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भोजपुरी गानों वाला नहीं, ये है बिहार का असली डांस! एक दिलचस्प लोककथा से हुई 'जट-जटिन' नृत्य की शुरुआत

Published: Tue, 04 Aug 2026 07:00 PM (IST)Updated: Sat, 08 Aug 2026 12:35 PM (IST)

बिहार का लोक नृत्य जट-जटिन में नजर आती है पति-पत्नी के रिश्ते का प्यार और मीठी तकरार।

क्या है जट-जटिन डांस की कहानी? (AI Generated Image)

क्या है जट-जटिन डांस की कहानी? (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बिहार का डांस सुनते ही आपके दिमाग में भोजपुरी गानों की तस्वीर आती होगी, लेकिन क्या आप जानते हैं बिहार का असली नृत्य उन गानों में दिखाए गए डांस से काफी अलग है। हम बात कर रहें है बिहार के लोक नृत्य जट-जटिन की। 

ये नृत्य पति-पत्नी के बीच के प्यार, तकरार, दूरी और रोजमर्रा की जिंदगी को बहुत खूबसूरती से दिखाता है। इस नृत्य की शुरुआत काफी साल पहले हुई थी, जिससे जुड़ी कहानी काफी दिलचस्प है। आइए जानें जट-जटिन नृत्य की शुरुआत कैसे हुई।

कैसे हुई जट-जटिन नृत्य की शुरुआत?

जट-जटिन के शुरुआत की कहानी बिहार की लोक कथाओं में सुनने को मिलती है। माना जाता है कि ये नृत्य जट और जटिन नाम के जोड़े पर आधारित है, जिन्होंने गरीबी के कारण काफी परेशानियों का सामना किया, लेकिन उनका प्रेम एक-दूसरे के लिए बना रहा। उनके जीवन के खट्टे-मीठे अनुभवों, नोंक-झोंक, विरह और प्रेम को लोकगीतों में ढाला गया, जिससे आगे चलकर जट-जटिन नृत्य की शुरुआत हुई। 

कब किया जाता है ये नृत्य?

जट-जटिन नृत्य रात के समय किया जाता है, खासकर बारिश के मौसम में। इस नृत्य में एक जोड़े को दिखाया जाता है, जो शादीशुदा जीवन के प्यार और तकरार को दिखाते हैं। रात के समय महिलाएं और लड़कियां इकट्ठा होती हैं और तब होता है जट-जटिन नृत्य। इसे शादीशुदा जिंदगी की तकरार, प्यार, पति के परदेस जाने की विरह और पति के इंतजार को दिखाने के लिए किया जाता है। 

जट-जटिन नृत्य की खासियत क्या है?

जट-जटिन नृत्य पुरुष और महिला एक जोड़े में आकर करते हैं। हालांकि, पारंपरिक रूप से इसे सिर्फ महिलाएं किया करती थीं। कोई महिला ही पुरुष का भेष लेती और स्वांग रचाते हुए ये नृत्य किया जाता था। इस डांस के गाने भी संवाद की शैली में होते हैं, जैसे-

“टिकवा जब जब मंगैली रे जटवा, टिकवा काहे न लौले रे?

टिकवा जब जब आन लियो रे जटनी, टिकवा काहे न पेन्हले गे?”

ऐसे ही सवाल-जबाव करते हुए जट-जटिन नृत्य के गाने बनाए जाते हैं, जिनपर बहुत खूबसूरत नृत्य होता है। इन गानों में पति-पत्नी के बीच की नोंक-झोंक को दिखाया जाता है। ये डांस हंसी-मजाक और प्रेम का बहुत सुंदर मेल है। इसमें ढोलक, मंजीरा और बांसुरी जैसे वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल किया जाता है और नृतक अपने एक्सप्रेशन और एक-दूसरे के साथ ताल मिलाकर नृत्य करते हैं।

इस नृत्य का पहनावा कैसा होता है?

जट-जटिन नृत्य बिहार के ग्रामीण इलाकों की झलक पेश करता है। इसलिए इस नृत्य का पहनावा भी काफी साधारण होता है। जटिन की भूमिका निभाने वाली महिला साड़ी पहनती हैं। साथ ही, माथे पर बिंदी, चूड़ियां, पायल और सिर पर आंचल रखकर तैयार होती है। वहीं जट की भूमिका निभाने वाला पुरुष धोती और कुर्ता पहनता है और सिर पर गमछा बांधकर नृत्य करता है। 


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