15 में गौना और 20 में 'मैया-मैया' करता पति! इस अवधी लोकगीत में पत्नी करती है अपने पति की नासमझी का दर्द बयां
मालिनी अवस्थी का गाया लोकगीत सइंया मिले लरकैया... बेहद मजेदार है, जो मजाकिया तरीके से एक कुप्रथा पर तंज कसता है।

लोकगीत में बाल-विवाह का दर्द (Picture Courtesy: Facebook)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के लोकगीतों की बात करें, तो उसमें मालिनी अवस्थी का गाया एक गीत खास जगह रखता है। ये गीत है "सइंया मिले लरकैया, मैं का करूं?" इस गीत की धुन और लिरिक्स इतने कमाल के हैं कि सुनकर आप झूम उठें, लेकिन ये गीत और भी काफी कुछ कहता है।
अवधी भाषा में गाए गए इस लोकगीत के जरिए बाल विवाह पर करारा तंज कसा गया है, लेकिन ये गीत इतना मजेदार है कि पहली बार सुनकर आपको ऐसा लगेगा जैसे कोई हंसी-मजाक का गाना गाया जा रहा है। आइए जानें इस लोकगीत के बारे में।
कच्ची उम्र में पक्के रिश्तों का बोझ
इस गीत में एक नवविवाहित लड़की की परेशानी बयां की गई है, जिसका विवाह बहुत कम उम्र में कर दिया गया था। शादी के वक्त वो खुद तो छोटी थी हा, उसका पति भी बहुत छोटा और नादान था। इस गीत में हास्य और व्यंग्य के जरिए बताया गया है कि शादी जैसी बड़ी जिम्मेदारी की बेड़ियों में दो नासमझ बच्चों को बांध दिया जाता है, तो स्त्री के जीवन पर क्या असर पड़ता है और उसे किना भावनात्मक तालमेल की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
उम्र के पड़ाव और पति की नासमझी
इस गीत में लड़की की बढ़ती उम्र के साथ उसकी परेशानियों और उसके पति की नासमझी को बड़े ही मजेदार तरीके से बयां किया गया है। इस गीत में लड़की बताती है कि जब वो 12 साल की थी, तब उसका विवाह हुआ और उसका पति इतना छोटा था कि पइंया-पइंया यानी घुटनों के बल चलता था। यहां पइंया-पइंया चलने का इस्तेमाल पति की कम उम्र को बताने के लिए किया गया है।
फिर गाने में लड़की बताती है कि जब वो 15 साल की हुई तब उसका गौना हो गया। पहले के जमाने में शादी पहले होती थी और गौना यानी विदाई कुछ सालों बाद। अब उसका गौना हो गया है, लेकिन उसका पति अभी भी नासमझ ही है और जहां उसे शादी का मतलब समझ जाना चाहिए, वहां वो बच्चों की तरह पतंग उड़ाने में मस्त रहता था।
जब लड़की 16 साल की हुई, तब वह कहती है कि ये उसकी बाली उम्र है और वह अपने शादीशुदा रिश्ते में प्यार चाहती है, लेकिन उसका पति है कि उससे बांह छुड़ाता फिरता है और सिर्फ खेलने में लगा रहता है।
गाने में आगे लड़की बताती है कि अब वो 20 साल की हो चुकी है और एक वयस्क स्त्री बन चुकी है, लेकिन उसका पति अभी भी बच्चा ही है और दिनभर मैया-मैया करता रहता है यानी अपनी मां को बुलाता रहता है।
हंसी में बाल विवाह का दर्द
इस लोकगीत की सबसे बड़ी बात है कि इसमें हंसी-मजाक के अंदाज में इस कुप्रथा को उजागर किया गया है। लड़की का हंसते-मुस्कुराते हुए यह पूछना कि मैं क्या करूं, असल में दिखाता है कि वह कितनी असहाय है और अपने पति के साथ भावनात्मक तालमेल नहीं बैठा पा रही है।
फोक क्वीन ऑफ इंडिया
मालिनी अवस्थी ने अवधी, भोजपुरी, ब्रज और बुंदेलखंडी शैली में कई लोकगीत गाए हैं। अपनी आवाज, सुरों की सटीक समझ और भावों के जरिए वे हर गीत में नई जान डाल देती हैं। इन्हें फोक क्वीन ऑफ इंडिया भी कहा जाता है और कजरी, ठुमरी, सोहर, फाग और विवाह गीतों के जरिए उन्हें भारत को दुनियाभर में पहचान दिलाई है। इन्हें 2016 में पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया था।
