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    बोरिंग नहीं, अब फैशन स्टेटमेंट बन रही हैं किताबें; लग्जरी ब्रांड्स के जरिए Gen-Z पर छाया 'बुक-फैशन' का क्रेज

    Updated: Mon, 27 Jul 2026 01:14 PM (GMT+05:30)

    किताबें अब बोरिंग नहीं, बल्कि Gen-Z के बीच एक नया फैशन ट्रेंड बन गई हैं, जिसे लग्जरी ब्रांड्स भी अपना रहे हैं। ...और पढ़ें

    अब सिर्फ ज्ञान का जरिया नहीं, 'स्टेटस सिंबल' भी बन गई हैं किताबें (Image Source: AI-Generated)

    अब सिर्फ ज्ञान का जरिया नहीं, 'स्टेटस सिंबल' भी बन गई हैं किताबें (Image Source: AI-Generated) 

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। एक वक्त था जब हर वक्त किताबें पढ़ने वालों को लोग 'बोरिंग' समझ लिया करते थे, लेकिन अब वक्त बदल गया है। आज के दौर में किताबें सिर्फ हॉबी या ज्ञान का जरिया नहीं रहीं, बल्कि यह एक नया फैशन और ट्रेंड बन चुकी हैं। Gen-Z में इन दिनों 'बुक-फैशन' का जबर्दस्त क्रेज देखने को मिल रहा है, जहां किताबें अब सिर्फ हाथों में नहीं, बल्कि महंगे कपड़ों और बैग्स के डिजाइन तक पहुंच गई हैं।

    Gen Z fashion trends

    (Image Source: AI-Generated) 

    फैशन की दुनिया में हुई किताबों की एंट्री

    किताबों का यह नया क्रेज इतना पॉपुलर हो रहा है कि दुनिया के दिग्गज फैशन ब्रांड्स भी इसे अपने प्रोडक्ट्स में शामिल कर रहे हैं।

    • डिऑर: इस प्रीमियम ब्रांड ने अपने बैग्स को एक नया लुक देने के लिए उन पर कुछ खास पुरानी किताबों के कवर प्रिंट करने शुरू कर दिए हैं।
    • कोच: इस ब्रांड ने मशहूर पब्लिशिंग कंपनी 'पेंगुइन' के साथ एक अनोखी साझेदारी की है। उन्होंने बैग्स पर सजाने के लिए ऐसे छोटे-छोटे शोपीस तैयार किए हैं, जिनमें मौजूद नन्ही किताबों को सचमुच पढ़ा भी जा सकता है।
    • शनेल और मियू मियू: ये लग्जरी ब्रांड्स अब सिर्फ फैशनेबल कपड़े नहीं बना रहे, बल्कि उन्होंने अपने खुद के 'बुक क्लब' भी शुरू कर दिए हैं।

    Gen-Z क्यों हो रहे हैं इस ट्रेंड के दीवाने?

    इस ट्रेंड के पीछे एक मनोवैज्ञानिक कारण छिपे हैं। आज की युवा पीढ़ी के लिए अपना खुद का घर खरीदना काफी मुश्किल हो गया है। ऐसे में, अपनी एक अलग पहचान दुनिया के सामने पेश करने के लिए वे खास तरह की किताबें और ऐसी ही दूसरी चीजें खरीदना पसंद करते हैं।

    जाहिर है कि पढ़ने की आदत से हमारी वैचारिक क्षमता और दूसरों की भावनाओं को समझने की शक्ति का विकास होता है, इसलिए यह ट्रेंड अच्छा माना जा रहा है।

    किताबें बन गई हैं नया 'स्टेटस सिंबल'

    इस 'बुक-फैशन' का एक दूसरा पहलू भी है। दरअसल, जब किताबों को सिर्फ घर सजाने या सुंदर दिखने की चीज बना दिया जाता है, तो हमारा पूरा ध्यान सिर्फ खरीदारी पर टिक जाता है। ढेर सारी महंगी और सुंदर किताबें घर में सजाने का सीधा अर्थ यही निकाला जाता है कि आपके पास खूब सारा पैसा है और घर में उन्हें सजाने के लिए बड़ी जगह भी। इस तरह यह अनजाने में ही अपना रुतबा और अमीरी दिखाने का एक जरिया बन जाता है।

    जब कंटेंट से ज्यादा सूरत पर हो ध्यान

    आजकल कई मशहूर हस्तियों के 'बुक क्लब' भी इस ट्रेंड को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। इसके जरिए वे उन लेखकों की किताबें प्रमोट करते हैं जिन्हें एक बड़े मंच की दरकार होती है।

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    बता दें, इस ट्रेंड ने इंटरनेट पर यह गलत धारणा फैला दी है कि जो चीज देखने में आकर्षक हो, सिर्फ वही शेयर करने लायक है। नतीजा यह है कि लोग किताब के अंदर क्या लिखा है, इसे समझने के बजाय पढ़ने वाले के रूप-रंग और दिखावे पर ज्यादा फोकस करने लगे हैं। इससे समाज में यह भ्रम पैदा हो सकता है कि इस फैशन ट्रेंड का हिस्सा बनने के लिए आपका सुंदर दिखना बहुत जरूरी है।

    दिखावे के बीच एक पॉजिटिव चेंज

    तमाम दिखावे और फैशन के बावजूद, सोशल मीडिया क्रिएटर्स मानते हैं कि छपे हुए शब्दों को सीधे पढ़ने का जो सुकून है, वह बेजोड़ है। इन दिनों रोमांस और फैंटेसी से जुड़ी किताबों की डिमांड ज्यादा है। कुल मिलाकर 'ट्रेंड' या 'फैशन' के बहाने ही सही, किताबें लोगों के हाथों में वापस आ रही हैं और इससे नए पाठक भी जुड़ रहे हैं, जो अच्छी बात है।

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