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घरों में 'ड्रॉइंग रूम' का कॉन्सेप्ट कहां से आया? विक्टोरियन युग की महिलाओं से जुड़ा है नाता, दिलचस्प है कहानी

Published: Fri, 04 Sep 2026 09:25 AM (GMT+05:30)

घरों में 'ड्रॉइंग रूम' का कॉन्सेप्ट ब्रिटिश परंपराओं से जुड़ा है। पहले इसका नाम 'विड्रॉइंग रूम' था, जो समय के साथ 'ड्रॉइंग रूम' बन गया।

घरों में कैसे बनने शुरू हुए ड्रॉइंग रूम? (AI Generated Image)

घरों में कैसे बनने शुरू हुए ड्रॉइंग रूम? (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज हमारे घरों में ड्रॉइंग रूम एक अहम हिस्सा माना जाता है। कोई मेहमान आता है, उसे ड्रॉइंग रूम में बैठाया जाता है, घर के लोग भी आपस में बातचीत करने के लिए इसी कमरे में इकट्ठा होते हैं।

इसलिए ये कमरा हमारी सोशल लाइफ का भी हिस्सा बन चुका है, लेकिन क्या आप जानते हैं घरों में ड्रॉइंग रूम का कॉन्सेप्ट कैसे आया? घरों में ड्रॉइंग रूम बनाने की कहानी ब्रिटिश इतिहास और परंपराओं से जुड़ी है। आइए जानें इस दिलचस्प कहानी के बारे में।  

अगल था घरों का ढांचा

मध्यकालीन यूरोप में आज की तरह अलग-अलग कामों के लिए अलग कमरे नहीं होते थे। एक ही बड़े हॉल में खाना, मेहमानों का स्वागत और सभी सोशल एक्टिविटीज होती थीं। समय के साथ घर व्यवस्थित होने लगे, तो सहूलियत के लिए अलग-अलग कमरे बनाने का आइडिया सामने आया। 

इसी के तहत सबसे पहले डाइनिंग रूम का कॉन्सेप्ट आया, जहां सभी लोग टेबल पर इकट्ठा होकर खाना खाते। हालांकि, इसके साथ समस्या थी कि खाना खत्म होने के बाद भी पुरुष टेबल से नहीं उठते थे। पुरुष खाने के बाद डाइनिंग टेबल पर ही बैठकर आपस में बातें करते और सिगार पीते। महिलाओं के लिए यह परेशानी भरा था, क्योंकि वे इन चर्चाओं में हिस्सा नहीं ले पाती थीं।

विड्रॉइंग रूम से ड्रॉइंग रूम

इसलिए खाने के बाद महिलाएं डाइनिंग रूम छोड़कर दूसरे कमरे में चली जाती थीं। वे जिस कमरे में जाती थीं, यानी डाइनिंग रूम से विड्रॉ करती थीं, उसे विड्रॉइंग रूम कहा जाने लगा। समय के साथ ये नाम छोटा होकर केवल ड्राइंग रूम रह गया। यानी जिस कमरे को हम आज अपनी सोशल एक्टिविटीज के लिए इस्तेमाल करते हैं, वो असल में महिलाएं के खाने के बाद आराम करने और चाय-कॉफी पीने की जगह थी। 

विक्टोरियन दौर का भारतीय घरों पर असर

ब्रिटिश काल के दौरान विक्टोरियन लाइफस्टाइल और आर्किटेक्चर भारत पहुंचा। कोलोनियल एरा में कई अमीर भारतीयों ने अपने बंगले विक्टोरियन स्टाइल में बनवाए, जिसमें भव्य ड्रॉइंग रूम भी बनवाया गया। 

मजेदार बात है कि ब्रिटेन में समय के साथ भाषा और सामाजिक व्यवस्था बदली, तो ड्रॉइंग रूम शब्द घरों से गायब हो गया। आज के समय में वहां इसे लिविंग रूम, सिटिंग रूम या लाउंज कहा जाता है। हालांकि, भारतीय अंग्रेजी में यह शब्द रह गया और आज भी ड्रॉइंग रूम शब्द का इस्तेमाल होता है।