मोटापे के कारण कम हो जाते हैं नौकरी मिलने के चांस, पुरुषों के करियर को हो रहा है सबसे ज्यादा नुकसान
एक नई रिसर्च के अनुसार, मोटापा अब सिर्फ शारीरिक समस्या नहीं, बल्कि करियर के लिए भी खतरा बन गया है।

क्या मोटापे की वजह से खतरे में है आपकी नौकरी? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हम अक्सर सुनते आए हैं कि बढ़ता हुआ वजन कई बीमारियों जैसे डायबिटीज और हार्ट डिजीज की जड़ है। सेहत से जुड़े ये नुकसान तो हम सभी जानते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपका यही बढ़ा हुआ वजन आपकी नौकरी के लिए भी एक बड़ा खतरा बन सकता है?
हाल ही में हुई एक रिसर्च ने इस बात को साबित किया है कि मोटापा अब सिर्फ एक शारीरिक समस्या नहीं रहा, बल्कि यह लोगों के करियर और देश की अर्थव्यवस्था पर भी सीधा वार कर रहा है।

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क्या कहती है यह नई रिसर्च?
मेक्सिको में आयोजित 'इंटरनेशनल कांग्रेस ऑन ओबेसिटी' में एक बेहद अहम स्टडी पेश की गई। ब्रिटेन की 'यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क' के शोधकर्ता डॉ. अहरोन काट्ज और उनकी टीम ने लगभग 2 लाख 84 हजार लोगों के डेटा का गहराई से विश्लेषण किया। इस दौरान उन्होंने केवल लोगों के शरीर को नहीं देखा, बल्कि उनके बैकग्राउंड से जुड़े तमाम पहलुओं को परखा ताकि मोटापे के असली असर को सटीकता से समझा जा सके।
नतीजों में पाया गया कि सामान्य वजन वाले लोगों के मुकाबले, मोटापे का सामना कर रहे वयस्कों के पास नौकरी होने के चांस 4.2 प्रतिशत कम होते हैं। अगर ब्रिटेन के मौजूद रोजगार आंकड़ों को देखें, तो वहां करीब 6 लाख लोग ऐसे हैं जो किसी और वजह से नहीं, बल्कि केवल अपने ज्यादा वजन के कारण काम से दूर हैं।
मोटापे से नौकरी जाने का क्या कनेक्शन है?
आखिर बढ़ा हुआ वजन किसी को बेरोजगार कैसे बना सकता है? स्टडी में इसके मुख्य रूप से दो बड़े कारण सामने आए हैं:
- शारीरिक चुनौतियां: यह तो साफ है कि ज्यादा वजन होने से शरीर में दर्द, जल्दी थकान, चलने-फिरने में दिक्कत और नींद न आने जैसी परेशानियां आम हो जाती हैं। इसके साथ ही मोटापे से जुड़ी अन्य बीमारियां काम पर लगातार फोकस करना मुश्किल बना देती हैं।
- वर्कप्लेस पर भेदभाव: यह सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात है। नौकरी देने वाले अक्सर बिना किसी ठोस आधार के यह मान लेते हैं कि मोटापे से ग्रस्त लोग काम में कम फुर्तीले या कम सक्षम होते हैं। इस गलत और नकारात्मक धारणा के कारण लोगों को हायरिंग से लेकर प्रमोशन तक में भारी भेदभाव का सामना करना पड़ता है।
महिलाओं के मुकाबले पुरुषों पर पड़ रही है ज्यादा मार
शोध में एक हैरान करने वाला आंकड़ा भी सामने आया है। इस 'रोजगार संकट' का बुरा असर पुरुषों पर कहीं ज्यादा हो रहा है। जहां महिलाओं की नौकरी मिलने की संभावनाओं में मोटापे के कारण 2.1 की कमी आती है, वहीं पुरुषों के लिए यह नुकसान 6.6 का है। हालांकि, ऐसा क्यों हो रहा है इसके सटीक कारण अभी खोजे जाने बाकी हैं, लेकिन यह फासला अपने आप में बहुत बड़ा है।
अर्थव्यवस्था के लिए बज रही है खतरे की घंटी
स्थिति कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इंग्लैंड और वेल्स में काम करने की उम्र वाले एक-चौथाई वयस्क अब मोटापे के शिकार हैं। ब्रिटेन का रोजगार दर फिलहाल 75.5% है। ऐसे में मोटापे के कारण रोजगार में आने वाली जरा-सी गिरावट भी लाखों लोगों को प्रभावित करती है।
मोटापे की वजह से कर्मचारी ज्यादा बीमार पड़ते हैं, छुट्टियां ज्यादा लेते हैं, जिससे उनकी दिहाड़ी घटती है और काम की रफ्तार भी धीमी पड़ जाती है। ब्रिटेन की 'नेशनल हेल्थ सर्विस' पहले से ही मोटापे से जुड़ी बीमारियों पर हर साल अरबों रुपये खर्च कर रही है और काम का यह नुकसान इस आर्थिक बोझ को कई गुना बढ़ा रहा है।
क्या मेडिकल साइंस के पास है कोई रास्ता?
इस बड़ी समस्या से निपटने के लिए GLP-1 जैसी नई वजन घटाने वाली दवाइयों से काफी उम्मीदें बंध रही हैं। मैनचेस्टर में सरकार बकायदा एक ट्रायल कर रही है ताकि यह देखा जा सके कि क्या वजन घटाने वाली ये नई दवाएं लोगों को उनका रोजगार बचाए रखने या वापस काम पर लौटने में मदद कर सकती हैं।
एक्सपर्ट्स अब साफ तौर पर कह रहे हैं कि मोटापा सिर्फ खराब लाइफस्टाइल का नतीजा नहीं है, बल्कि यह एक क्रॉनिक डिजीज है। इसका इलाज सिर्फ 'कम खाओ या कसरत करो' कहने से नहीं होगा। इसके लिए लोगों को सही दवाइयों, बेहतर खान-पान और लंबे समय तक मेडिकल देखरेख की जरूरत है।
