रियल लव स्टोरी से जुड़ा है मलाइका अरोड़ा का यह जबरदस्त गाना, 27 साल बाद कर देता है नाचने पर मजबूर
मलाइका अरोड़ा का जबरदस्त राजस्थानी सॉन्ग आज भी हर पार्टी-शादी की जान बना हुआ है। 27 साल बाद इस गाने का चार्म कम नहीं हुआ है। खास बात यह है कि यह गाना ...और पढ़ें

रंगीलो म्हारो ढोलना के पीछे की कहानी (Picture Courtesy: YouTube)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। राजस्थानी लोकगीतों और गानों की एक अलग ही बात होती है। इनकी धुनें और सुर इतने लाजवाब होते हैं कि सुनते की तन और मन थिरकने लगता है। ऐसा ही एक गाना साल 1999 में आया था। यह गाना बेहतरीन डांसर और एस्ट्रेस मलाइका अरोड़ा पर फिल्माया गया था।
हम बात कर रहे हैं मशहूर गाने रंगीलो म्हारो ढोलना की, जिसे शुभा मुद्गल ने अपनी आवाज दी और जो अपने दौर में काफी हिट हुआ था और हम से कईयों ने तो इस गाने पर स्कूल फंक्शन में भी डांस किया होगा।
लेकिन क्या आप जानते हैं इस हिट गाने के पीछे राजस्थानी संस्कृति से जुड़ी हजारों साल पुरानी प्रेम कहानी छिपी है? जी हां, रंगीलो म्हारो ढोलना असल में ढोला-मारू की प्रेम कहानी से प्रेरित है। आइए जानें इस गाने की कहानी क्या है।
किस कहानी पर बना है ये गाना?
रंगीलो म्हारो ढोलना गाना असल में ढोला-मारू की प्रेम कहानी से प्रेरित होकर बनाया गया है। ये कहानी 11वीं शताब्दी की है। नरवर के राजकुमार ढोला और पूगल की राजकुमारी मारू की बचपन में ही शादी हो गई थी। उस समय बचपन से ही शादी या रिश्ते पक्के करने की परंपरा चलती थी, ताकि दो राज्यों के संबंध अच्छे रहे। इसलिए कहा जाता है कि जब ढोला 3 साल के थे और मारू डेढ़ साल की थीं, तब इन दोनों का विवाह हो गया था।
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अपनी पत्नी को भूल गए ढोला
हालांकि, उस समय गौना काफी बाद में किया जाता था, ताकि लड़की अपने मायके में थोड़ी बड़ी हो जाए और घर संभालना सीख जाए। इसलिए इनका भी गौना नहीं हुआ था, सिर्फ शादी हुई थी। जब ढोला बड़े हुए, तो वो अपनी पत्नी मारू के बारे में भूल चुके थे और उन्होंने मालवणी नाम की राजकुमारी से शादी कर ली।
प्रेम का संदेश पहुंचाने के लिए भेजे गायक
दूसरी तरफ मारू बचपन से सिर्फ ढोला को ही चाहती रही और उनका इंतजार करती रही। इस बीच उन्होंने ढोला को कई संदेश भी भेजे, तो उन तक कभी पहुंच ही नहीं पाए। अपने प्यार का संदेश पहुंचाने के लिए मारू ने एक तरकीब निकाली और पूगल के कुछ लोक गायकों को नरवर भेजा। उन गायकों ने मल्हार राग गाकर ढोला को उनकी बचपन की शादी और मारू की याद दिलाई।
गीत सुनकर आई मारू की याद
संदेश मिलते ही ढोला को सबकुछ याद आ गया और वो अपनी मारू को वापस लाने के लिए निकल पड़े। रास्ते में ढोला को कई मुसीबतों का सामना करना पड़ा, लेकिन इन सभी परेशानियों से लड़ते हुए ढोला आखिर में अपनी पत्नी मारू को ऊंट पर बैठाकर अपने साथ वापस ले आए। तभी से ढोला-मारू की प्रेम कहानी राजस्थानी लोक संस्कृति में अमर हो गई।
आज भी सुपरहिट है ये गाना
रंगीलो म्हारो ढोलना गाने को इसी कहानी से प्रेरणा लेकर बनाया गया है। इस गाने में एक प्रेमिका अपने प्रेमी का इंतजार करती है और उसके आने की खुशी में सज-धजकर इस गाने पर डांस करती है। ये गाना आज भी कल्चर प्रोग्राम से लेकर शादी-ब्याह जैसे मौकों पर भी आज भी खूब बजाया जाता है।