगल मां शालू के लिए एक लाइफ पार्टनर ढूंढ़ने निकलता है। इस कहानी में आपको मां-बेटे के रिश्ते, पुराने अधूरे रिश्तों की टीस और जिंदगी की उलझनों का बहुत खूबसूरत वर्णन मिलता है। 

    Ibnebatuti

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