अब पार्टी में 'जाम' छलकाना नहीं माना जा रहा कूल, Gen-Z के लिए 'सोबर' रहना ही बना असली फ्लेक्स
आज के युवाओं (Gen-Z) ने पार्टी की पूरी 'वाइब' को ही रिसेट कर दिया है। जी हां, पढ़ने में शायद अजीब लगे या यकीन न हो, लेकिन अब हाथ में जाम होना नहीं, बल ...और पढ़ें

क्यों Gen-Z को पसंद आ रहा है बिना शराब का स्वैग? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के दौर में 'नशा' नहीं, बल्कि 'होश' में रहना सबसे बड़ा स्टाइल स्टेटमेंट बन गया है। जी हां, Gen-Z ने पार्टी की दुनिया का पूरा 'वाइब' ही रिसेट कर दिया है। अब हाथ में जाम होना कूल नहीं, बल्कि 'सोबर' रहना ही रियल 'फ्लेक्स' है (Gen-Z Sober Trend)। यह बदलाव सिर्फ इंस्टाग्राम की रील्स या लाइफस्टाइल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने शराब के बड़े-बड़े ग्लोबल बिजनेस की नींद उड़ा दी है।
हालात ऐसे हैं कि दुनिया की दिग्गज शराब कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आ गई है। आखिर क्यों आज का युवा नशे से ज्यादा अपनी 'नींद' और 'करियर' को तरजीह दे रहा है? आइए जानते हैं इस बड़े बदलाव के बारे में...

(Image Source: AI-Generated)
शराब कंपनियों को लगा करोड़ों का झटका
फोर्ब्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शराब कंपनियों की वैल्यू में करीब 830 मिलियन डॉलर की भारी गिरावट आई है। हालात इतने बदल गए हैं कि जिम बीम जैसे मशहूर और पुराने ब्रांड्स को अपना प्रोडक्शन तक रोकना पड़ गया है। यह साफ इशारा है कि पुरानी शराब का जादू अब आज के युवाओं पर नहीं चल रहा है।
मिलेनियल्स से अलग है Gen-Z का स्वैग
नीलसन आईक्यू की एक रिपोर्ट बताती है कि जेन-जी, मिलेनियल्स के मुकाबले 20% कम शराब पी रहे हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन्होंने बाहर जाना छोड़ दिया है। आज का युवा 'क्वालिटी' पर भरोसा करता है। करीब 56% युवा अब चार-पांच सस्ती ड्रिंक्स पीने के बजाय, एक या दो महंगी और अच्छी क्वालिटी की 'प्रीमियम कॉकटेल' पर पैसा खर्च करना पसंद करते हैं।
खबरें और भी

(Image Source: AI-Generated)
अब बीती बात हुई लेट लाइट पार्टीज
पार्टी करने के समय में भी बड़ा बदलाव आया है। अब युवा रात के 11 बजे के बाद पार्टी करने के बजाय शाम 4 से 7 बजे के बीच बार और कैफे जाना पसंद कर रहे हैं। इस समय बाहर जाने वालों की तादाद में 34% की बढ़ोतरी हुई है। इसकी वजह यह है कि वे अपनी नींद खराब नहीं करना चाहते ताकि अगली सुबह उनका काम और प्रोडक्टिविटी प्रभावित न हो।
करियर और हेल्थ है सबसे पहले
आज के 'स्टार्टअप' और 'हसल कल्चर' वाले दौर में शराब को करियर का दुश्मन माना जा रहा है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि शराब न पीने से काम करने की क्षमता और फोकस बढ़ता है। ऐसे में, जेन-जी अब खाने-पीने को मिडिसिन की तरह देख रहे हैं। वे ऐसी ड्रिंक्स ढूंढते हैं जो उनके हार्मोन्स और सेहत को ठीक रखें। यही कारण है कि अब लोग नशा देने वाली नहीं, बल्कि शरीर को रिलैक्स करने वाली ड्रिंक्स की डिमांड कर रहे हैं।

(Image Source: AI-Generated)
बार और कैफे का बदलता ट्रेंड
अब बार और कैफे सिर्फ शराब नहीं बेच रहे, बल्कि वे स्पेशल कॉफी, बोबा टी और बिना अल्कोहल वाले ड्रिंक्स (जीरो-प्रूफ स्पिरिट्स) पर फोकस कर रहे हैं। बता दें, हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री के लिए यह बदलाव किसी चुनौती से कम नहीं है। इसमें सोशल मीडिया का बड़ा हाथ है। 54% युवा कैफे या बार का चुनाव सिर्फ इसलिए करते हैं क्योंकि वह इंस्टाग्राम पर अच्छा दिखेगा। अगर ड्रिंक की फोटो अच्छी नहीं आती, तो आज के दौर में उसका कोई महत्व नहीं है।
शराब छूटी पर धुआं नहीं
भारत के बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में भी यह ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। युवा अब शराब की बोतलों पर पैसे उड़ाने के बजाय अच्छे एक्सपीरिएंस और वाइब पर खर्च करना चाहते हैं। हालांकि, इसका एक दूसरा पहलू भी है। भले ही शराब का सेवन कम हुआ है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि नशा पूरी तरह खत्म हो गया है। अब युवाओं का झुकाव शराब से हटकर स्मोकिंग की तरफ बढ़ता हुआ भी देखा जा रहा है।