क्या है सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा नया ट्रेंड ‘Laxmi Maxxing’, क्यों इंटरनेट पर इसे लेकर हो रहा विवाद?
सोशल मीडिया पर 'लक्ष्मी मैक्सिंग' ट्रेंड वायरल हो रहा है, जिसे लेकर भारत में विवाद छिड़ गया है।

क्या है लक्ष्मी मैक्सिंग? (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर हर दिन एक नया ट्रेंड देखनो को मिल जाता है। अपनी आदतें कैसे बदलें, ग्लो-अप कैसे करें, अपनी इच्छाओं को पूरा कैसे करें, जैसे मुद्दों पर अक्सर कोई इंफ्लूएंसर या कंटेंट क्रिएटर एक नया टर्म निकालता है और लोग उसे फॉलो करना शुरू कर देते हैं। हाल ही में, लक्ष्मी मैक्सिंग का ट्रेंड चल रहा है।
टिकटॉक और इंस्टाग्राम से शुरू हुआ ये ट्रेंड सुनने में इंडियन लग रहा है, लेकिन असल में इसकी शुरुआत वेस्ट में हुई है। ये सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है, लेकिन बाकी ट्रेंड्स की तरह इसे सिर्फ लोग फॉलो नहीं कर रहे, बल्कि भारत में इसे लेकर विवाद भी छिड़ गया है। आइए जानें लक्ष्मी मैक्सिंग ट्रेंड है क्या।
क्या है लक्ष्मी मैक्सिंग ट्रेंड?
लक्ष्मी मैक्सिंग की शुरुआत टिकटॉक और इंस्टाग्राम पर वेलनेस मेंटर और आयुर्वेदिक प्रैक्टिशनर लीसा पॉवर ने जुलाई में की थी। इन्हें ऑनलाइन वेल विच के नाम से भी जाना जाता है। इस ट्रेंड में हिंदू धर्म में धन, समृद्धि और सुंदरता की देवी मानी जाने वाली मां लक्ष्मी के सिद्धांतों को एक लाइफस्टाइल एस्थेटिक के रूप में अपनाया जा रहा है।
इंफ्लुएंसर्स मां लक्ष्मी की एनर्जी को अपने जीवन में उतारने की बात कर रहे हैं और उसके लिए अपनी लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव भी कर रहे हैं, जैसे- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठना, शरीर पर तेल से मालिश करना, सुबह उठकर तांबे के बर्तन में रखा पानी पीना, घर और आस-पास के माहौल को साफ रखना, धूप-दीप से घर में पॉजिटिव माहौल बनाना, अच्छे कपड़े पहनना, ग्रैटिट्यूड जाहिर करना आदि।
आसान भाषा में कहें, तो सदियों पुराने भारतीय सनातन और आयुर्वेदिक नियमों को अब सेल्फ-केयर और लक्ष्मी मैक्सिंग का नाम देकर सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है।
इस पर विवाद क्यों हो रहा है?
अब आप सोच रहे होंगे कि ये तो अच्छी बात है कि वेस्ट भी अब भारतीय संस्कृति को अपना रहा है, लेकिन विवाद की वजह कुछ और है। मां लक्ष्मी करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ी हैं। उनका कहना है कि इन्हें सिर्फ एस्थेटिक्स से जोड़कर देखना उनका अपमान है। एक तर्क ये भी रखा जा रहा है कि भारतीय प्रैक्टिस को वेस्ट फिर से नए नाम से पेश कर रहा है जैसा वो पहले कोल्हापुरी चप्पलों और स्टील की थालियों के साथ कर चुका है।
