हर बात जरूरत से ज्यादा सोचते हैं आप, डॉक्टर से समझें क्यों ओवरथिंकिंग के दलदल में फंस जाता है दिमाग?
हर बात को ओवरथिंक करना मानसिक रूप से थकाने वाला होता है, जिसके पीछे कुछ साइकोलॉजिकल कारण हैं। ...और पढ़ें

ओवरथिंकिंग से कैसे बचें? (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आप ऐसे लोगों को जानते होंगे, जो हर छोटी-छोटी बात के बारे में जरूरत से ज्यादा सोचने लगते हैं। हो सकता है कि आप खुद भी ऐसा करते हो। इसे ओवरथिंकिंग कहते हैं, जो एक दलदल की तरह है। जब हम ओवरथिंक करते हैं, तब हमारा दिमाग परेशानी का हल ढूंढ़ने के बजाय उसमें और ज्यादा फंसने लगता है।
दरअसल, हर बात पर ओवरथिंक करना सिर्फ एक आदत नहीं है, बल्कि यह एक साइकोलॉजिकल कंडीशन है। आइए डॉक्टर से समझते हैं कि क्यों यह जानते हुए भी कि ओवरथिंकिंग फायदेमंद नहीं है, फिर भी हम इस जाल में फंस जाते हैं।
क्यों करते हैं ओवरथिंकिंग?
डॉ. अश्वथी आर. एस. नायर (कॉर्पोरेट मेंटल हेल्थ कंसल्टेंट एंड साइकोलॉजिस्ट) बताते हैं कि ओवरथिंकिंग अक्सर एंग्जायटी रेगुलेशन और दिमाग के खतरा पहचानने वाले सिस्टम से जुड़ी होती है। ओवरथिंकिंग के दौरान हमारे दिमाग के एमिग्डाला, जो डर महसूस करवाता है और प्री-फ्रंटल कॉर्टेक्स, जो लॉजिकल थिंकिंग करता है, के बीच तालमेल नहीं बैठ पाता है। इसके कारण हमारा दिमाग परेशानी का लॉजिकल सॉल्यूशन नहीं निकाल पाता।
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(Picture Courtesy: Freepik)
ओवरथिंंकिंग के कारण क्या हैं?
- अनिश्चितता का डर- इंसानी दिमाग को कंट्रोल पसंद है। जब परिस्थितियां अनिश्चित होती हैं, तो हमारा दिमाग भविष्य की नेगेटिव घटनाओं का अनुमान लगाने के लिए हाइपर-ड्राइव में चला जाता है। हमें लगता है कि अगर हम हर संभव परिणाम के बारे में सोच लेंगे, तो हम सुरक्षित रहेंगे, लेकिन असल में यह केवल मानसिक थकान पैदा करता है।
- एक ही बात के लूप में फंसना- ओवरथिंकिंग का एक मुख्य हिस्सा है रुमिनेशन। यह वह स्थिति है जब व्यक्ति एक ही बात को बार-बार दोहराता रहता है। जैसे अतीत की घटना से जुड़ा पछतावा और बार-बार सोचना कि मुझे ऐसा नहीं, बल्कि वैसा करना चाहिए। या भविष्य की चिंता में फंसना कि अगर ऐसा हो गया, तो क्या होगा। यह एक साइकिल की तरह महसूस होता है जहां दिमाग लूप को बंद नहीं कर पाता।
- कॉग्निटिव सेंसिटिविटी- कुछ लोग दूसरों की तुलना में ज्यादा संवेदनशील होते हैं। वे हर जानकारी को गहराई से प्रोसेस करते हैं। जहां एक आम व्यक्ति किसी बात को नजरअंदाज कर देता है, वहीं एक ओवरथिंकर उसके पीछे के छिपे हुए मतलबों को खोजने की कोशिश करता है। इसे हाइटेंड कॉग्निटिव सेंसिटिविटी कहा जाता है।
क्या ओवरथिंकिंग को रोका जा सकता है?
ओवरथिंकिंग को पूरी तरह नहीं रोका जा सकता है, लेकिन मैनेज जरूर किया जा सकता है।
खबरें और भी
- जागरूकता- सबसे पहले यह पहचानें कि आप कब अनप्रोडक्टिव थिंकिंग लूप में फंस रहे हैं।
- डिसइंगेजमेंट- हर बात पर रिएक्ट करने की जरूरत नहीं है और कोशिश करें कि हर बात के पीछे छिपे मतलब ढूंढ़ने की कोशिश न करें।
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