नो मोर शो-ऑफ! अब Gen-Z अपना रहे हैं पैसे बचाने का नया पैंतरा, 'लो-बजटिंग' से ऐसे सीखें बचत का तरीका
महंगाई के जमाने में पैसे बचाना बड़ी चुनौती बन गई है, पर जेन-जी ने इसे भी पार लगा दिया।

जेन-जी लेकर आए सेविंग्स का नया तरीका (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आजकल लोगों से यह सवाल करो कि सबसे रोजमर्रा की जिंदगी को सबसे ज्यादा मुश्किल क्या बना रहा है तो उनका जवाब होता है बढ़ती महंगाई के बीच पैसे बचाना। अब इस बात से इनकार भी नहीं किया जा सकता कि चीजों के बढ़ते दाम लोगों की सेविंग्स पर भारी पड़ रहे हैं, ऐसे में जेन-जी ने खोज निकाला है बचत करने का एक नया तरीका लो-बजटिंग।
क्या है लो-बजटिंग?
जेन-जी के बीच इन दिनों ट्रेंड हो रहा लो-बजटिंग अपने बजट में रहने से है। यह हिन्दी मुहावरे जिनती चादर उतने पैर से थोड़ा मिलता-जुलता है क्योंकि इसमें व्यक्ति अपनी आर्थिक स्थिति को एकदम सामने रख देता है। इसका सीधा सा मतलब है कि उन चीजों को खरीदने से साफ इनकार कर देना, जिन्हें एफोर्ड नहीं कर सकते।
पहले लोग दूसरों से अपनी फिनेंशियल कंडीशन छिपाते थे और उन चीजों को भी खरीद लेते थे जिन्हें खरीद सकने में वो समर्थ नहीं, पर जेन-जी अपने खर्चों को लेकर बेबाक हो गए हैं।
लो-बजटिंग का तरीका काम कैसे करता है?
अपने बजट को लोगों के सामने पेश करने के लिए कुछ नहीं करना है, बस पैसों को लेकर ज्यादा से ज्यादा शिकायत करनी है। सामने वाले को यह साफ तौर पर जाहिर कर देना है कि फलाना चीज पैसों की तंगी की वजह से अभी नहीं खरीदी जा सकती।
इसमें व्यक्ति अपने बजट के लिए खुद को दोष नहीं देता, बल्कि वह ईकोनॉमी को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा रहा होता है। वह पेट्रोल, गैस या रोजमर्रा की चीजों की बढ़ते दामों को सेंटर में रखकर सरकार को महंगाई के लिए दोषी बताता है। इस तरह देखा जाए तो जेन-जी अपने खर्चों को लेकर एकदम ईमानदार और बेबाक हो गए हैं।
कैसे फॉलो करें?
अपने खर्चों को लेकर सामने वाले से खुलकर बात करें।
अगर कहीं घूमने का प्लान हो तो सच कहें कि आप खर्चे उठा पाने में सक्षम हैं पर ऐसा करना नहीं चाहते।
अपनी जरूरतों और शौक को अलग-अलग बांटकर केवल जरूरी चीजों पर ही खर्च करें।
कम बजट अब शर्म से ज्यादा उपलब्धि की बात
जेन-जी की बीच तेजी से बढ़ रहा यह ट्रेंड अब कम बजट को शर्म की बात नहीं मानता, वह इसे भविष्य की उपलब्धि की तौर पर इसे देखता है। यह लग्जरी लाइफस्टाइल को प्रोमोट करने के बजाय किफायती तौर पर जीना सिखाता है। मान लीजिए कि आप किसी होटल में खाना खाने गए तो वहां सभी लोगों का बिल चुकाने की जगह केवल अपने हिस्से का पैसा देना ही लो-बजटिंग है।
