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    क्यों कुछ लोगों से मिलते ही डाउन हो जाती है आपकी बैटरी? साइकोलॉजी में छिपा है जवाब

    Updated: Sat, 07 Feb 2026 07:12 AM (IST)

    क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है? आप पूरा दिन खुश थे, एनर्जी से भरे थे, लेकिन फिर आप एक खास दोस्त या रिश्तेदार से मिले... और सिर्फ 15 मिनट की बातचीत के बा ...और पढ़ें

    क्यों कुछ लोग आपकी सारी एनर्जी निचोड़ लेते हैं? (Image Source: AI-Generated)

    क्यों कुछ लोग आपकी सारी एनर्जी निचोड़ लेते हैं? (Image Source: AI-Generated) 

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आपने न तो कोई मैराथन दौड़ी है, और न ही जिम में हैवी वेट उठाया है। आपने बस अपने एक 'खास' दोस्त या रिश्तेदार के साथ बैठकर 15 मिनट चाय पी है। मगर... अजीब बात है, घर लौटते ही आपको ऐसा महसूस हो रहा है जैसे किसी ने आपके शरीर से सारी जान खींच ली हो।

    सब कुछ ठीक था, आप खुश थे, लेकिन उस एक इंसान से मिलने के बाद अब आपको बस एक कोने में लेटने का मन कर रहा है। क्या यह सिर्फ आपका वहम है या आप ज्यादा सोच रहे हैं?

    जी नहीं, यह बिल्कुल सच है। साइकोलॉजी कहती है कि कुछ लोग सच में 'एनर्जी वैम्पायर' होते हैं। ये वो लोग हैं जो बिना आपको छुए, सिर्फ बातों से आपकी मेंटल बैटरी को 100% से सीधा 1% पर ला सकते हैं। आइए, विस्तार से समझते हैं इस बारे में (Why Some People Drain Your Energy)।

    Why Some People Drain Your Energy

    (Image Source: AI-Generated) 

    इमोशनल इन्फेक्शन

    साइकोलॉजी में एक टर्म है- 'Emotional Contagion'। आसान भाषा में कहें तो जज्बात भी सर्दी-जुकाम की तरह फैलते हैं। हमारा दिमाग एक 'शीशे' की तरह काम करता है। जब सामने वाला व्यक्ति लगातार शिकायत कर रहा होता है, या बहुत ज्यादा नेगेटिव बातें कर रहा होता है, तो हमारा दिमाग अनजाने में उसी के मूड को कॉपी करने लगता है। उनकी टेंशन आपकी टेंशन बन जाती है और शरीर में स्ट्रेस हार्मोन रिलीज होने लगते हैं, जिससे आप थक जाते हैं।

    सिर्फ 'मैं, मैं और मैं'

    कुछ लोगों से बात करना 'बातचीत' नहीं, बल्कि एक तरफा भाषण सुनने जैसा होता है। वे आपसे सवाल नहीं पूछते, वे सिर्फ अपने बारे में बात करते हैं- अपनी समस्याएं, अपनी बीमारियां या अपनी बड़ाई। जब आपको बातचीत में शामिल होने का मौका नहीं मिलता, तो आपका दिमाग 'पैसिव मोड' में जाकर थकने लगता है। रिश्तों में एनर्जी का गिव एंड टेक होना जरूरी है, जब यह एकतरफा होता है, तो बैटरी डाउन होना तय है।

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    ड्रामे का डर

    कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनके सामने आपको बहुत सोच-समझकर बोलना पड़ता है। आपको डर रहता है कि कहीं वो बुरा न मान जाएं या कोई नया ड्रामा न शुरू कर दें। जब आपका दिमाग लगातार अलर्ट रहता है और हर शब्द तोल-मोल कर बोलता है, तो वह सामान्य से दुगनी एनर्जी खर्च करता है। इसे 'कॉग्निटिव लोड' कहा जाता है। यही कारण है कि उनसे मिलने के बाद आपको लगता है कि आप कोई भारी काम करके आए हैं।

    कैसे करें डील?

    अपनी 'बैटरी' बचाना आपकी जिम्मेदारी है। इसका मतलब यह नहीं कि आप लोगों की मदद करना छोड़ दें, लेकिन आपको अपनी सीमाएं तय करनी होंगी। ऐसे लोगों के साथ कम समय बिताएं और उन लोगों के साथ ज्यादा रहें जो आपको 'ड्रेन' नहीं, बल्कि 'रिचार्ज' करते हैं। याद रखें, आपकी मेंटल पीस से बढ़कर कुछ नहीं है।

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