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कोई सैड सॉन्ग नहीं, बल्कि 500 साल पुरानी कविता है ये गाना; अमृता सिंह की 37 साल पुरानी फिल्म से हुआ सुपरहिट

Published: Sun, 23 Aug 2026 12:09 PM (IST)Updated: Tue, 25 Aug 2026 12:36 PM (IST)

बॉलीवुड की कई फिल्मों में मीरा बाई की लिखी एक कविता पर गाना बनाया गया है। लोग इस गाने को आज भी अपनी प्ले-लिस्ट में शामिल करते हैं।

मीरा बाई की कविता से बना ये फिल्मी गाना (AI Generated Image)

मीरा बाई की कविता से बना ये फिल्मी गाना (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। साल 2014 में आई फिल्म 'खूबसूरत' का गाना 'प्रीत करे दुख होय', आपने जरूर सुना होगा। ये गाना हमारी सैड सॉन्ग्स की प्ले-लिस्ट में खास जगह रखता है, लेकिन क्या आप जानते हैं असल में ये गाना बॉलीवुड नहीं, बल्कि एक संत-कवियित्री से जुड़ा है?

जी हां, ये गाना आज से 500 साल पहले मीरा बाई ने लिखा था। आज हमें ये गाना सैड सॉन्ग लगता है, लेकिन मीरा बाई ने इसे प्रेम और समर्पण की भावना के साथ लिखा था। आगे चलकर इस गाने ने बॉलीवुड की कई फिल्मों में अपनी जगह बनाई। आइए जानें मीरा बाई की इस गाने के पीछे की कहानी।  

क्या है इन पंक्तियों का मतलब?

"जो मैं जानती, प्रीत करे दुख होय, तो नगर ढिंढ़ोरा पीटती कहती प्रीत न करियो कोय" के जरिए मीरा बाई कहती हैं कि अगर मुझे पहले से ये पता होता कि प्रेम करने पर इतना दुख सहना पड़ता है, तो मैं ढोल-नगाड़े बजाकर सभी को कहती कि तुम कभी किसी से प्रेम मत करना। इन पंक्तियों का मतलब सुनकर आपको लग सकता है कि इसमें मीरा बाई शिकायत कर रही हैं, लेकिन ऐसा नहीं है।

ये पंक्तियां शिकायत या निराशा का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि ये उस निश्छल और सबकुछ न्योछावर कर देने वाले प्रेम को बयां करता है, जिसमें दुख और तकलीफ होने के बाद भी वह खत्म नहीं होता। ऐसा ही प्रेम था मीरा बाई का, जिसकी मिसाल आजतक दुनिया देती है। प्रेम में लाखों तकलीफें सहने के बाद भी, वे कमजोर नहीं पड़ीं और न कभी प्रेम का मार्ग छोड़ा। 

मीरा बाई की प्रेम कहानी

16वीं शताब्दी में राजस्थान के एक राजपूती परिवार में जन्मी मीरा बाई बचपन से ही भगवान कृष्ण के प्रेम में दीवानी थीं। उन्होंने बचपन में ही उन्हें अपना पति मान लिया था। मेवाड़ के राजपरिवार में शादी होने के बाद भी वे राजसी परंपराओं को ठुकराकर, भगवान कृष्ण की भक्ति में ही रमी रहीं। उन्होंने अपने पति को भी कभी स्वीकार नहीं किया। 

मीरा बाई के पति की काफी कम उम्र में मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद उन पर सती होने का दबाव बनाया गया, लेकिन उन्होंने मना कर दिया और कहा कि मेरे पति मेरे गिरिधर गोपाल हैं। भगवान कृष्ण के प्रेम में वे साधु-संतों के साथ बैठकर भजन गातीं और नृत्य करतीं, जो उस समय के राजपरिवार के नियमों के खिलाफ था। 

कहा जाता है कि लोक-लाज को बचाने के लिए राणा ने मीरा बाई के लिए जहर का प्याला भेजा, लेकिन मीरा बाई की भक्ति ने उस जहर को अमृत में बदल दिया। उनके लिए संसार की किसी वस्तु का कोई मोल नहीं था, वे सिर्फ अपने प्रेमी, अपने आराध्य, अपने स्वामी, श्री कृष्ण में ही खोई रहती थीं। ऐसा था मीरा बाई का प्रेम। 

बॉलीवुड में मीरा बाई की गूंज

हिंदी सिनेमा में एक तरफा प्रेम और समर्पण को दिखाने के लिए मीरा बाई का जिक्र कई बार किया गया है। कई गानों में उनकी लिखी इन पंक्तियों का इस्तेमाल भी किया है। फिल्म बैजू बावरा, बंटवारा और साल 2014 में आई फिल्म खूबसूरत में भी इन पंक्तियों को सुन सकते हैं।