मरुधरा के 'पनिहारी' में छिपी है स्वाभिमान और पतिव्रता धर्म की दास्तान! पानी की तलाश में रची गई थी इसकी कहानी
मरुभूमि का लोकगीत पनिहारी जो वहां के संघर्ष के नृत्य, सुरों और धुनों में बड़ी ही खूबसूरती से बखान करता है।

पनिहारी लोकगीत की दास्तान (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। राजस्थान के लिए पानी सोने से कम महत्व नहीं रखता, इसी कमी ने यहां की अनोखी लोक संस्कृति को जन्म दिया जिसका अहम हिस्सा है पनिहारी लोकगीत। सिर पर मटके रख मीलों दूर से पानी भरकर लाती महिलाओं के जीवन का कब यह लोकगीत हिस्सा बना, पता ही नहीं चला, चलिए आपको बताते हैं पनिहारी लोकगीत की अनूठी दास्तान।
क्या है पनिहारी लोकगीत?
पनिहारी लोकगीत राजस्थान की अटूट संस्कृति का हिस्सा है, जिसमें पनिहारी का मतलब है कुएं से पानी लाने वाली महिला। वहीं, इसकी उत्पत्ति की बात करें तो तपती रेत में जब महिला सिर पर मटकी रख मीलों दूर के किसी कुएं से पानी भरकर लाती है तो उसी रास्ते के बीच में ही गाई जाने वाली धुनों से पनिहारी लोकगीत का जन्म होता है।
परदेस गए पति से जुड़ी है कहानी
इस गीत से जुड़ी एक बड़ी ही रोचक कहानी है कि एक बार पनिहारी पानी लेने के लिए जा रही होती है और इसी बीच उसे एक अजनबी रोक लेता है। वह अजनबी और कोई नहीं भेष बदला हुआ पनिहारी का पति ही होता है। वह महिला को गहने और खूब सारा धन दिखाकर उसे रिझाने की कोशिश करता है, लेकिन महिला अपने पतिव्रता धर्म पर अडिग रहती है। इसके बाद तो वह उस अजनबी की खूब फटकार लगाती है। इस तरह पनिहारी लोकगीत महिला के पतिव्रता धर्म, आत्मसम्मान और हिम्मत से जुड़ा हुआ है।
नृत्य और गीत दोनों की जुगलबंदी
यह गीत गाए जाने के साथ ही नृत्य से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। इसमें महिलाएं अपनी पारंपरिक वेशभूषा घाघरा-चोली में सबसे पहले पनघट पर मिट्टी या पीतल के घड़े रखती हैं। फिर संतुलन बनाकर और गीत गाते हुए नृत्य किया जाता है।
यह गीत राजस्थानी संस्कृति में मनोरंजन का साधन नहीं है, इसका संबंध मरुभूमि के उस संघर्ष से है जिसका महिलाएं हर दिन सामना करती हैं। इसके माध्यम से एक स्त्री की अपने नैतिक मूल्यों, परिवार और पति के प्रति निष्ठा भी दिखाती है। इसके अलावा, सास, ननद और देवर से छोटी-मोटी नोक-झोंक से जुड़े कई अंतरा भी इस संस्कृति का हिस्सा है।
कालबेलिया समुदाय से खास नाता
राजस्थान का यह फेमस लोकगीत कालबेलिया समुदाय की संस्कृति का भी अहम हिस्सा है। इसे स्त्री और पुरुष दोनों मिलकर करते हैं जिसमें पानी ले जाते समय रास्ते में होने वाली बातचीत को कलात्मक तरीके से नृत्य के माध्यम से बखूबी दिखाया जाता है।

