भोजपुरी गानों जैसा नहीं है बिहार का असली डांस, बिदेसिया कहता है परदेस गए पति की तकलीफ और पत्नी के इंतजार की कहानी
बिहार का लोक नृत्य बिदेसिया पति-पत्नी के प्रेम, विरह और प्रवास की कहानी पेश करता है।
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क्या है बिहार के बिदेसिया नृत्य की कहानी? (AI Generated Image)

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बिहार का डांस सिर्फ भोजपुरी गानों तक सीमित नहीं है। यहां की असली संस्कृति यहां के लोक नृत्यों में देखने को मिलती है, जिसमें बिदेसिया (Bidesiya) भी शामिल है। बिदेसिया बिहार के सबसे मशहूर लोक नृत्यों (Bihar Folk Dac) में से एक है।
इस नृत्य में पति-पत्नी के विरह की तकलीफ, गरीबी और पलायन जैसे मुद्दों को बहुत ही खूबसूरत तरीके से दिखाया जाता है। इस नृत्य की शुरुआत बिहार के शेक्सपियर भिखारी ठाकुर ने की थी। आइए जानें बिदेसिया के शुरू होने की कहानी और इस नृत्य की खासियत।
बिदेसिया नृत्य क्यों किया जाता है?
बिदेसिया विदेशी शब्द से बना है, जो पलायन और विरह के दर्द को दिखाता है। 19वीं और 20वीं सदी में बिहार के पुरुष रोजगार की तलाश में अपना घर, गांव और पत्नी को छोड़कर कलकत्ता, असम या दूसरे बड़े शहरों के लिए निकलने लगे।
पुरुषों के शहर जाने के बाद घर पर पीछे छूट गई महिला के जीवन में जो अकेलापन, असुरक्षा और पति के लौटने के इंतजार को व्यक्त करने के लिए बिदेसिया नृत्य की शुरुआत हुई। इस नृत्य की खास बात यह है कि ये सिर्फ पति-पत्नी के विरह को नहीं दिखाता, बल्कि इस विरह का कारण बनी बेरोजगारी, गरीबी, समाज के रीति-रिवाज आदि को भी दिखाता है। इसमें पुनर्विवाह जैसे सामाजिक मुद्दों को भी उठाया जाता है।
बिदेसिया की शुरुआत कैसे हुई?
बिदेसिया नृत्य के जनक भिखारी ठाकुर हैं, जिन्हें भोजपुरी का शेक्सपियर भी कहा जाता है। 20वीं सदी में जब पुरुष रोजी-रोटी की तलाश में परदेस जाने लगे, तब घर पर छूटी महिलाओं के दर्द को भिखारी ठाकुर ने महसूस किया। उन्होंने गांव की भाषा और शैली में नाटकों की रचना की और उन्हें मंच पर दिखाना शुरू किया गया।
भिखारी ठाकुर ने बिदेसिया नाम से भी एक नाटक लिखा। जब इस नाटक में पलायन के दर्द को बहुत ही सुंदर कहानी के साथ पेश किया। यह नाटक इतना मशहूर हुआ कि इससे ही नाटक-नृत्य शैली में बिदेसिया की शुरुआत हुई।
बिदेसिया की खासियत क्या है?
बिदेसिया सिर्फ पुरुष करते हैं। इसमें मिहलाओं के पात्र भी पुरुष ही निभाते हैं। महिलाओं का शृंगार और कपड़े पहनकर वे स्टेज पर अभिनय और नृत्य करते हैं। लोगों को बिदेसिया इसलिए भी इतना पसंद आता है, क्योंकि इसमें भोजपुरी के पारंपरिक धुनों का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें कजरी जैसे गीतों का भी इस्तेमाल होता है।
इस नृत्य को पेश करते समय ढोलक, मंजीरा और हारमोनियम जैसे वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल किया जाता है। बिदेसिया में जहां पति-पत्नी के विरह से लोगों की आंखों में आंसू आ जाते हैं, वहीं बीच-बीच में बटोहिया का किरदार हंसी और व्यंग्य से लोगों को गुदगुदा देता है।
