बीमार होने पर भी ऑफिस से छुट्टी लेने में होता है गिल्ट? एक्सपर्ट ने बताया इस मानसिक दबाव का पूरा सच
ऑफिस से छुट्टी लेने पर अक्सर कुछ कर्मचारियों को गिल्ट महसूस होता है, भले ही वे बीमार हों या थके हुए। ...और पढ़ें

छुट्टी आपका हक है, फिर भी इसे मांगने में 'गिल्ट' क्यों? जानिए इस कॉर्पोरेट उलझन का सच (Image Source: AI-Generated)
HighLights
कॉर्पोरेट कल्चर में हमेशा उपलब्ध रहने का दबाव
सहकर्मियों पर काम बढ़ने की चिंता और नौकरी की असुरक्षा
छुट्टी लेना मानसिक, शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपने कभी ऑफिस में छुट्टी के लिए अप्लाई करते समय अंदर ही अंदर एक अजीब-सी घबराहट या गिल्ट महसूस किया है? कॉर्पोरेट जॉब्स में छुट्टियां लेना हर कर्मचारी का सीधा अधिकार है।
हालांकि फिर भी, कई लोग छुट्टी पर जाने से पहले या उस दौरान ऐसा महसूस करते हैं मानो वे कोई गलती कर रहे हों या काम से जी चुरा रहे हों। यह भावना कभी-कभी इतनी हावी हो जाती है कि लोग बीमार होने या मानसिक रूप से पूरी तरह थक जाने के बाद भी छुट्टी लेने से कतराते हैं।
आखिर हमारे अपने ही हक का इस्तेमाल करने पर हमें यह गिल्ट क्यों होता है? आइए, दिल्ली के पीएसआरआई अस्पताल की कंसल्टेंट साइकोलॉजिस्ट, अर्पिता कोहली से इसके कारणों को समझते हैं।

(Image Source: AI-Generated)
हमेशा 'अवेलेबल' रहने का दबाव
इस अपराधबोध की सबसे बड़ी वजह हमारी कॉर्पोरेट कल्चर है। आज के समय में लगातार काम करने और 24 घंटे उपलब्ध रहने को ही 'मेहनती' होने की पहचान मान लिया गया है। देर रात तक सिस्टम पर बैठे रहना, वीकेंड पर मेल्स का रिप्लाई करना या बुखार में भी काम करते रहना- इन सबको अक्सर 'कमिटमेंट' का नाम दे दिया जाता है। ऐसे माहौल में जब कोई छुट्टी लेता है, तो उसे लगने लगता है कि वह अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा रहा है।
कलीग्स पर काम बढ़ने की चिंता
कई कर्मचारियों को यह डर सताता है कि उनके छुट्टी पर जाने से टीम के बाकी लोगों पर काम का बोझ बढ़ जाएगा या कोई बहुत जरूरी प्रोजेक्ट अटक जाएगा। यह गिल्ट उन लोगों में बहुत ज्यादा देखा जाता है जो अपने काम के प्रति अत्यधिक जिम्मेदार होते हैं या फिर उस स्थिति में जब टीम में लोग बहुत कम हों।
नौकरी की असुरक्षा और आपसी तुलना
नौकरी जाने का डर या बॉस की नाराजगी भी इस गिल्ट को जन्म देती है। लोगों के मन में यह डर बैठा रहता है कि ज्यादा छुट्टी लेने पर कहीं उनकी मेहनत या कंपनी के प्रति उनकी निष्ठा पर सवाल न उठने लगें। इसके अलावा, जब हम ऑफिस में किसी सहकर्मी को बिना कोई छुट्टी लिए मशीन की तरह काम करते देखते हैं, तो तुलना की भावना जन्म लेती है और हमें लगता है कि हमें भी ऐसा ही करना चाहिए।
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सोशल मीडिया और 'हसल कल्चर' का असर
आजकल सोशल मीडिया ने 'हसल कल्चर' को सफलता का दूसरा नाम बना दिया है। बिना थके, बिना रुके हमेशा व्यस्त रहने को महान बनाकर पेश किया जाता है। इस सोच के कारण लोगों को लगने लगा है कि आराम करना या अपने लिए समय निकालना गलत है, जबकि हकीकत में शरीर और दिमाग दोनों को रीचार्ज होने के लिए ब्रेक की सख्त जरूरत होती है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
एक्सपर्ट के अनुसार, छुट्टी लेना कोई अपराध या गलती नहीं है। यह हमारी मेंटल और फिजिकल हेल्थ को दुरुस्त रखने के लिए बेहद जरूरी है। बिना कोई ब्रेक लिए लगातार काम करते रहने से थकान, तनाव और 'बर्नआउट' का खतरा काफी बढ़ जाता है।
याद रखें, छुट्टियां सिर्फ मजे या आराम के लिए नहीं होतीं, बल्कि ये आपको और भी बेहतर तरीके से काम करने के लिए एनर्जी देती हैं। इसलिए, अगली बार जब आप छुट्टी लें और मन में गिल्ट आए, तो खुद को याद दिलाएं कि आप केवल अपने अधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। काम करना जितना जरूरी है, खुद की देखभाल करना भी उतना ही अहम है।