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स्कॉलरशिप से की पढ़ाई, फिर बने ऑक्सफोर्ड में प्रोफेसर; क्यों डॉ. राधाकृष्णन के जन्मदिन पर मनाते हैं टीचर्स डे

Published: Fri, 04 Sep 2026 12:15 PM (IST)Updated: Sat, 05 Sep 2026 09:45 AM (IST)

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन को भारत में टीचर्स डे के रूप में मनाया जाता है।

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जीवन कैसा था? (Picture Courtesy: Facebook)

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जीवन कैसा था? (Picture Courtesy: Facebook)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। 5 सितंबर को पूरा भारत बड़े धूमधाम से टीचर्स डे मनाता है। ये दिन हर टीचर और स्टूडेंट के लिए खास होता है। स्कूल और कॉलेजों में इस दिन खास कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दिन को देश के दूसरे राष्ट्रपति के जन्मदिन के अवसर पर मनाया जाता है? 

जी हां, भारत के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन को टीचर्स डे के रूप में मनाया जाता है। डॉ. राधाकृष्णन ने अपने करियर की शुरुआत बतौर शिक्षक की थी। अपनी सादगी और बुद्धिमानी के लिए जाने जाने वाले डॉ. राधाकृष्णन शिक्षकों को देश का मार्गदर्शक मानते थे। आइए टीचर्स डे के इस मौके पर उनके जीवन के बारे में जानें।  

कैसा था शुरुआती जीवन?

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुतनी गांव में एक साधारण ब्राह्मण परिवार में हुआ था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से उनका बचपन काफी संघर्षों के बीच बीता। डॉ. राधाकृष्णन को बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई का काफी शौक था। उन्होंने स्कॉलरशिप्स की मदद से अपनी शिक्षा पूरी की और मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से फिलॉसफी में एम.ए की डिग्री हासिल की।

एक महान शिक्षक और दार्शनिक

शिक्षा पूरी होने के बाद उन्होंने एक शिक्षक के रूप में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की। उन्होंने मैसूर यूनिवर्सिटी और कलकत्ता यूनिवर्सिटी में बतौर प्रोफेसर काम किया। वे सिर्फ एक शिक्षक नहीं थे, बल्कि एक दार्शनिक भी थे। उनके पढ़ाने का तरीका इतना बेहतरीन था कि छात्र उनके लेक्चर सुनने के लिए दूर-दूर से आते थे। उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में भी बतौर प्रोफेसर काम किया और पश्चिमी दुनिया के सामने भारत के दर्शनशास्त्र को बहुत प्रभावशाली ढंग से पेश किया।  

राजनीति में अहम भूमिका

देश की स्वतंत्रता के बाद डॉ. राधाकृष्णन ने कूटनीति और राजनीति में भी अहम योगदान दिया। साल 1949-52 तक, वे सोवियत संघ में भारत के राजदूत रहे, जहां उन्होंने भारत के संबंधों को मजबूत बनाने के लिए काम किया। 1952 में वे भारत के पहले उपराष्ट्रपति बने और साल 1962 में देश के दूसरे राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभाला। साल 1954 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। 

5 सितंबर को शिक्षक दिवस क्यों मनाया जाता है?

डॉ. राधाकृष्णन से जुड़ी एक कहानी है कि एक बार उनका जन्मदिन मनाने उनके कुछ छात्र उनके पास पहुंचे। तब उन्होंने कहा कि मेरे जन्मदिन को अलग से मनाने के बजाय, इस दिन को देशभर के शिक्षकों के सम्मान के लिए समर्पित किया जाए, तो मेरे लिए बहुत गर्व और खुशी की बात होगी। उनके इसी विचार के सम्मान में हर साल टीचर्स डे मनाने की शुरुआत हुई। 


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