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कभी एंटीसेप्टिक दवा होते थे पर आज है एक मिठाई, पढ़ें दुनिया के सबसे पहले लड्डू का अनूठा इतिहास

Updated: Sat, 22 Aug 2026 03:45 PM (IST)

पहले के समय में लड्डू मिठाई थोड़े ही थे जो लोग इसे चाव से खाते!

चोल वंश के समय में सैनिकों का गुड लक था लड्डू (Image Source: AI Generated)

चोल वंश के समय में सैनिकों का गुड लक था लड्डू (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज त्योहारों, शादियों और खुशखबरी के मौकों पर जिन लड्डुओं को बांटे जाने का चलन है, उनका इतिहास बड़ा ही अनूठा है। कहते हैं पहले के समय में लोग लड्डू मिठाई के तौर पर नहीं दवाई के तौर पर खाते थे, लेकिन अब सवाल यह है कि फिर ये लड्डू हमारी मिठाई का हिस्सा कैसे बन गए? क्या है कड़वी दवा से त्योहारों की शान बनने का लड्डुओं का इतिहास? आइए आपको यह रोचक कहानी विस्तार से बताते हैं। 

दुनिया का पहला लड्डू भारत में बना 

कहते हैं कि दुनिया के सबसे पहले लड्डू भारत में ईसा पूर्व चौथी शताब्दी में भारत के प्राचीन चिकित्सक सुश्रुत ने बांधे थे। सबसे दिलचस्प बात कि ये लड्डू उस समय एंटीसेप्टिक दवा के रूप में तैयार किए गए थे। सुश्रुत ने लड्डू बांधने के लिए तिल, गुड़, मूंगफली, मेथी, अदरक पाउडर के मिश्रण को शामिल किया था। 

तिल के बीजों पर एंटीबैक्टीरियल गुणों वाले शहद से कोटिंग की जाती थी। वहीं, गुड़ और तिल को इसलिए शामिल किया गया क्योंकि आयुर्वेद में ये दोनों ही चीजें अपच, हाई ब्लड प्रेशर और सर्दी-जुकाम ठीक करने में मदद करती हैं। उस समय ये लड्डू शरीर को तुरंत ऊर्जा देने और रोगों से रक्षा करने में बड़ी भूमिका निभाते थे। 

चोल वंश के समय में सैनिकों का गुड लक था लड्डू 

लड्डू का इतिहास चोल वंश से भी जुड़ा हुआ है, इसमें भी नारियल के लड्डू का खास महत्व था। ऐसा कहा जाता है कि चोल साम्राज्य के शासनकाल में जब कभी सैनिक युद्ध पर और यात्री सफर के लिए रवाना होते थे तो वो अपने साथ नारियल के लड्डू एक गुड लक के तौर पर लेकर जाते थे। उस दौर में सफर के लिए लादू शुभकामना का प्रतीक होते थे जिसे 'नारयाल नाकरू' कहा जाता था। 

वैद्य ने गलती छिपाने के लिए बांधे थे लड्डू 

लड्डू के इतिहास से जुड़ी एक लोककथा भी है जिसके अनुसार इन्हें वैद्य ने अपनी गलती छिपाने के लिए बांधा था। कहते हैं कि एक प्रशिक्षु वैद्य से औषधि बनाते वक्त ज्यादा घी पड़ गया। जब यह मिश्रण बहुत ज्यादा चिपचिपा सा हो गया तो उसने अपनी गलती छिपाने के लिए इन्हें छोटे-छोटे गोल आकार में बांध दिया। मरीजों को जब ये दवा के रूप में दिया गया तो इसे खाना बहुत आसान था और इस तरह लड्डू एक वैद्य से गलती से आविष्कार हुआ। 

चीनी आने से लड्डू बने मिठाई

अब सवाल यह कि फिर यह मिठाई कैसे बने तो बता दें कि आयुर्वेदिक तरीके से बने लड्डू कम मीठे पर हेल्दी होते थे। अंग्रेज जब भारत आए तो चीनी का चलन बढ़ने लगा, तब से ही लड्डुओं में मिठास जोड़ने के लिए चीनी का इस्तेमाल ज्यादा किया जाने लगा। 

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