"बेटा, थोड़ा एडजस्ट कर लो"... अब Gen Z के आगे नहीं चल रही बड़ों की ये सलाह, 9-5 जॉब से भाग रहे दूर
आज की युवा पीढ़ी, Gen Z, 9-5 की नौकरी से दूर होकर अपनी शर्तों पर काम करना पसंद कर रही है। ...और पढ़ें

नौकरी नहीं, अपना खुद का बॉस बनना चाहती है आज की युवा पीढ़ी (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हमेशा से हमें यही सिखाया गया है कि जीवन में सफल होने का एक ही फॉर्मूला है- एक सुरक्षित नौकरी ढूंढो, अपने सीनियर्स का सम्मान करो और धीरे-धीरे तरक्की की सीढ़ियां चढ़ते जाओ, लेकिन जैसे-जैसे Gen Z यानी आज की युवा पीढ़ी काम की दुनिया में कदम रख रही है, यह पुरानी सोच तेजी से बदल रही है।
ऐसा नहीं है कि ये युवा मेहनत से कतराते हैं, बल्कि बात सिर्फ इतनी है कि ये अपनी शर्तों पर काम करना चाहते हैं, जहां काम के साथ-साथ पूरी फ्रीडम और फ्लैक्सिबिलिटी हो।
नौकरीपेशा नहीं, खुद का 'मालिक' बनने की है चाहत
आज की युवा पीढ़ी किसी और की कंपनी में तरक्की की सीढ़ियां चढ़ने के बजाय अपने सपनों का साम्राज्य खुद बनाना चाहती है। 'नौकरीपेशा' बनने से ज्यादा उन्हें अपना 'मालिक' बनने में दिलचस्पी है। आंकड़े भी इसी बड़े बदलाव की गवाही देते हैं। फोर्ब्स के अनुसार 84% युवा अपना बिजनेस चाहते हैं। भारत में यह क्रेज और भी ज्यादा है। बैंकबाजार के मुताबिक 85.5% भारतीय युवा अपना काम शुरू करना चाहते हैं, जिनमें से 36% का तो यह जीवन का मुख्य लक्ष्य है। वहीं, सैमसंग की स्टडी बताती है कि 16 से 25 साल के 50% युवा अपनी खुद की कंपनी स्थापित करना चाहते हैं।

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युवाओं को अब कम उम्र में ही आत्मनिर्भरता चाहिए। एक्सा के सर्वे के मुताबिक, 60% युवा 30 साल की उम्र तक अपना खुद का बॉस बनना चाहते हैं। इसके अलावा, नौकरी के साथ-साथ एक्स्ट्रा इनकम यानी 'साइड हसल' का चलन भी जोरों पर है। इंट्यूट की रिपोर्ट बताती है कि 49% युवाओं का मुख्य लक्ष्य आत्मनिर्भर होना है और 66% युवा अपनी नौकरी के साथ-साथ खुद का कोई काम शुरू कर चुके हैं या करने वाले हैं।
डिजिटल दुनिया और सोशल मीडिया का प्रभाव
रिसर्चर्स मानते हैं कि आज की पीढ़ी पहले के मुकाबले बहुत कम उम्र में बिजनेस की दुनिया में उतर रही है। कॉलेज की पढ़ाई के दौरान ही कई युवा फ्रीलांसिंग या छोटे ऑनलाइन बिजनेस शुरू कर देते हैं। इस बदलाव में डिजिटल अर्थव्यवस्था का बहुत बड़ा योगदान है। आज महज एक लैपटॉप और इंटरनेट कनेक्शन के जरिए बिजनेस शुरू किया जा सकता है।
खबरें और भी
इसके अलावा, सोशल मीडिया ने काम को लेकर युवाओं की बातचीत का तरीका बदल दिया है। युवा अक्सर इंटरनेट पर अपने ऑफिस के बुरे अनुभवों पर खुलकर बात करते हैं। खराब माहौल, सख्त मैनेजर या बंधा हुआ टाइम-टेबल- ये कुछ ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से वे पारंपरिक नौकरियों से दूर भाग रहे हैं। अब उनके लिए सिर्फ अच्छी सैलरी ही मायने नहीं रखती, बल्कि मानसिक शांति और व्यक्तिगत स्वतंत्रता भी उतनी ही अहमियत रखती है।

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दो पीढ़ियों की सोच में जमीन-आसमान का अंतर
जब घर में करियर या नौकरी के तनाव की बात होती है, तो दो पीढ़ियों का फासला साफ दिखाई देता है। घर के बड़े-बुजुर्ग, जैसे दादी, अक्सर यही समझाती हैं कि, "बेटा, ऐसा ही होता है, थोड़ा एडजस्ट कर लो।" उनके नजरिया में नौकरी का तनाव सहना जीवन का एक सामान्य हिस्सा था। माता-पिता भी अक्सर ऑफिस में धैर्य रखने और प्रेशर हैंडल करने की सलाह देते हैं।
युवा पीढ़ी इस नजरिए को समझती तो है, लेकिन वे इसे अपनाना नहीं चाहते। उनका मानना है कि आज के समय में उनके पास करियर के ढेर सारे विकल्प मौजूद हैं, इसलिए वे अच्छे विकल्पों की कमी का बहाना देकर बेवजह किसी नौकरी का दबाव क्यों सहें?
आजादी के साथ आते हैं कई जोखिम
यह सच है कि अपना खुद का बॉस बनना उतना भी आसान नहीं है जितना यह दूर से दिखाई देता है। इसमें किसी पारंपरिक नौकरी की तरह हर महीने तय सैलरी नहीं आती। अपना काम शुरू करने के लिए बहुत ज्यादा अनुशासन और चुनौतियों का सामना करने की ताकत चाहिए होती है।
कुल मिलाकर, आज की युवा पीढ़ी अभी भी तेजी से बदलती इस दुनिया में काम करने के सही तरीके तलाश रही है। पुरानी पीढ़ी के लिए नौकरी की स्थिरता ही सब कुछ थी, लेकिन आज का युवा एक ऐसे संतुलन की मांग कर रहा है जहां काम के साथ-साथ जीवन का सुकून भी बना रहे। उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वे इस आजादी और चुनौतियों के बीच सही तालमेल कैसे बिठाते हैं।