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    आखिर लोग जानबूझकर अपनी जिंदगी क्यों मुश्किल बना रहे हैं? क्या है Friction Maxxing का नया ट्रेंड

    Updated: Sun, 22 Feb 2026 11:39 AM (IST)

    आजकल लोग जानबूझकर अपनी जिंदगी में थोड़ी असुविधा जोड़ रहे हैं, जिसे 'फ्रिक्शन मैक्सिंग' कहा जाता है। ...और पढ़ें

    क्या है फ्रिक्शन मैक्सिंग? (AI Generated Image)

    क्या है फ्रिक्शन मैक्सिंग? (AI Generated Image)

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के दौर में हम ऐसी दुनिया में जी रहे हैं, जहां सुविधा ही सबकुछ है। भूख लगी है, मिनटों में खाना ऑर्डर हो गया। राशन मंगाना है, कुछ ही समय में घर पर सामान डिलिवर करवा लिया। कही जाना है? एक क्लिक में कैब हाजिर है। बोरियत हो रही है? तुरंत सोशल मीडिया पर हजारों रील्स सामने आ गए, लेकिन इतनी ज्यादा सुविधा हमें मानसिक रूप से कमजोर बना रही है।

    इसलिए इससे बचने के लिए लोग अब एक नया ट्रेंड अपना रहे हैं, फ्रिक्शन मैक्सिंग। आइए जानते हैं कि यह क्या है और क्यों लोग जानबूझकर अपनी जिंदगी में मुश्किलें जोड़ रहे हैं।

    क्या है Friction Maxxing?

    आसान शब्दों में कहें तो फ्रिक्शन का मतलब है अवरोध या रगड़। फ्रिक्शन मैक्सिंग का मतलब है अपनी रोज की आदतों में जानबूझकर थोड़ी असुविधा या मेहनत को शामिल करना। इसका मकसद तकनीक और आधुनिक सेवाओं पर अपनी निर्भरता को कम करना और खुद को मानसिक रूप से ज्यादा अनुशासित बनाना है।

    Friction maxxing (1)

    (Picture Courtesy: Freepik)

     

    जहां दुनिया हर काम को आसान और तेज बनाने में लगी है, वहीं फ्रिक्शन मैक्सिंग करने वाले लोग जानबूझकर अपने और अपनी इच्छाओं के बीच एक बाधा खड़ी करते हैं। इसे समझने के लिए हमें अपनी छोटी-छोटी आदतों पर गौर करना होगा-

    • कैब के बजाय पैदल चलना- घर से एक या दो किलोमीटर की दूरी के लिए ऑटो या कैब बुक करने के बजाय पैदल जाना।
    • ऑनलाइन ऑर्डर के बजाय खाना बनाना- थकावट होने पर भी बाहर से खाना मंगाने की जगह खुद किचन में जाकर खाना तैयार करना।
    • डिजिटल डिटॉक्स- कपड़े तह करते समय या खाना खाते समय फोन का इस्तेमाल न करना और खुद को उस बोरियत का सामना करने देना।
    • सीढ़ियों का इस्तेमाल- लिफ्ट उपलब्ध होने के बावजूद जानबूझकर सीढ़ियों से चढ़ना

    यह आपके लिए क्यों फायदेमंद है?

    सुनने में यह थोड़ा अजीब लग सकता है कि कोई अपनी लाइफ को मुश्किल क्यों बनाना चाहेगा, लेकिन इसके पीछे गहरे मनोवैज्ञानिक और शारीरिक फायदे छिपे हैं-

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    • मानसिक अनुशासन- जब आप आसान रास्ता छोड़कर मुश्किल रास्ता चुनते हैं, तो आप अपने डोपामाइन लेवल को कंट्रोल करना सीखते हैं। यह आपको इंस्टेंट ग्रेटिफिकेशन से बचाता है और आपके धैर्य को बढ़ाता है।
    • फिजिकल एक्टिविटी- छोटी-छोटी दूरियां पैदल तय करने या घर के काम खुद करने से शरीर की कैलोरी बर्न होती है और आप बिना जिम जाए भी दिनभर एक्टिव रहते हैं।
    • क्रिएटिविटी और फोकस- जब आप फोन जैसी डिजिटल बाधाओं को हटा देते हैं और बोरियत को स्वीकार करते हैं, तो आपका दिमाग नई चीजें सोचने लगता है। कपड़े तह करते समय फोन न देखना आपको उस पल में जीना सिखाता है।
    • आत्मनिर्भरता का अहसास- खुद खाना बनाना या अपने काम मैन्युअली करना आपको यह अहसास दिलाता है कि आप ऐप्स और एल्गोरिदम के गुलाम नहीं हैं।