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    थाईलैंड के 'खोन' नृत्य में दिखती है रामायण की झलक, जानिए क्यों यूनेस्को भी है इस अनोखी कला का कायल

    Updated: Sun, 08 Mar 2026 02:54 PM (IST)

    थाईलैंड का 'खोन' नृत्य एक समृद्ध सांस्कृतिक पहचान है, जिसमें अभिनय, संगीत और साहित्य का अद्भुत संगम है। ...और पढ़ें

    थाईलैंड जाएं तो मिस न करें ‘खोन’ डांस (Image Source: AI-Generated)

    थाईलैंड जाएं तो मिस न करें ‘खोन’ डांस (Image Source: AI-Generated) 

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। थाईलैंड की संस्कृति बेहद समृद्ध है, और उसकी राष्ट्रीय पहचान का एक बहुत बड़ा और गौरवपूर्ण हिस्सा है 'खोन' नृत्य। यह सिर्फ एक साधारण डांस नहीं है, बल्कि इसमें बेहतरीन अभिनय, सुरीला संगीत, साहित्य और मनमोहक दृश्यों का एक अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

    Thai Masked Dance

    (Image Source: AI-Generated) 

    शाही दरबारों से लेकर आम लोगों तक का सफर

    इस खूबसूरत कला की शुरुआत लगभग 17वीं शताब्दी में हुई थी। शुरुआती दौर में खोन नृत्य केवल राजा-महाराजाओं के शाही दरबारों तक ही सीमित था। इसे खास तौर पर शाही पूजा-पाठ और बड़े समारोहों के दौरान ही प्रस्तुत किया जाता था। हालांकि, वक्त के साथ इस कला ने राजमहलों की चारदीवारी से बाहर निकलकर राष्ट्रीय मंचों तक अपना सफर तय किया। इतने बदलावों के बावजूद, इसमें आज भी प्राचीन थाई कला की शुद्धता और प्रभाव पूरी तरह बरकरार है।

    थाई रामायण 'रामाकियन' की प्रस्तुति

    इस थाई नृत्य का हमारी भारतीय संस्कृति से भी गहरा नाता है। खोन नृत्य की ज्यादातर प्रस्तुतियां 'रामाकियन' पर आधारित होती हैं, जो भारतीय महाकाव्य रामायण का ही थाई रूप है। इस प्रस्तुति में थाई संस्कृति के नजरिए से फ्रा राम (भगवान राम), सीदा (माता सीता) और तोसाकन (रावण) जैसे मुख्य किरदारों की कहानी को मंच पर जीवंत किया जाता है।

    UNESCO Intangible Cultural Heritage

    (Image Source: AI-Generated) 

    रहस्यमयी मुखौटे और पारंपरिक संगीत

    इस नृत्य की सबसे बड़ी और आकर्षक खूबी इसके रंग-बिरंगे और बेहद बारीकी से डिजाइन किए गए मुखौटे हैं। सभी कलाकार इन सजे-धजे मुखौटों को पहनकर अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। इन मुखौटों के हर रंग और हर एक आकार का अपना एक खास प्रतीकात्मक मतलब होता है। इस पूरी प्रस्तुति के दौरान मंच पर एक कथावाचक दर्शकों को कहानी सुनाता है, जबकि पीछे से 'पिपहट' नाम का पारंपरिक वाद्यवृंद अपने संगीत से पूरे माहौल को जादुई बना देता है।

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    यूनेस्को द्वारा मिला विश्वस्तरीय सम्मान

    खोन नृत्य की इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अहमियत को पूरी दुनिया ने सराहा है। यही वजह है कि साल 2018 में यूनेस्को ने इस अनोखी कला को अपनी 'मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत' की सूची में शामिल करके इसे एक बड़ा सम्मान दिया।

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