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13वीं सदी में अमीर खुसरो की लिखी एक कविता से बना ये सुपरहिट गाना, मिथुन चक्रवर्ती की फिल्म से हुआ मशहूर

Published: Mon, 24 Aug 2026 04:54 PM (IST)Updated: Sat, 29 Aug 2026 03:08 PM (IST)

मिथुन चक्रवर्ती की फिल्म गुलामी का गाना जिहाल-ए-मिस्किन 13वीं सदी की एक कविता से बना है।

एक कविता से बना गुलामी फिल्म का ये सुपरहिट गाना (Picture Courtesy: YouTube)

एक कविता से बना गुलामी फिल्म का ये सुपरहिट गाना (Picture Courtesy: YouTube)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। गुलामी फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती पर फिल्माया गया गाना जिहाल-ए-मिस्किन काफी हिट हुआ था। ये गाना लोगों को काफी पसंद आया था और इतने सालों बाद भी लोग इसे उतना ही पसंद करते हैं। हालांकि, इस गाने का कनेक्शन 13वीं सदी से जुड़ा है। 

जी हां, ये गाना 13वीं सदी में लिखी अमीर खुसरो की एक कविता से बना है। अमीर खुसरो ने ब्रज और फारसी भाषा को मिलाकर एक कविता लिखी थी, जिससे प्रेरित होकर बॉलीवुड का ये गाना बना। आइए जानें अमीर खुसरो की इस कविता के बारे में।     

अमीर खुसरो की लिखी कविता की कहानी 

अमीर खुसरो का जन्म 13वीं शताब्दी में हुआ था और उन्हें तूतिया-ए-हिंद यानी हिंदुस्तान का तोता कहा जाता है। वे फारसी और हिंदवी भाषा के विद्वान थे और उन्होंने इन भाषाओं में कई रचनाएं भी की हैं। इनकी रची इस कविता से एक दिलचस्प कहानी जुड़ी है। 

कहा जाता है कि दिल्ली सल्तनत के सुल्तान के दरबार में एक बार इस बात पर बहस छिड़ गई कि उस दौर के शायरों को फारसी में लिखना चाहिए या हिंदवी में। ये बहस बढ़ती जा रही थी और इसका कोई समाधान नहीं मिल रहा था। तभी इस बहस को खत्म करने और ये बताने की ये दोनों भाषाएं एक साथ लिखी जा सकती हैं, अमीर खुसरो ने उसी समय एक कविता लिख दी। 

इस कविता की खासियत थी इसे फारसी और ब्रज भाषा के मेल से लिखा गया था और इसके बोल थे- “जिहाल-ए-मिस्कीन मकुन तगाफुल, दुराए नैना बनाए बतियां”। अमीर खुसरो की लिखी इस कविता ने हिंदी और उर्दू साहित्य में नया इतिहास लिखा और इससे प्रेरणा लेकर और भी कई कविताएं और गजलें लिखी गईं।  

बॉलीवुड में छाया इस कविता का जादू

इस कविता की रचना के सदियों बाद 1985 में आई फिल्म गुलामी में इस कविता का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, इस गाने के बोल गुलजार साहब ने नए लिखे, जिनमें फारसी और हिंदी का मेल देखने को मिलता है।

इस गाने को लता मंगेश्कर और शब्बीर कुमार ने गाया था। पर्दे पर अनीता राज और मिथुन चक्रवर्ती पर इस गाने को फिल्माया गया और लोगों के ये खूब पसंद भी आया। बाद में श्रेया घोंसाल और विशाल मिश्रा ने इस गाने को नए अंदाज में रीक्रिएट किया।